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    रक्तरंजित भारत पुस्तक पर परिचर्चा संपन्न:औरैया में विद्वानों ने भारत विभाजन के कारणों पर किया गहन विमर्श

    5 hours ago

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    औरैया के दिबियापुर कस्बे में प्रज्ञा प्रवाह की कानपुर प्रांत इकाई ब्रह्मावर्त परिषद के शोध/अध्ययन केंद्र ने एक पुस्तक एवं विषय परिचर्चा का आयोजन किया। इस दौरान चर्चित पुस्तक 'रक्तरंजित भारत' पर विस्तृत चर्चा की गई। जागरण इंस्टीट्यूट के असिस्टेंट प्रोफेसर रजत दुबे ने पुस्तक की समीक्षा प्रस्तुत करते हुए इसके अध्यायों और वर्तमान भारत में पीएफआई की कार्यप्रणाली तथा आतंकवाद के खतरों पर प्रकाश डाला। परिचर्चा में पुस्तक के लेखक और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन, नई दिल्ली के निदेशक विनय सिंह ऑनस्क्रीन जुड़े। उन्होंने पुस्तक लिखने की प्रेरणा साझा की और बताया कि प्रतिबंधित पीएफआई, सिमी का ही एक नया रूप था। विनय सिंह ने चेतावनी दी कि पीएफआई आज भी नए रूपों में सामने आने का प्रयास कर रहा है, जिसके लिए वह आधुनिक ज्ञान-विज्ञान और तकनीक का उपयोग कर रहा है। उन्होंने सरकार और समाज दोनों को इस खतरे के प्रति सजग रहने की आवश्यकता पर बल दिया। आतंकवाद सहित अन्य बड़ी समस्याओं के समाधान पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में विनय सिंह ने कहा कि सरकार और सजग समाज मिलकर इन चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की अपनी सीमाएं होती हैं, लेकिन एक जागरूक समाज सरकारों के साथ मिलकर स्थायी समाधान प्रदान कर सकता है। इस परिचर्चा में प्रज्ञा प्रवाह के क्षेत्रीय संयोजक भगवती प्रसाद राघव और अखिल भारतीय टोली के सदस्य भी आभासी माध्यम से शामिल हुए। नगर पंचायत सभागार में आयोजित इस परिचर्चा की शुरुआत प्रज्ञा प्रवाह के प्रांत संयोजक मुनीश त्रिपाठी ने अतिथियों का परिचय कराते हुए की। पुस्तक परिचर्चा के बाद दूसरे सत्र में 'भारत का विभाजन क्यों हुआ' विषय पर गहन विमर्श हुआ। इसमें डॉ. अनुरुद्ध प्रताप भंवर, प्रोफेसर कौशलेन्द्र तिवारी, सुबेन्द्र सिंह, कमलेश तिवारी, मनीष यादव, सत्या राजपूत, संदीप शर्मा, देवेंद्र राजपूत, सुधाकर भट्ट, विनीत त्रिपाठी, सुशांत नवीन तिवारी और चिंतन सहित कई गणमान्य विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किए। परिचर्चा का संचालन प्रांत सह संयोजक डॉ. भूपेंद्र सिंह ने किया। अंत में कवि अरुण दीक्षित ने काव्य पाठ प्रस्तुत किया। जिला संयोजक आशीष मिश्रा ने उपस्थित अतिथियों का आभार व्यक्त कर कार्यक्रम का समापन किया।
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