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    मानसून से पहले बाढ़ से निपटने की तैयारी पर मंथन:लखनऊ में हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी, सेना और आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने साझा किए अनुभव

    1 hour ago

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    आगामी मानसून को देखते हुए उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (UPSDMA) और भारतीय सेना की मध्य कमान ने लखनऊ छावनी स्थित सूर्या ऑडिटोरियम में "बाढ़ एवं बाढ़ से जुड़ी आपदाएं" विषय पर राष्ट्रीय नागरिक-सैन्य संगोष्ठी का आयोजन किया। कार्यक्रम में कई राज्यों के आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों, सेना, राहत एजेंसियों और सरकारी अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं की चुनौतियों पर हुई चर्चा संगोष्ठी में उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। चर्चा के दौरान जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ रही चुनौतियों जैसे अत्यधिक बारिश, फ्लैश फ्लड, शहरी बाढ़, बादल फटना, भूस्खलन और आकाशीय बिजली जैसी घटनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि आपदा प्रबंधन में केवल सरकार ही नहीं, बल्कि समाज की भागीदारी भी जरूरी है। बेहतर तैयारी, जागरूकता और समय पर सूचना से जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकता है। नई तकनीकों और चेतावनी प्रणाली पर दिया गया जोर कार्यक्रम में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD), केंद्रीय जल आयोग (CWC), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) समेत कई संस्थानों के विशेषज्ञों ने बाढ़ पूर्वानुमान, मौसम निगरानी, उपग्रह आधारित निगरानी और आकाशीय बिजली की चेतावनी प्रणाली से जुड़ी नई तकनीकों की जानकारी दी। इसके अलावा कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (CAP) और 'सचेत' जैसी चेतावनी प्रणालियों के जरिए लोगों तक समय पर सूचना पहुंचाने के उपायों पर भी चर्चा हुई। राहत और बचाव एजेंसियों ने साझा किए अपने अनुभव भारतीय सेना, वायु सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, यूपी पुलिस, पीएसी, अग्निशमन विभाग और भारतीय रेल के अधिकारियों ने बाढ़ के दौरान किए गए राहत और बचाव कार्यों के अनुभव साझा किए। विभिन्न एजेंसियों ने बताया कि आपदा के समय आपसी समन्वय और त्वरित कार्रवाई सबसे महत्वपूर्ण होती है। राज्यों ने बताईं अपनी सफल रणनीतियां उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश के आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों ने बाढ़ प्रबंधन, पूर्व चेतावनी, सामुदायिक जागरूकता और आपातकालीन प्रतिक्रिया से जुड़े अपने सफल मॉडल और नवाचार प्रस्तुत किए। तकनीक के उपयोग और स्थानीय स्तर पर तैयारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने तैयारी और समन्वय को बताया अहम कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जल शक्ति एवं बाढ़ राहत मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि आपदा प्रबंधन में पहले से तैयारी, संस्थागत समन्वय, मजबूत नेतृत्व और समुदाय की भागीदारी बेहद जरूरी है। उन्होंने सभी एजेंसियों से मिलकर काम करने और मानसून के दौरान पूरी सतर्कता बरतने का आह्वान किया।
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