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    Putin ने 30 साल बाद जगाया रूस का 'दैत्य', अमेरिका के 3 डिस्ट्रायर निगलने में सक्षम

    19 minutes from now

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    समंदर में रूस का वो सुपर पावर  जिसने यूरोप में नाटो से लेकर अमेरिका तक की सेनाओं की नींद उड़ा दी है। समंदर में इसका 30 साल बाद उतरना रूस के दुश्मनों के लिए किसी खौफनाक खबर से कम नहीं। यह ऐसा महादानव है जो अकेले ही किसी भी देश के पूरे नौसैनिक बेड़े को तबाह कर सकता है। समंदर का यह सुल्तान इतना खतरनाक है कि इसके सामने आने के बाद दुश्मन देश के जहाजों को संभलने या भागने के लिए सिर्फ एक सेकंड का वक्त मिलेगा और फिर सब कुछ खाक हो जाएगा। 30 साल बाद रूस का महादानव सी ट्रायल में उतरा। सोवियत संघ के जमाने का यह दैत्य पिछले 30 सालों से अपग्रेड होने के लिए रुका था। लेकिन अगस्त 2025 में इसने पहली बार अपनी खुद की ताकत से समंदर की लहरों को चीरना शुरू किया और अब 2026 में यह अपनी अंतिम परीक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। इसे भी पढ़ें: जिसका पाकिस्तान को डर था, रूस ने भारत के लिए वही कियाकिरो क्लास क्रूज़र कोई आम युद्धपोत नहीं बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा क्लियर पावर्ड कॉम्बैटशिप है। इसका वजन करीब 28,000 टन है। इसके आकार का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि अकेला जहाज अमेरिका के तीन सबसे मॉडर्न अर्ली बर्ग क्लास डिस्ट्रॉय जहाजों से भी बड़ा और भारी है। न्यूक्लियर प्लांट से चलने वाले युद्धपोत का वजन 28,000 टन है। अंदर हथियारों का ऐसा गोदाम है कि कोई दुश्मन इसके करीब आने की सोच भी नहीं सकता। इस जहाज में कुल 176 मिसाइल लॉन्च सेल्स लगाए गए हैं। इनमें से करीब 100 सेल्स में रूस के सबसे खतरनाक एयर डिफेंस सिस्टम S400 का नेवल वर्जन तैनात है। जो जमीन पर मौजूद S400 की तीन पूरी बटालियन के बराबर आसमान से आने वाली हर आफत को रोक सकता है। इसके अलावा बाकी सेल्स में रूस की सबसे घातक ज़रकॉन हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलें भरी गई हैं। यह मिसाइल साउंड की रफ्तार से नौ गुना तेजी से उड़ती हैं और 1000 किमी दूर बैठे दुश्मन को संभलने का 1 सेकंड का भी मौका नहीं देती। इसे भी पढ़ें: भारत के जिगरी दोस्त पर पहले किया हमला, फिर जारी किया वीडियो, यूक्रेन के एक्शन से हिली दुनियाजहाज को इस तरह अपग्रेड किया गया है कि आज की तारीख में दुनिया का सबसे ताकतवर कॉम्बैट शिप बन चुका है। हालांकि रूस के लिए इस दैत्य को जिंदा करना आसान नहीं था। यूक्रेन के साथ जारी भीषण युद्ध के कारण लगे प्रतिबंधों और भारी बजट संकट की वजह से रूस को इसके जुड़वा जहाज पियोत्र वेलिकी को समय से पहले रिटायर करना पड़ा। क्योंकि दोनों जहाजों को मेंटेन रखना रूस की इकॉनमी पर भारी पड़ रहा था। सोवियत संघ के टूटने के बाद से रूस से कोई नया बड़ा जहाज नहीं बनाया। इसलिए अपनी धाग जमाए रखने के लिए उसने अपनी पूरी ताकत एडमिरल नाखिमो को चमकाने में झोंक दी। दरअसल अमेरिका और नाटो देश लगातार आर्कटिक क्षेत्र में रूस के व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
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