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    सोनभद्र में बलवंत यादव और चार साथियों को उम्रकैद:यूपी-बिहार सीमा पर अपहरण गिरोह चलाने के मामले में अदालत का फैसला

    8 hours ago

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    सोनभद्र यूपी-बिहार सीमा क्षेत्र में लगभग साढ़े 16 वर्ष पूर्व अपहरण गिरोह चलाने वाले बलवंत यादव और उसके चार साथियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। एडीजे प्रथम जीतेंद्र कुमार द्विवेदी की अदालत ने यह फैसला सुनाया। सभी दोषियों पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड अदा न करने पर उन्हें छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। यह मामला 28 जनवरी 2009 को पन्नूगंज थाना क्षेत्र के नरोत्तमपुर निवासी रमाकांत देव पांडेय द्वारा मांची थाने में दर्ज कराई गई तहरीर से संबंधित है। रमाकांत ने बताया था कि उनकी बस रॉबर्ट्सगंज से खलियारी तक चलती थी और कभी-कभी चरगड़ा तक भी जाती थी। 19 जनवरी 2009 को बस चरगड़ा गई थी, जिसमें उनका भतीजा रिंकू पांडेय भी मौजूद था। बस पीरू मियां के दरवाजे पर खड़ी थी। रात करीब 12:30 बजे 12 हथियारबंद बदमाश आए और चालक सहित सभी को जगाकर रिंकू के बारे में पूछने लगे। गांव वालों के इकट्ठा होने पर रिंकू ने अपनी पहचान बताई, जिसके बाद बदमाश उसे अपने साथ ले गए। अपहरणकर्ताओं ने रिंकू को सात दिनों तक जंगल और आसपास के गांवों में रखा। उन्होंने फोन कर पहले 25 लाख रुपये की फिरौती मांगी। लगातार बातचीत के बाद वे ढाई लाख रुपये में रिंकू को छोड़ने को तैयार हो गए। बदमाशों ने रुपये न देने या पुलिस को सूचना देने पर रिंकू को जान से मारने की धमकी दी थी। 25 जनवरी को बदमाशों ने 2.50 लाख रुपये की बात कहकर मोबाइल काट दिया और धमकी दी कि यदि पैसा उनके बताए स्थान पर नहीं लाया गया तो रिंकू को मार दिया जाएगा। 26 जनवरी को बलवंत के बताए स्थान पर रमाकांत पहुंचे, जहां बलवंत (निवासी चौधरना, थाना अधौरा, भभुआ) के साथ सुरेंद्र यादव भी मौजूद था। वहां से उन्हें कंदरा ले जाया गया, जहां रिंकू को रखा गया था। वहां छोटू (निवासी रायपुर), नंदू यादव (निवासी मइया, थाना अधौरा), बलवंत का भाई नमस्कार यादव और बहादुर उर्फ लाल बहादुर (निवासी कैशरोड़ा, थाना अधौरा) भी मौजूद थे। ढाई लाख रुपये देने के बाद दोपहर तीन बजे रिंकू को छोड़ा गया। इस मामले में पुलिस ने सात नामजद और पांच अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। जांच के बाद पुलिस ने न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की थी, जिसके आधार पर अब यह फैसला आया है।
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