Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    न्यूयॉर्क में तिरंगे का अपमान, खालिस्तानियों की नारेबाजी:रिजिजू ने वीडियो पोस्ट किया, लिखा- देश-झंडे का अपमान न करें, ये महंगा पड़ेगा

    20 hours ago

    1

    0

    न्यूयॉर्क में तिरंगे के अपमान का मामला सामने आया है। शनिवार रात मैडिसन स्क्वायर गार्डन में RSS प्रमुख मोहन भागवत का कार्यक्रम हुआ था। जिसके विरोध में कई लोगों ने न्यूयॉर्क में प्रदर्शन किया। इस दौरान एक प्रदर्शनकारी भारतीय झंडे को अपने पैर में बांधकर अपमान करता नजर आ रहा है। इसके बाद खालिस्तान के समर्थन में नारे भी लगाए गए। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस घटना का वीडियो रविवार रात X पर शेयर किया। उन्होंने लिखा - हमने हमेशा कहा है कि RSS, BJP या सरकार की आलोचना करने की आजादी है, लेकिन हमारे झंडे और मेरे देश का अपमान मत करो। यह बहुत महंगा पड़ेगा। भागवत बोले- भारत के DNA में एकता और विविधता मैडिसन स्क्वायर में शनिवार को आयोजित ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम में 6,000 से ज्यादा भारतीय-अमेरिकी और अलग-अलग धर्मों के नेता शामिल हुए। भागवत ने अपने संबोधन में विविधता में एकता को भारत के DNA का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा- सोचने की क्षमता इंसान के लिए एक वरदान है। सही सोच इंसान को भगवान के करीब ले जाती है। गलत सोच उसे जानवरों के करीब ले जाती है। भागवत के संबोधन से पहले अलग-अलग धर्मों के नेताओं ने भी एकता, विविधता, करुणा और एक-दूसरे की मदद का संदेश दिया। कार्यक्रम में रब्बी जैकब ब्लूमेंथल, रिवर साइड चर्च की वरिष्ठ मंत्री रेव. एड्रिएन थॉर्न और वॉशिंगटन डीसी की मस्जिद मुहम्मद के अध्यक्ष एवं इमाम तालिब एम. शरीफ समेत कई धर्मगुरु शामिल हुए। भागवत के भाषण की 5 बड़ी बातें… 1. धर्म सिर्फ पूजा नहीं, जीवन को संतुलित रखने का नियम: भागवत ने कहा कि भारत में जिस सिद्धांत को धर्म कहा जाता है, उसे सिर्फ धर्म या पूजा के तौर पर नहीं समझना चाहिए। धर्म वह व्यवस्था है जो ब्रह्मांड और जीवन को संभालती है। यह जीवन की अलग-अलग स्थितियों के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद करती है। 2. सिर्फ भौतिक सुख से जिंदगी में संतुष्टि नहीं मिलती: भागवत ने कहा कि पैसा, सामान और दूसरी भौतिक सुविधाएं हमेशा खुशी नहीं दे सकतीं। भौतिक सुख अस्थायी होता है और बहुत ज्यादा सुविधाएं होने के बावजूद संतुष्टि की कमी रह सकती है। 3. अमेरिका कर्मभूमि है, उसके प्रति सच्चे रहें: अमेरिका में रहने वाले भारतीयों से भागवत ने कहा कि आपकी पहली जिम्मेदारी अपनी कर्मभूमि के प्रति है, उसके प्रति वफादार रहना चाहिए। 4. जीवन में सीधे संन्यास नहीं, हर पड़ाव की अपनी जिम्मेदारी: भागवत ने कहा कि इंसान के जीवन में चार चरण होते हैं- ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास। पहले सीखना, फिर परिवार और समाज को संभालना और बाद में अपने अनुभव अगली पीढ़ी को देना जरूरी है। 