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    रिटायर्ड टीचर को डिजिटल अरेस्ट कर 25 लाख ठगे:आतंकी कनेक्शन होने की बात कहकर फंसाया, वर्दी पहनकर ऑनलाइन दर्ज किए बयान

    16 hours ago

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    दबौली में साइबर ठगों ने एक रिटायर टीचर को वीडियो कॉल पर 5 दिन डिजिटल अरेस्ट कर 25 लाख की ठगी की। ठगों ने पुलिस की वर्दी पहनकर खुद को एसपी बताया, फिर जम्मू के आतंकवादियों से कनेक्शन निकलने की बात कहकर जाल में फंसाया। इसके बाद गिरफ्तारी का वारंट जारी होने का भय दिखाकर उनसे ठगी कर ली। रकम ट्रांसफर करने के बाद 10 लाख की और डिमांड बढ़ने पर उन्हें ठगी का एहसास हुआ। पीड़ित ने गोविंद नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। 10 अप्रैल को अंजान नंबर से आई कॉल दबौली निवासी 76 वर्षीय राघव राम यादव गोविंद नगर स्थित खालसा इंटर कॉलेज में शिक्षक थे। राघव राम ने बताया कि वर्ष 2013 में वह रिटायर हुए थे। परिवार में पत्नी ऊषा है, जो कि मानसिक बीमार है। वहीं बड़ा बेटा अमित भोपाल में असिस्टेंट लाइब्रेरियन व छोटा बेटा रवि नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, जबकि बेटी अल्का की शादीशुदा है। 10 अप्रैल की शाम उनके पास एक अंजान नंबर से कॉल आई। कॉलर ने खुद को एसपी बताते हुए कहा कि, जम्मू-कश्मीर में पकड़े गए दो आतंकवादियों से जुड़े मामले में उनका आधार कार्ड मिला है। इस मामले में आपका नाम आया है, इसलिए आपके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। बातचीत के दौरान साइबर ठगों ने परिवार के किसी भी सदस्य को जानकारी न देने की धमकी देते हुआ कहा कि, ऐसा करने पर उनकी पत्नी व बच्चे भी केस में आरोपी बना दिया जाएगा। पांच दिनों तक वीडियो कॉल कर निगरानी में रखा यह सुन राघव राम डर गए, इसके बाद ठगों ने लगातार पांच दिनों तक अलग-अलग मोबाइल नंबरों से व्हाट्सएप वीडियो कॉल कर उन्हें अपनी पूरी तरह निगरानी में रखा। पूछताछ के बहाने बैंक खातों और परिवार से जुड़ी ज्यादातर जानकारियां हासिल कर ली, फिर बयान दर्ज कराने के लिए पुलिस मुख्यालय लखनऊ आने का निर्देश दिया। स्वास्थ्य कारणों से अकेले लखनऊ आने–जाने में असमर्थता जताने पर उन्होंने व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए ही ऑनलाइन बयान दर्ज करने की बात कही। इसके बाद वर्दी पहने एक वरिष्ठ अधिकारी से बात कराई गई, जिसने केस से नाम हटाने के लिए महाराष्ट्र पुलिस एटीएस के नाम पर सिक्योरिटी सर्टिफिकेट बनवाने के लिए सुरक्षा राशि जमा कराने की बात कही और जांच पूरी होने पर ब्याज सहित रकम लौटाने का झांसा दिया। 10 लाख और मांगने पर हुआ शक इस झांसे में आकर राघव राम ने पोस्ट ऑफिस की एफडी तुड़वाकर राशि अपने बैंक ऑफ बड़ौदा के खाते में जमा कराई और 15 अप्रैल को आरटीजीएस के जरिए से इंडसइंड बैंक के खाते में 25 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। रकम भेजने के बाद ठगों ने 10 लाख की दूसरी एफडी भी तुड़वाने का दबाव बनाया, तभी पीड़ित को अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ। पीड़ित ने मामले की शिकायत साइबर पोर्टल पर दर्ज कराने के साथ गोविंद नगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया।
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