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    न्यू कानपुर सिटी परियोजना में KDA को हाईकोर्ट से राहत:अधिग्रहण में गई जमीन का बढ़ाकर मुआवजा मांगने वालों की याचिका खारिज

    12 hours ago

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    कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) को न्यू कानपुर सिटी परियोजना में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बढ़ी राहत दी है। परियोजना के भूमि अधिग्रहण में ग्राम बैरी व अकबरपुर में 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के आधार पर बढ़ी दर पर मुआवजा मांगने वालों की याचिका को खारिज कर दिया। सर्वेश कुमार व अन्य बनाम उप्र राज्य व अन्य मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी व न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की बेंच ने कहा कि अत्यधिक विलंब किसी भी अधिग्रहण की कार्यवाही को चुनौती देने का पक्षकारों का अधिकार समाप्त कर देता है। इस फैसले के साथ केडीए को परियोजना में एक बड़ी जीत मिली है। बताते चलें कि इनकी जमीन का अधिग्रहण साल 2010 में पूरा हो गया था, जिसको बाद इन्होंने मुआवजा नहीं लिया था। साल 2025 में इन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। अधिग्रहण और याचिका दाखिल करने में 15 साल की देरी याचिका खारिज होने की प्रमुख वजह बनी। 2010 में हुआ था अधिग्रहण, 2025 में दी चुनौती केडीए के वकील यश पाड़िया ने कोर्ट में पक्ष रखते हुए कहा कि मामले में अधिग्रहण की कार्यवाही 1996 में प्रारंभ हो गई थी और 2010 में पूर्ण हो गई । वादकारियों द्वारा इसको प्रथम बार 2025 में चुनौती दी गई। केडीए का पक्ष सुनने के बाद न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि संबंधित अधिग्रहण की कार्यवाही में कई अन्य वादकारियों को कोर्ट द्वारा राहत दी गई हो। लेकिन इस मामले में पक्षकारों के 15 वर्ष से अधिक के विलंब के कारण उनको वही समान राहत देना न्यायहित में नहीं है। वादकारियों के दावे अधिग्रहण के 2013 के नए कानून के अनुसार मुआवजे के दावे को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया गया। यह है मामला बताते चलें कि केडीए द्वारा याचिकाकर्ताओं की जमीन ग्राम बैरी व अकबरपुर कछार में साल 1996 में न्यू कानपुर सिटी के विकास के लिए अधिग्रहित की गई थी। भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत कार्रवाई में साल 2010 में अवॉर्ड (मुआवजे का निर्धारण) पारित कर दिया गया। जमीन के मालिकों ने वर्तमान सर्किल रेट पर मुआवजा दिए जाने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनकी मांग थी कि 2013 के नए भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार मुआवजा दिया जाए। मामले में कोर्ट ने कहा कि अधिग्रहण 1996 में हुआ, अवॉर्ड 2010 में हुआ। लेकिन याचिका 2025 में लगभग 15 साल बाद दायर की गई। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि इतनी देरी के बाद अधिग्रहण या अवॉर्ड को चुनौती नहीं दी जा सकती। क्या है न्यू कानपुर सिटी परियोजना केडीए की इस परियोजना में पांच गांवों को शामिल किया गया है। इसको लगभग 153.32 हेक्टेयर जमीन में विकसित किया जा रहा है। कल्याणपुर बिठूर रोड में विकसित हो रही इस परियोजना में आवासीय प्लॉट, कॉमर्शियल हब, होटल, सड़कें, पार्क, अस्पताल, मल्टीलेवल पार्किंग आदि होगा। इस परियोजना को साल 1996 में प्रस्तावित किया गया था। 2010 में पहले चरण का अधिग्रहण हुआ। 2025 में इसको लांच करने की सुगबुगाहट भी हुई थी। केडीए के अधिकारी बताते हैं कि इस फैसले के बाद अब इसको जल्द ही लांच किया जाएगा।
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