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    पार्षद दल नेता के वार्ड में सीवर चोक और जलभराव:वार्ड-93 में तीन दशक से जागेश्वर अस्पताल बंद, लोग बोले- पार्षद सुनते नहीं हैं

    1 day ago

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    पार्षद दल के नेता जिस वार्ड का प्रतिनिधित्व करते हैं, वहां भी सीवर चोक मिले। घरों में गंदा पानी पहुंच रहा है। पार्क बदहाल हैं। अस्पताल तीन दशक से बंद है। लोगों का कहना है कि घर के बाहर सीवर लाइन का काम करने वाले सड़कें खोद गए हैं। मेरी पाइपलाइन भी टूट गई। पेड़ की टहनियां मेरे घर के अंदर आ रही हैं। पार्षद नहीं सुन रहे हैं। दैनिक भास्कर एप की वार्ड परिक्रमा में लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आया। दक्षिण कानपुर के लिए कभी महत्वपूर्ण रहा जागेश्वर अस्पताल बंद है। घरों में गंदा पानी पहुंच रहा है और चोक सीवर-जलभराव से लोग परेशान हैं। दैनिक भास्कर वार्ड परिक्रमा अभियान चला रहा है। इसी कड़ी में वार्ड-93 का जायजा लिया गया... बी-ब्लॉक के हरि पार्क में टूटे झूले और जलभराव मिला। गांधी पार्क में कूड़ा फैला था और बेंचें टूटी हुई नजर आईं। 11 ब्लॉक में गंदे पानी की आपूर्ति और बारिश में जलभराव की समस्या सामने आई। लेबर कॉलोनी में चोक सीवर और दिन में जलती स्ट्रीट लाइटें मिलीं। वहीं डीबीएस कॉलेज के पास चोक नाली और कूड़े का अंबार बदहाल सफाई व्यवस्था की तस्वीर पेश करता मिला। पहले ये नजारा देखिए... जागेश्वर अस्पताल बंद, इलाज के लिए भटक रहे लोग वार्ड का सबसे बड़ा मुद्दा वर्षों से बंद पड़ा जागेश्वर अस्पताल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कभी दक्षिण कानपुर का प्रमुख सरकारी अस्पताल था, जहां कम खर्च में इलाज की सुविधा मिलती थी। अब उसी भवन में नगर निगम जोन-5 का कार्यालय संचालित हो रहा है। अस्पताल की जगह केवल नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (यूपीएचसी) संचालित है, जहां सीमित स्वास्थ्य सेवाएं मिलती हैं। लोगों ने अस्पताल को दोबारा शुरू करने की मांग की। पार्क बदहाल, बच्चों के झूले टूटे बी-ब्लॉक स्थित गांधी पार्क में जगह-जगह कूड़ा फैला मिला और बैठने की बेंचें टूटी हुई थीं। हरि पार्क में बच्चों के झूले टूटे या गायब मिले। पार्क में जलभराव होने से टहलने आने वाले लोगों और बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दो वर्ष पहले तक पार्क की स्थिति बेहतर थी, लेकिन अब रखरखाव पूरी तरह ठप हो गया है। गंदा पानी और जलभराव से लोग परेशान 11 ब्लॉक के लोगों ने बताया कि लंबे समय से घरों में गंदा पानी आ रहा है। हल्की बारिश में ही गलियां पानी से भर जाती हैं। खालसा इंटर कॉलेज के पास की गली में वर्षों से जलभराव और दूषित पेयजल की समस्या बनी हुई है। कई हैंडपंप भी खराब पड़े हैं, जिससे लोगों को अतिरिक्त परेशानी झेलनी पड़ रही है। वार्ड की बड़ी समस्याएं बंद सरकारी अस्पताल: जागेश्वर अस्पताल वर्षों से बंद है। लोगों को बेहतर सरकारी इलाज की सुविधा नहीं मिल रही। गंदा पेयजल और जलभराव: 11 ब्लॉक समेत कई इलाकों में दूषित पानी की सप्लाई और बारिश में जलभराव की समस्या है। चोक सीवर और नालियां: लेबर कॉलोनी सहित कई स्थानों पर सीवर चोक हैं और नालों की नियमित सफाई नहीं होती। बदहाल पार्क: गांधी पार्क और हरि पार्क में सफाई, झूले, बेंच और रखरखाव की स्थिति खराब है। सफाई और स्ट्रीट लाइट की समस्या: कूड़ा समय पर नहीं उठता। कई स्ट्रीट लाइटें खराब हैं, जबकि कुछ दिन में भी जलती रहती हैं। जागेश्वर अस्पताल और सीवर व्यवस्था पर सवाल शिवम ने बताया कि जागेश्वर अस्पताल कोरोना काल में वैक्सीनेशन केंद्र बना था। लोगों को उम्मीद थी कि अस्पताल फिर से शुरू होगा, लेकिन आज तक संचालन नहीं हो सका। देशपाल सिंह हांडा ने कहा कि वर्षों से नाले की सही ढंग से सफाई नहीं हुई और केवल खानापूरी की जाती है। उनका कहना है कि नई सीवर लाइन की