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    संभल के आठ गंगा घाटों पर लाखों श्रद्धालुओं ने स्नान:होली पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण से पहले तड़के तीन बजे से शुरू हुआ

    2 hours ago

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    संभल में होली की फाल्गुन पूर्णिमा के अवसर पर लाखों श्रद्धालुओं ने मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। चंद्र ग्रहण के सूतक काल से पहले मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना के साथ श्रद्धालुओं ने गंगा तट और मंदिरों में पूजा-अर्चना की। मध्यरात्रि से ही चंद्र ग्रहण के समय को देखते हुए श्रद्धालुओं ने गंगा घाटों पर पहुंचना शुरू कर दिया था, और तड़के तीन बजे से ही स्नान का सिलसिला शुरू हो गया था। जनपद संभल की तहसील गुन्नौर के राजघाट गंगा, सिसौना डांडा, श्रीविष्णु देव, हरिबाबा बांध के अलावा अस्थाई असदपुर और सांकराघाट सहित आठ अलग-अलग गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। संभल के अलावा बुलंदशहर, बदायूं, अलीगढ़, बरेली और रामपुर जैसे पड़ोसी जनपदों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे थे। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस-प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद रहा। जुनावई थाना प्रभारी अखिलेश प्रधान, गुन्नौर थाना प्रभारी राजीव मलिक, बबराला थाना प्रभारी सौरभ त्यागी और रजपुरा थाना प्रभारी संदीप चौधरी अपनी पुलिस फोर्स के साथ गंगा घाटों पर अलर्ट दिखाई दिए। संभल-अनूपशहर रोड पर वाहनों के कारण लंबा जाम लगने की आशंका को देखते हुए यातायात प्रबंधन भी सुनिश्चित किया गया। गंगा घाट पर जलस्तर अधिक होने के कारण कई श्रद्धालुओं ने बाल्टी से स्नान किया। राजघाट और सिसौना डांडा गंगा घाट पर मेले का भी आयोजन किया गया। गांव लहरारतु के जितेंद्र कुमार ने बताया कि चंद्र ग्रहण के चलते वे तड़के 04 बजे ही घर से निकल गए थे और 03 बजे से लगातार स्नान चल रहा है। उन्होंने होली पूर्णिमा के स्नान को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। संभल के शुभम् कुमार ने कहा कि चंद्र ग्रहण के कारण श्रद्धालु आज जल्दी गंगा घाट पर आए हैं, और इस स्नान से सुख, समृद्धि तथा मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। श्रीविष्णुदेव घाट के महंत महेश आनंद गिरि ने जानकारी दी कि तड़के से ही गंगा घाटों पर स्नान जारी है। उन्होंने बताया कि चंद्र ग्रहण के कारण दोपहर 03 बजे से सूतक लग जाएंगे, जिसके बाद मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। महंत गिरि ने आज की होली पूर्णिमा को सबसे बड़ी पूर्णिमा में से एक बताया। बता दें कि हिंदू धर्म में किसी भी पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व है और पूरे साल में 12 पूर्णिमा तिथियां मनाई जाती हैं। इनमें से फाल्गुन पूर्णिमा का विशेष महत्व इसलिए है कि इस दिन माता लक्ष्मी का पूजन करने के साथ चंद्रमा की पूजा भी की जाती है। इस दिन फाल्गुन पूर्णिमा की पूजा करने के साथ व्रत कथा का पाठ भी करते हैं तो आपके जीवन में आने वाली बाधाएं दूर हो सकती हैं। फाल्गुन पूर्णिमा के दिन ही होलिका दहन भी किया जाता है, इसलिए इस पूर्णिमा का महत्व और ज्यादा बढ़ जाता है।
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