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    MLC आशुतोष सिन्हा ने दालमंडी का मुद्दा उठाया:विधान परिषद में बोले- दालमंडी गंगा-जमुनी तहजीब, दुकानदारों को कहीं बसाया जाए

    3 hours ago

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    वाराणसी के हाकिम मोहम्मद जाफर मार्ग (दालमंडी) में चौड़ीकरण का काम लगातार जारी है। इस समय 30 से अधिक मकानों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई चल रही है। अभी तक 35 मकानों की रजिस्ट्री की जा चुकी है। इधर लगातार अब दालमंडी चौड़ीकरण को लेकर आवाज उठ रही है। इसी क्रम में वाराणसी स्नातक क्षेत्र से एमएलसी आशुतोष सिन्हा ने विधान परिषद में दालमंडी का मुद्दा उठाया और दुकानदारों के हक और उन्हें विस्थापित करने की बात कही। एमएलसी ने विधान परिषद में दुकानदारों का दर्द बयान किया एमएलसी आशुतोष सिन्हा ने विधान परिषद में दालमंडी का मुद्दा उठाया। दालमंडी में चल रहे चौड़ीकरण के कार्य को उन्होंने सही ठहराया। लेकिन उन्होंने दुकानदारों की बात की और उन्हें कहीं अन्य जगह बसाने की बात की। उन्होंने कहा- यहां सभी धर्म के लोग एक साथ रहते हैं और कौमी एकता का यह मिसाल है। लेकिन उसके बावजूद इसे तोड़ा जा रहा है जो की गलत है क्योंकि यहां के दुकानदारों को कहीं और बसाया नहीं जा रहा है। जो की गलत और नियम विरुद्ध है। जानिए आशुतोष ने विधान परिषद में दालमंडी पर क्या कहा ? गंगा-जमुनी तहजीब का उदहारण है दालमंडी विधान परिषद में बोलते हुए एमएलसी आशुतोष सिन्हा ने कहा - हाकिम मोहम्मद जफर मार्ग जिसे दालमंडी के नाम से जाना जाता है। पूरे पूर्वांचल की सबसे बड़ी मंडी है। सभी जाति, धर्म के लोगों का यहां व्यापार चलता है। हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सबकी दुकानें इस दालमंडी में हैं, जो गंगा जमुनी तहजीब का उदहारण है वह दालमंडी में ही देखने को मिलता है। होली, दीवाली,ईद, बकरीद सब एक साथ मिलकर मनाते हैं। लेकिन क्योंकि इसका पुराना नाम हाकिम मोहम्मद जफर मार्ग है सरकार को बड़ी आपत्ति दालमंडी से हो गई। गलियों में बस्ती है बनारस की आत्मा आशुतोष सिन्हा ने आगे कहा - बनारस गलियों का शहर है और इसी में बनारस की आत्मा बस्ती है। उसको चौड़ा करने की बात हो गयी। हम विकास के या चौड़ीकरण के विरोधी नहीं है। लेकिन जिन दुकानों को चौड़ा किया जा रहा है। उन दुकानदारों का क्या, जिन दुकानदारों की कमाई 500-हजार रुपए है। घर जाते हैं तो उससे उनकी रोजी रोटी चलती। उन दुकानों को विकास प्राधिकरण और पीडब्ल्यूडी और नगर निगम तोड़ने का काम कर रहे हैं। रोजी-रोटी के लिए लड़ रहे दालमंडी के दुकानदार एमएलसी ने आगे कहा - आज दालमंडी में आदमी दो वक्त की रोटी कमाने के लिए लड़ रहा है। विकास प्राधिकरण उन दुकानदारों को कहीं और दूकान देता तो वो भी ध्वस्तीकरण में सहयोग करते। विकास के काम में सहयोग करते। लेकिन किसी का व्यवसाय उजाड़कर कैसा विकास किया जा रहा है। इसकी वजह से दुकानदारों में आक्रोश है। अब जानिए क्या है दालमंडी प्रोजेक्ट … वाराणसी की दालमंडी गली को मॉडल सड़क के रूप में विकसित किया जाना है। प्रधानमंत्री ने अपने 51वें काशी के दौरे पर इस कार्य का शिलान्यास किया था। इसके लिए राज्य सरकार की तरफ से 215.88 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं। 186 भवन, दुकान स्वामियों को 191 करोड़ रुपए मुआवजा के रूप में दिए जाएंगे। 60 फुट चौड़ी होगी सड़क पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के अनुसार नई सड़क से लेकर चौक थाने तक 650 मीटर की दाल मंडी गली को 60 फुट चौड़ा किया जाना है। इसमें 30 फुट की सड़क और दोनों तरफ 15-15 फुट की पटरी होगी। इसके अंदर बिजली, सीवर और पानी की व्यवस्था अंडरग्राउंड की जाएगी। यहां तारों का जंजाल साफ किया जाएगा। 220 करोड़ से बनेगी 650 मीटर लंबी सड़क
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