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    पीएम मोदी से मिले वरुण गांधी:लोकसभा चुनाव में टिकट कटने के बाद पहली मुलाकात, मां मेनका और वरुण दोनों किसी सदन के सदस्य नहीं हैं

    2 hours ago

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    लोकसभा चुनाव में पीलीभीत से टिकट कटने के बाद भाजपा नेता वरुण गांधी ने पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दिल्ली में मुलाकात की। इस दौरान उनकी पत्नी यामिनी और बेटी भी साथ में थीं। मुलाकात के बाद वरुण गांधी ने X पर लिखा- आपके व्यक्तित्व में पिता जैसा स्नेह और सुरक्षा का भाव है। आपसे मिलकर यह भरोसा और बढ़ जाता है कि आप देश और देशवासियों के सच्चे अभिभावक हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में टिकट न मिलने के बाद वरुण गांधी सक्रिय राजनीति से दूर हैं। हालांकि, पीएम से मुलाकात के बाद उनके फिर से सक्रिय राजनीति में लौटने की संभावना जताई जा रही है। एक दशक से संगठन में किनारे वरुण गांधी वरुण गांधी को 2013 में भाजपा का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया था। उन्हें उसी समय पश्चिम बंगाल का प्रभारी भी बनाया गया था। उस दौर में यूपी की राजनीति में वह प्रमुख चेहरा थे। सीएम पद के लिए भी उनका नाम चर्चा में रहता था। लेकिन, 2014 में नई कार्यकारिणी बनी और उन्हें जगह नहीं मिली। तब से अब तक, करीब एक दशक में उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी गई है। माना जाता है कि सरकार और सिस्टम पर उनके बयानों की वजह से वह संगठन से दूर रहे। 2009 में शुरुआत, 2014 में बदली सीटें राजनीतिक करियर की बात करें तो 2004 में उन्होंने मां मेनका गांधी के लिए प्रचार किया। वरुण गांधी ने 2009 में पीलीभीत से राजनीति में कदम रखा। 2009 में पीलीभीत से सांसद चुने गए। पहले ही चुनाव में उन्होंने 2.81 लाख वोटों से जीत दर्ज की। 2013 में उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया। 2014 में भाजपा ने मां-बेटे की सीट बदल दी। वरुण को सुल्तानपुर और मेनका गांधी को पीलीभीत से टिकट मिला। सुल्तानपुर में भी वरुण ने बड़ी जीत हासिल की। पीलीभीत सीट को गांधी परिवार का मजबूत गढ़ माना जाता है। 2019 में फिर पीलीभीत से सांसद चुने गए। पेश से लेखक रहे हैं वरुण गांधी वरुण गांधी का जन्म 13 मार्च 1980 को हुआ। वह पेशे से राजनेता, कॉलमनिस्ट और राइटर हैं। उनकी पत्नी का नाम यामिनी राय चौधरी है। पिता संजय गांधी (दिवंगत) और मां मेनका गांधी हैं। उन्होंने लंदन विश्वविद्यालय से बी.एससी ऑनर्स की पढ़ाई की है।
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