बजाय मौजूदा व्यवस्था को दुरुस्त करने की जरूरत है। मनीष मल्होत्रा ने बताया कि लेबर कॉलोनी में सीवर चैंबर भरे रहने से घरों में बदबू फैल रही है, लेकिन समाधान नहीं हुआ। बदहाल पार्क और सफाई व्यवस्था से लोग नाराज पुनीत ने बताया कि हरि पार्क में सफाई नहीं होती, झूले टूटे पड़े हैं, स्ट्रीट लाइट खराब है और जलभराव रहता है। रमेश सिंह ने कहा कि दो साल पहले पार्क अच्छी स्थिति में था, लेकिन अब कूड़े के ढेर लगे हैं और लोग वहां जाना पसंद नहीं करते। डाली बाजपेई ने बताया कि नालियों की नियमित सफाई नहीं होती, वे जाम रहती हैं और पेयजल की समस्या भी बनी हुई है। खुदाई से बढ़ीं दिक्कतें सुलेखा द्विवेदी ने बताया कि सीवर कार्य के दौरान घर के बाहर खुदाई कर पाइपलाइन तोड़ दी गई। पेड़ों की टहनियां भी घर तक आ रही हैं। उनका आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया। चोक सीवर और स्ट्रीट लाइट व्यवस्था पर सवाल लेबर कॉलोनी में भगत सिंह पार्क के आसपास सीवर चोक होने से बदबू फैल रही है। लोगों ने बताया कि सीवर का पानी भरने से घरों के आसपास रहना मुश्किल हो गया है। स्ट्रीट लाइट व्यवस्था भी अव्यवस्थित मिली। कई लाइटें दिन में जलती रहती हैं, जबकि खराब लाइटें रात में भी बंद रहती हैं। कूड़ा और चोक नालियां बनीं बड़ी समस्या डीबीएस कॉलेज की बाउंड्री के पास, नटराज सिनेमा के बगल वाली गली और रामलीला मैदान के आसपास कूड़े के ढेर और चोक नालियां मिलीं। गोविंद नगर थाने वाली सड़क पर पेड़ों की बढ़ी टहनियां मकानों तक पहुंच गई हैं, जिससे हादसे की आशंका बनी हुई है। स्थानीय लोगों ने नियमित नाला सफाई और कूड़ा उठान की मांग की। ------------------ ये खबर भी पढ़िए… चमनगंज में स्वच्छता की खुशबू नहीं, सिर्फ गंदगी और दुर्गंध:वार्ड-71 में सड़कें टूटीं, नालियां चोक; लोग बोले- यहां ‘चमन’ जैसा कुछ नहीं चमनगंज में स्वच्छता की खुशबू नहीं, गंदगी और बदबू रहती है। लोगों का कहना है कि वार्ड-71 नाम का ही चमनगंज है। जबकि यहां की गलियों में टूटी सड़कें, चोक नालियां, खराब स्ट्रीट लाइटें और बेतरतीब पार्किंग लोगों की मुसीबत बढ़ा रही है। पार्षद से शिकायत करने पर सिर्फ आश्वासन मिलता है, समाधान नहीं। दैनिक भास्कर की वार्ड परिक्रमा के दौरान वार्ड-71 सीसामऊ दक्षिण (चमनगंज क्षेत्र) की जमीनी हकीकत परखी गई। स्थानीय लोगों ने बताया कि क्षेत्र की अधिकांश नालियां महीनों तक साफ नहीं होतीं। जिस वजह से हल्की बारिश में भी पानी सड़कों और गलियों में भर जाता है। कई जगह गंदा पानी घरों के अंदर तक पहुंच जाता है, जिससे बदबू और मच्छर बढ़ गए हैं। पूरी खबर पढ़ें… ------------------ ये खबर भी पढ़िए… बंदर सामान उठा ले जाते हैं, कुत्ते-सांड़ हमला करते हैं…:वार्ड-79 में लोग जानवरों से परेशान, बोले- पार्षद न बंदर पकड़वाते न सफाई कराते बंदर कपड़े और सामान उठा ले जाते हैं। भागो नहीं तो काट लेते हैं। आवारा कुत्ते, सांड़ और गाय हर समय सड़कों पर बैठे रहते हैं। कई लोग इनके हमलों में घायल हो चुके हैं…। ये समस्या कानपुर नगर निगम के वार्ड-79 के लोगों ने बताई है। उनके लिए जानवर ही सबसे बड़ी समस्या हैं। इसके अलावा गंदगी, जलभराव और टूटी सड़कों से भी लोग परेशान हैं। उनका कहना है कि पार्षद न तो सफाई करा रहे हैं और न ही बंदर पकड़वा रहे हैं। दैनिक भास्कर की वार्ड परिक्रमा के दौरान लोगों ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि वार्ड-79 में किसी चोर-उचक्के से ज्यादा डर बंदरों से लगता है। बंदर घरों में घुसकर सामान तोड़ते हैं। राह चलते लोगों पर हमला करते हैं। गलियों में आवारा पशुओं का जमावड़ा रहता है। दूसरी ओर शहर के प्रसिद्ध तपेश्वरी देवी मंदिर के बाहर गंदगी, बदहाल शौचालय, जर्जर सड़कें, बजबजाती नालियां और कूड़े के ढेर व्यवस्था की नाकामी की गवाही दे रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…
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