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    नोएडा में फर्जी कॉल सेंटर चलाने वाले 4 गिरफ्तार:क्रू शिप में नौकरी के नाम पर करते थे ठगी, बैंक अकाउंट में एक करोड़ रुपए मिला

    4 hours ago

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    साइबर क्राइम और सेक्टर-126 थाना पुलिस की ज्वाइंट टीम ने फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा किया है। ये लोगों को क्रू-शिप (समुद्री जहाज) में नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी कर रहा था। पुलिस ने इस गिरोह के चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके कब्जे से लैपटॉप, मोबाइल फोन, कॉलिंग डेटा और कई फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं। एडिशनल डीसीपी मनीषा सिंह ने बताया कि सेक्टर-132 क्षेत्र में एक कंपनी के नाम पर कॉल सेंटर चलाकर लोगों से नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे वसूले जा रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने संयुक्त टीम बनाकर मौके पर छापा मारा और सी हायर मरीन सर्विसेज कंपनी नाम से चल रही फर्जी कंपनी का भंडाफोड़ कर दिया। मौके से चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जालौन निवासी राहुल, अलीगढ़ निवासी प्रशांत, गौतमबुद्धनगर निवासी विशाल शर्मा और कानपुर नगर निवासी सैफ वारिश के रूप में हुई है। राहुल गिरोह का सरगना है। इंटरनेट कालिंग और डेटा लेकर करते बातचीत पुलिस के अनुसार आरोपी लंबे समय से यह ठगी कर रहे थे और देश के कई राज्यों के लोगों को निशाना बना चुके हैं। जांच में सामने आया कि आरोपी इंटरनेट और कॉलिंग के जरिए नौकरी तलाश रहे युवाओं का डेटा जुटाते थे। इसके बाद उन्हें फोन करके विदेश में क्रू-शिप में नौकरी दिलाने का लालच दिया जाता था। आकर्षक वेतन और विदेश में काम करने का सपना दिखाकर उनसे रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग फीस और अन्य खर्चों के नाम पर एक लाख से लेकर एक लाख बीस हजार रुपये तक वसूले जाते थे। पैसा मिलने के बाद आरोपी या तो फोन उठाना बंद कर देते थे या फिर नई फीस की मांग करने लगते थे। अलग-अलग खातों में एक करोड़ मिले पुलिस के अनुसार आरोपियों ने इस तरीके से अलग-अलग बैंक खातों में लगभग एक करोड़ रुपये की ठगी की है। बरामद बैंक पासबुक और खातों की जांच में पता चला कि केरल, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में इनके खिलाफ शिकायतें दर्ज हैं। पुलिस अब इन खातों और अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। 26 शीट डेटा मिला छापेमारी के दौरान पुलिस को आरोपियों के पास से तीन लैपटॉप, सात मोबाइल फोन, कॉलिंग डेटा की 26 शीट, 21 रजिस्टर, चार मोहर, चार फर्जी जॉइनिंग लेटर और कई बैंक दस्तावेज मिले हैं। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल लोगों को भरोसा दिलाने और ठगी को असली दिखाने के लिए किया जाता था। पुलिस बरामद सामान के आधार पर गिरोह के नेटवर्क की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। 50 हजार रुपए प्रतिमाह देते थे किराया जिस बिल्डिंग में कॉल सेंटर संचालित हो रहा था उसे गिरोह के सरगना ने 50 हजार रुपए प्रतिमाह किराए पर लिया हुआ था। बीते एक साल से वहां पर कॉल सेंटर संचालित हो रहा था। बेरोजगार युवकों का डाटा आरोपियों को कहां से मिलता था,इसका पता लगाया जा रहा है। ज्यादातर आरोपी स्नातक हैं। सभी का आपराधिक इतिहास पता किया जा रहा है।
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