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    सफर के बाद घर लौटना था, लौटे 12 शव:बदायूं में एक साथ जलीं छह चिताएं, जितेंद्र, दीक्षा और गौरव के मां-बाप बच्चों का चेहरा भी नहीं देख पाए

    9 hours ago

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    बागपत के भीषण सड़क हादसे में जान गंवाने वाले बदायूं के 13 लोगों में से 12 का मंगलवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया। अल्लापुर चमारी के छह लोगों की एक साथ चिताएं जलीं। चेतूनगला के सुगड़पाल का भी गंगा किनारे अंतिम संस्कार हुआ। मुजरिया के दो मासूम बच्चों को गांव के तालाब किनारे दफनाया गया। बिनावर और जरीफनगर क्षेत्र के मृतकों को भी अंतिम विदाई दी गई। बता दें कि सभी राजस्थान के बागड़ धाम (गोगामेड़ी) से बदायूं लौट रहे थे। इसी बीच बागपत के खेकड़ा कोतवाली में बसी और बड़ा गांव के बीच रविवार देर रात करीब 1 बजे पिकअप को तेज रफ्तार कैंटर ने टक्कर मार दी थी। टक्कर के बाद पिकअप बेकाबू होकर डिवाइडर से टकरा गई थी। फिर घिसटते हुए सड़क के बीचों-बीच पलट गई। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे पर हुआ हादसा इतना भयावह था कि लाशें 30 मीटर दूर तक बिखर गईं थी। हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में 7 पुरुष, 3 महिलाएं, 3 बच्चे हैं। 19 से ज्यादा श्रद्धालु घायल हो गए थे। पिकअप में 32 श्रद्धालु सवार थे। रात साढ़े 12 बजे घर लौटे... लेकिन जिंदा नहीं अल्लापुर चमारी में सोमवार रात करीब 12:30 बजे एक के बाद एक शव पहुंचे। साधू यादव, उनकी पत्नी मुन्नी देवी, भाई प्रेम सिंह, भगवती, रामेश्वर और मूर्ति। रात के सन्नाटे में शवों के गांव पहुंचते ही चीख-पुकार शुरू हो गई। घरों के बाहर ग्रामीण जमा हो गए। जिन दरवाजों से कुछ घंटे पहले तक अपनों के लौटने की उम्मीद थी, वहीं अब शव रखे थे। रातभर किसी घर में चूल्हा नहीं जला। महिलाएं रोती रहीं। रिश्तेदार समझाने की कोशिश करते रहे, लेकिन किसी के आंसू नहीं रुक रहे थे। सुबह गांव की गलियों में भीड़ बढ़ने लगी। रिश्तेदार आए, आसपास के गांवों के लोग पहुंचे। फिर एक के बाद एक छह अर्थियां उठीं। गांव से घाट की ओर एक साथ छह अर्थियां जाते देखकर पूरा गांव सन्न रह गया। ‘सब अपने घर जाओ... कुछ नहीं हुआ’ इसी भीड़ में बेगा भी थी। हादसे में उसने अपनी मां मुन्नी देवी और पिता साधु सिंह दोनों को खो दिया। शवों के साथ वह गांव की महिलाओं के बीच रोते-बिलखते बाहर तक आई। अंतिम यात्रा लौटने लगी तो अचानक उसने ऐसी बातें करनी शुरू कर दीं, जैसे कुछ हुआ ही न हो। वह कहती रही- ‘सब अपने घर जाओ, कुछ नहीं हुआ है।’ महिलाओं ने उसे घेर लिया। किसी तरह संभालकर घर ले गईं। घर पहुंचते ही वह अचेत हो गई। आसपास खड़ी महिलाएं भी यह दृश्य देखकर रो पड़ीं। मां-बाप अस्पताल में जिंदगी के लिए लड़ रहे, बच्चे दफन मुजरिया क्षेत्र में हादसे के शिकार हुए गौरव और दीक्षा के घर का दर्द कुछ अलग है। दोनों बच्चों के पिता विकास और मां सोनी गंभीर हालत में मेरठ के अस्पताल में भर्ती हैं। एक तरफ माता-पिता की जिंदगी बचाने की कोशिश चल रही है, दूसरी तरफ उनके दोनों बच्चों को गांव के ही एक तालाब के किनारे अंतिम संस्कार के बाद दफना दिया गया। ताऊ मुलायम सिंह और दादा भारत सिंह ने बच्चों के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी संभाली। बेटे की मौत... लेकिन आखिरी चेहरा भी नहीं देख सके मां-बाप जरीफनगर के 11 साल जितेंद्र की अंतिम विदाई में भी उसके मां-बाप नहीं थे। नेनपाल और सुल्तान खुद बागपत के अस्पताल में भर्ती हैं। हादसे में बेटे की मौत हो गई, लेकिन वे उसका अंतिम चेहरा तक नहीं देख सके। मंगलवार सुबह जितेंद्र का शव गांव पहुंचा। बड़े भाई दुर्वेश और शिशुपाल ने ग्रामीणों की मदद से गांव से सटकर बह रही महावा नदी के किनारे उसे दफनाया। छह चिताओं के सामने खड़ा था पूरा गांव अल्लापुर चमारी में कछला घाट पर जब छह चिताओं को एक साथ मुखाग्नि दी गई तो कुछ देर के लिए वहां सन्नाटा छा गया। गंगा बह रही थी। किनारे छह चिताएं जल रही थीं। परिवार के लोग दूर खड़े होकर रो रहे थे। आंखें अपनों को आखिरी बार देख रही थीं। जिला प्रशासन की ओर से डीएम अवनीश राय और एसएसपी अंकिता शर्मा समेत भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव गुप्ता भी गांव पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर सांत्वना दी और हरसंभव मदद का भरोसा दिया। यात्रा की खुशी से शुरू हुआ सफर ये लोग राजस्थान में बागड़ यात्रा के लिए गए थे। सफर में साथ परिवार थे, अपने लोग थे और लौटकर घर आने की उम्मीद थी। मंगलवार को बदायूं के गांवों में 11 लोगों की अंतिम विदाई हुई। छह चिताएं एक साथ जलीं। दो मासूम मिट्टी में दफन हुए। एक बेटे को मां-बाप आखिरी बार नहीं देख सके। एक बेटी सदमे में यह मानने को तैयार नहीं थी कि उसके मां-बाप अब कभी वापस नहीं आएंगे। --------------------------------------- ये खबर भी पढ़ेंः- दिल्ली हादसे में यूपी के दो छात्रों की मौत:परिवार ने बेटे अभिषेक की आंखें दान कीं; पवन की मां बोली- अफसर बनने भेजा था, लाश वापस मिली दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए बिल्डिंग हादसे में यूपी के दो छात्रों की मौत हो गई। चंदौली के अभिषेक खरवार (21) और औरैया के पवन सिंह (20) दिल्ली में रहकर पढ़ाई कर रहे थे। 10 दिन पहले दोनों रक्षाबंधन के लिए घर आए थे। बहनों से राखी बंधवाई थी दशहरे पर फिर घर आने का वादा कर लौट गए थे। लेकिन, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। घर ताबूत में बंद उनका शव आया। पूरी खबर पढ़ें…
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