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    प्रयागराज में 'मैं आम हूं' का लोकार्पण:न्यायमूर्ति संजय कुमार पचौरी ने कहा- सच्चे साहित्यकार को सबका ज्ञान

    12 hours ago

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    औद्यानिक प्रयोग प्रशिक्षण केंद्र व लेटरेरी क्लब (इलाहाबादी साहित्यिक अड्डा) के संयुक्त तत्त्वावधान में डॉ. प्रदीप कुमार चित्रांशी की कृति ‘मैं आम हूं’ का लोकार्पण समारोह खुसरोबाग में हुआ। कार्यक्रम में साहित्य, प्रकृति, शिक्षा एवं समाज से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति संजय कुमार पचौरी ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए रचनाकार डॉ. प्रदीप कुमार चित्रांशी को प्रकृति प्रेमी साहित्यकार बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों में सहभागिता पूर्व नियोजित प्रारब्ध का परिणाम होती है। उन्होंने कहा कि एक सच्चे साहित्यकार के लिए ऐसा कोई विषय नहीं होता, जिसका उसे ज्ञान न हो। उन्होंने प्रकृति और मानव जीवन के गहरे संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य का शरीर और पेड़-पौधों का अस्तित्व समान रूप से पंचतत्वों से निर्मित है तथा इन सभी को धरती मां एक सूत्र में जोड़ती हैं। कार्यक्रम में प्रभारी उद्यान विजय किशोर सिंह ने कहा कि इस पुस्तक विमोचन समारोह में प्रकृति, तकनीक, साहित्य और समाज से जुड़े विविध क्षेत्रों के विद्वान एवं प्रकृति प्रेमी एक साथ उपस्थित हैं। आम की प्रजातियों, धार्मिक एवं प्राकृतिक महत्व बताया रचनाकार प्रदीप कुमार चित्रांशी ने कहा कि जिस प्रकार बसंत ऋतुओं का राजा है, उसी प्रकार आम फलों का राजा है और एक राजा ही दूसरे राजा का स्वागत कर सकता है। उन्होंने बताया कि पुस्तक में आम की विभिन्न प्रजातियों, उसके ऐतिहासिक, धार्मिक एवं प्राकृतिक महत्व को कुंडलिया छंद के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। साथ ही यह कृति प्रकृति प्रेम और पेड़-पौधों से आत्मीय संवाद की अनुभूतियों को भी अभिव्यक्त करती है। आम साहित्य का हिस्सा बना अनवार अब्बास नकवी ने कहा कि आम एक बार पुनः साहित्य का हिस्सा बन रहा है और यह ऐसे व्यक्तित्वों के साथ जुड़ रहा है जिन्होंने समाज एवं इतिहास को महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने डॉ० चित्रांशी को प्रकृति प्रेमी साहित्यकार बताते हुए कहा कि मनुष्य में मिठास तभी आती है जब वह दूसरों की भावनाओं के अनुरूप स्वयं को ढालता है। संतोष कुमार प्रीत ने कहा कि साहित्य केवल शब्दों का संकलन नहीं, बल्कि समाज के लिए मार्गदर्शक होता है। इस पुस्तक में साहित्य की सरसता, इतिहास की गहराई, संस्कृति की सुगंध और जीवन दर्शन की मधुरता का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। विशिष्ट अतिथि अरुण प्रकाश ने आम्रपाली आम की विशेष चर्चा करते हुए उसे सबसे उत्कृष्ट आम बताया तथा पुस्तक को प्रकृति और साहित्य का अनूठा संगम कहा। पुस्तक के प्रकाशक रंजन पाण्डेय ने कहा कि पुस्तक में आम की 50 से अधिक किस्मों का अनुभवात्मक एवं शोधपरक वर्णन इसे विशिष्ट बनाता है। प्रत्येक प्रजाति पर संक्षिप्त परिचय एवं दो-दो कुंडलिया छंद इस कृति को विशेष साहित्यिक पहचान प्रदान करते हैं। प्रो. अनिरुद्ध नारायण ने “मैं आम हूँ” को एक विशिष्ट प्राकृतिक एवं साहित्यिक कृति बताते हुए कहा कि यह पुस्तक पाठकों को प्रकृति और जीवन के गहरे अनुभवों से जोड़ती है। कार्यक्रम का संचालन प्रो. रवि मिश्रा ने किया। स्वागत साक़िब बादल ने तथा आभार संगीता श्रीवास्तव ने व्यक्त किया। संयोजक डॉ. राहुल शुक्ल रहे। इस अवसर पर शहर के अनेक साहित्यकार, शायर, रचनाधर्मी, प्रकृति एवं साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।
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