5. व्यक्ति, समाज और पर्यावरण साथ आगे बढ़ें: भागवत ने कहा कि प्रगति के लिए न व्यक्ति को दबाना चाहिए और न समाज को। व्यक्ति, समाज और पर्यावरण की भलाई साथ-साथ होनी चाहिए। RSS के शताब्दी वर्ष के मौके पर भागवत का 3 देशों का दौरा भागवत 25 अगस्त को न्यूयॉर्क गए थे। यह उनके 17 दिन के तीन देशों के दौरे का पहला पड़ाव है। भागवत का यह दौरा RSS के शताब्दी वर्ष के ग्लोबल आउटरीच कार्यक्रम के तहत हो रहा है। RSS के 100 साल पूरे होने के मौके पर देश-विदेश में कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अमेरिका के बाद भागवत कनाडा और ब्रिटेन जाएंगे। न्यूयॉर्क मेयर ने भागवत के कार्यक्रम का विरोध किया था भागवत के कार्यक्रम से पहले न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने कहा था कि वह RSS की इस रैली का समर्थन नहीं करते। जब ममदानी से पूछा गया कि क्या RSS का कार्यक्रम रद्द किया जाना चाहिए, तो उन्होंने कहा- मुझे नहीं पता कि किसी निजी कार्यक्रम को रद्द करने का अधिकार शहर के पास है या नहीं। अमेरिकी आयोग भी RSS पर बैन की मांग कर चुका भागवत के अमेरिका दौरे से पहले अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने RSS पर बैन लगाने की मांग की थी। आयोग ने 19 अगस्त को अमेरिकी सरकार से RSS नेताओं को हाई लेवल राजनयिक सुविधाएं नहीं देने और उनसे आधिकारिक मुलाकात नहीं करने की अपील भी की। हालांकि, भारत ने USCIRF की इन टिप्पणियों पर आपत्ति जताई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 20 अगस्त को आयोग को ‘पक्षपाती संस्था’ बताया था। उन्होंने कहा कि USCIRF लंबे समय से भारत को लेकर गलत और भड़काऊ बयान देता रहा है, इसलिए उसकी बातों को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है। 2018 में भी अमेरिका गए थे भागवत मोहन भागवत इससे पहले सितंबर 2018 में अमेरिका गए थे। उन्होंने शिकागो में 7 से 9 सितंबर 2018 तक आयोजित दूसरे वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस में हिस्सा लिया था। इस कार्यक्रम में 60 देशों से करीब 2,500 प्रतिनिधि शामिल हुए थे। भागवत ने कांग्रेस के उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण दिया था। 2018 के इस दौरे की उपलब्ध रिपोर्टों में भागवत की किसी अमेरिकी राजनयिक से मुलाकात या उन्हें किसी औपचारिक राजनयिक सम्मान दिए जाने का जिक्र नहीं मिलता। उनका दौरा मुख्य रूप से वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस और उससे जुड़े कार्यक्रमों पर केंद्रित था। ------------------------------ ये खबर भी पढ़ें… भागवत बोले- जेन-जी हमारी पीढ़ी से ज्यादा ईमानदार और देशभक्त:हमें उनकी बात समझनी चाहिए, उनसे बात नहीं हुई तभी तो आंदोलन हुआ संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में Gen-Z और Gen-अल्फा से 1 घंटे तक संवाद किया। उन्होंने कहा कि जेन-जी और जेन-अल्फा, पुरानी पीढ़ी से भी ज्यादा देशभक्त और ईमानदार है। उन्होंने कहा- हमें उनकी बात सुननी चाहिए। उनसे बातचीत में कमी थी, इसीलिए दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन हुआ। पूरी खबर पढ़ें…
    Click here to Read more
    Prev Article
    UP में गंगा एक्सप्रेस-वे पर पानी भरा:चित्रकूट में घरों में 5 फीट तक कीचड़ घुसा; ओडिशा में बारिश से दीवार गिरी, 2 की मौत
    Next Article
    पेट्रोल-पंपों पर एथेनॉल प्रतिशत बताने की मांग वाली याचिका खारिज:सुप्रीम कोर्ट बोला- सक्षम अथॉरिटी के पास जाएं; E20 ईंधन से पुरानी गाड़ियों में खराबी की आशंका

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment