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    रायबरेली में किसान सभा का 11 सूत्री मांगों पर प्रदर्शन:राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर सरकार की नीतियों का विरोध किया

    3 hours ago

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    रायबरेली में अखिल भारतीय किसान सभा और संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रव्यापी 'जेल भरो आंदोलन' के आह्वान पर उत्तर प्रदेश किसान सभा ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। जिले भर से आए किसानों और कार्यकर्ताओं ने सरकार की नीतियों, बढ़ती महंगाई, खाद-पानी की किल्लत और स्मार्ट मीटर जैसी समस्याओं के खिलाफ आवाज उठाई। प्रदर्शन के उपरांत, किसान नेताओं ने जिलाध्यक्ष राधेश्याम तिवारी और महामंत्री गणेशी प्रसाद के नेतृत्व में जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को 11 सूत्रीय मांग पत्र (ज्ञापन) सौंपा। कार्यक्रम के दौरान, किसान सभा के नेताओं ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की जनविरोधी, किसान-विरोधी और कॉर्पोरेट-परस्त नीतियों के कारण किसान और मजदूर बेहाल हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में किसानों को समय पर खाद-उर्वरक नहीं मिल पा रहा है और नहरों के टेल तक पानी नहीं पहुँच रहा है, जिससे फसलें प्रभावित हो रही हैं। 'जेल भरो आंदोलन' के तहत अपनी गिरफ्तारियां दीं बिजली बिलों में मनमानी वृद्धि और जबरन लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों के खिलाफ किसानों में भारी आक्रोश है। इन्हीं समस्याओं और केंद्र-राज्य सरकार के भ्रष्टाचार के विरोध में पूरे देश और प्रदेश में किसानों ने 'जेल भरो आंदोलन' के तहत अपनी गिरफ्तारियां दीं और ज्ञापन सौंपे। ज्ञापन में शामिल प्रमुख 11 सूत्रीय मांगों में सभी फसलों की लागत का डेढ़ गुना (C2+50%) एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी और किसानों को कर्जमुक्त करने की मांग शामिल है। इसके अतिरिक्त, चारों श्रम संहिताओं (लेबर कोड) को वापस लेने और न्यूनतम वेतन ₹26,000 प्रति माह करने की भी मांग की गई। आशा, रसोईया, आंगनबाड़ी और आउटसोर्सिंग कर्मियों को नियमित कर्मचारी का दर्जा देने, बिजली का निजीकरण और स्मार्ट मीटर योजना तुरंत रद्द करने तथा 300 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा पूरा करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। कथित घोटालों की निष्पक्ष जांच कराई जाए अमेरिका के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते को भारत की कृषि के लिए घातक बताते हुए लागू न करने की मांग की गई। मनरेगा में वर्ष में कम से कम 200 दिन रोजगार और ₹700 प्रतिदिन मजदूरी देने की भी मांग रखी गई। बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और कमजोर वर्गों/दलितों पर हो रहे अत्याचारों पर तुरंत रोक लगाने तथा लंबे समय से रह रहे भूमिहीन गरीबों को रहने और खेती के लिए भूमि का पट्टा देने की मांग भी ज्ञापन में शामिल थी। राम मंदिर में चढ़ावा, चंदा और भूमि खरीद से जुड़े कथित घोटालों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। विरोध की आवाज दबाने, धरना प्रदर्शन पर रोक और अलोकतांत्रिक कदमों (जैसे हाउस अरेस्ट) पर रोक लगाई जाए।आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के मानदेय में ठेकेदारों द्वारा की जा रही अनुचित कटौतियों को बंद कर ठेकेदारी प्रथा समाप्त की जाए।
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