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    पूर्वांचल विवि में फर्जी दस्तावेजों की शिकायतों की जांच शुरू:संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षकों के प्रमाण पत्रों का होगा सत्यापन

    2 hours ago

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    वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय ने जौनपुर और गाजीपुर जिलों के संबद्ध महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के शैक्षणिक अभिलेखों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह जांच यूजी, पीजी, व्यावसायिक पाठ्यक्रम, बीएड, एमएड, बीबीए, बीसीए, एमसीए सहित सभी संकायों के शिक्षकों पर लागू होगी। विश्वविद्यालय को मिली शिकायतों के बाद यह निर्णय लिया गया है। इन शिकायतों में आरोप है कि कुछ शिक्षकों ने नियुक्ति के समय भ्रामक या अपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं। कुछ शिक्षकों पर एक साथ कई महाविद्यालयों में अनुमोदन कराने, संदिग्ध अनुभव प्रमाण पत्र देने और नेट व पीएचडी उपाधि के सत्यापन में अनियमितता के आरोप हैं। इन आरोपों के मद्देनजर, विश्वविद्यालय ने दस्तावेजों का डिजिटल और भौतिक दोनों स्तरों पर मिलान करने का फैसला किया है। सत्यापन प्रक्रिया में स्नातक और परास्नातक अंकपत्र, डिग्री प्रमाण पत्र, नेट/सेट योग्यता प्रमाण पत्र, पीएचडी उपाधि, शोध पंजीकरण अभिलेख, अनुभव प्रमाण पत्र और सेवा पुस्तिका की गहन जांच की जाएगी। इसके अतिरिक्त, अनुमोदन क्षेत्र और विषय विशेषज्ञता का भी सत्यापन होगा। जांच के दौरान, संबंधित विश्वविद्यालयों, आयोगों और डिजिटल डेटाबेस से भी क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जाएगा। यदि किसी शिक्षक द्वारा फर्जी या कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत करने की पुष्टि होती है, तो विश्वविद्यालय प्रशासन संबंधित शिक्षक के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराएगा। इसके साथ ही, महाविद्यालय प्रशासन की भूमिका की भी जांच की जाएगी ताकि यह पता चल सके कि नियुक्ति प्रक्रिया में किस स्तर पर चूक हुई। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि शिक्षकों की योग्यता सीधे छात्रों की शैक्षणिक गुणवत्ता से जुड़ी है। नियुक्ति में पारदर्शिता और मानकों का पालन न होने से शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि योग्य शिक्षक ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की नींव हैं। इस नींव को कमजोर करने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए विश्वविद्यालय में कोई स्थान नहीं होगा।
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