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    प्रयागराज में विरासत कला उत्सव की चौथी शाम:मोहन राठौर के भोजपुरी गीतों से गूंजा पूरा सभागार

    5 hours ago

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    उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज में आयोजित 'विरासत कला उत्सव' की चौथी संध्या भोजपुरी संगीत, लोकगीत और देशभक्ति के सुरों से सराबोर रही। भोजपुरी गायक मोहन राठौर की प्रस्तुति ने श्रोताओं को देर रात तक मंत्रमुग्ध रखा। उनके गीत "सजा है संगम का कुंभ मेला, प्रयाग तुमको बुला रहा है" से पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। सोमवार शाम को हुए इस कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि आचार्य (डॉ.) पंकज कुमार (पूर्व विभागाध्यक्ष, राजनीति विज्ञान, इलाहाबाद विश्वविद्यालय), केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा, उपनिदेशक डॉ. आदित्य कुमार श्रीवास्तव और डॉ. प्रदीप भटनागर ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत भोजपुरी गायिका भावना सिंह ने माता के भक्ति गीत से की। उन्होंने प्रसिद्ध लोकगायिका शारदा सिन्हा का लोकप्रिय गीत "मगन अपनी धुन में रहे मोरा सैंया, पग-पग लिए जाऊं तोहरे बलइयां" प्रस्तुत किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने "रेलिया बैरन पिया को लिए जाए रे", "कहे तोहसे सजना", "पनिया के जहाज से पलटनिहा", "अइहा हो पिया लेल्हे अइहा हो पिया" और "सेंदूर बंगाल से" जैसे लोकगीत भी गाए। इसके बाद भोजपुरी गायक मोहन राठौर के मंच पर आते ही पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उन्होंने श्रोताओं की फरमाइश पर कई लोकप्रिय भोजपुरी और फिल्मी गीत प्रस्तुत किए। इनमें "चनरिया में दाग लग गई", "जिया हो बिहार के लाला", "जो बीत गया वह दौर न आएगा", "इस दिल में सिवा तेरे कोई और न आएगा" और देशभक्ति गीत "दिल दिया है जान भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए" शामिल थे, जिन पर दर्शक देर तक झूमते रहे। मोहन राठौर ने अपने भोजपुरी गीतों जैसे "दिलवा बेचारा तू याद न कहेलू", "आटा साने गइलू तागिल", "लिखत तानी पाती दरत करे तारे छाती", "जैसन सोचले रहनी वैसन धनिया मोर बानी" और "सावन में गोर बानी हो" से भी खूब तालियां बटोरीं। कार्यक्रम के समापन पर केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा ने मोहन राठौर को पौधा और शाल भेंट कर सम्मानित किया।
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