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    सिद्धार्थनगर में 17 साल की किशोरी को नौकरी-इलाज का झांसा:जयपुर में बेहोश करने का दावा, पिता ने थाने में की शिकायत

    3 hours ago

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    सिद्धार्थनगर के चिल्हिया थाना क्षेत्र की एक 17 साल की किशोरी ने आंखों के ऑपरेशन और नौकरी दिलाने का झांसा देकर उसे सिद्धार्थनगर से दिल्ली और फिर जयपुर ले जाने का आरोप लगाया है। किशोरी का दावा है कि जयपुर में उसे पानी पिलाकर बेहोश किया गया। होश आने पर उसने खुद को बचाया और वहां से भाग निकली। किशोरी ने बताया कि उसकी आंखों से करीब 70 प्रतिशत दिखाई नहीं देता है। वह लगभग एक महीने से सिद्धार्थनगर मुख्यालय के सनई चौराहे पर कंप्यूटर क्लास करने जा रही थी। इसी दौरान फिरंगी रेस्टोरेंट के पास दो युवक उसके पास आए। युवकों ने किशोरी का नाम बताते हुए कहा कि उसे आंखों से ठीक से दिखाई नहीं देता। जब किशोरी ने अपनी समस्या बताई, तो युवकों ने उसे दिल्ली चलने को कहा। उन्होंने वादा किया कि वे उसकी आंखों का ऑपरेशन करवाएंगे, दिव्यांग बच्चियों की मदद करते हैं और इलाज के साथ नौकरी भी दिलाएंगे। किशोरी ने यह बात अपने परिवार को बताई। उसके पिता पहले से ही बेटी की आंखों की समस्या को लेकर परेशान थे। जयपुर में इंजेक्शन लगाते देखा उन्हें लगा कि कोई संस्था या लोग बेटी के इलाज में मदद करना चाहते हैं। किशोरी के अनुसार, 17 सितंबर को दोनों युवकों ने उसे 5 हजार रुपए, कपड़े, सैंडल और एक मोबाइल भी दिया। इससे परिवार को उन पर भरोसा हो गया। किशोरी का यह भी दावा है कि उसके साथ बांसी से बैठी चार अन्य लड़कियों को उसने जयपुर में इंजेक्शन लगाते देखा था। अब पुलिस इन दावों की जांच कर रही है। किशोरी के पिता ने मामले की शिकायत सिद्धार्थनगर थाने में दर्ज कराई है। पिता सनई चौराहे पर छोड़कर गए, दिल्ली की बस में बैठाया 18 सितंबर को किशोरी के पिता उसे सनई चौराहे पर दिल्ली जाने वाली बस के पास छोड़ने पहुंचे। किशोरी का कहना है कि किशोरी के मुताबिक, उस समय दोनों युवक वहां मौजूद नहीं थे। उसने पिता से कहा कि आप चले जाएं, अंकल आने वाले हैं और उनके साथ वह दिल्ली चली जाएगी। मोबाइल होने के कारण पिता उसे वहां छोड़कर चले गए। किशोरी का कहना है कि पिता के जाने के बाद दोनों युवक वहां पहुंचे। उन्होंने बस के कंडक्टर से बात की, उसका दिल्ली का टिकट कराया और किराए के पैसे दिए। इसके बाद दोनों वहां से चले गए किशोरी के मुताबिक, बस जब बांसी पहुंची तो चार और लड़कियां उसमें सवार हुईं। वह उन्हें पहले से नहीं जानती थी। सभी अलग-अलग सीटों पर बैठी थीं। किशोरी ने बताया कि इनमें दो लड़कियां दिव्यांग थीं। उस समय उसे अंदाजा नहीं था कि आगे चलकर वे सभी एक ही जगह पहुंचेंगी। 18 सितंबर को सिद्धार्थनगर से निकलने के बाद 19 सितंबर की सुबह करीब 4 बजे किशोरी दिल्ली पहुंची। उसके मुताबिक, दिल्ली पहुंचने के बाद पांचों लड़कियों को जयपुर जाने वाली बस में बैठाया गया। नौकरी का भरोसा दिया था किशोरी का दावा है कि वहां भी वही दोनों युवक मौजूद थे, जिन्होंने सिद्धार्थनगर में आंखों के ऑपरेशन और नौकरी का भरोसा दिया था। उन्हीं लोगों ने पांचों को जयपुर जाने वाली बस में बैठाया। जयपुर पहुंचने के बाद किशोरी के मुताबिक, कुछ समय तक उन्हें घुमाया गया। इसके बाद एक व्यक्ति ने कहा कि इंटरव्यू देने चलना है। किशोरी को यह बात अजीब लगी। उसने सवाल किया कि रविवार को कौन सा इंटरव्यू होगा, क्योंकि रविवार को तो ऑफिस बंद रहता है। किशोरी के मुताबिक, उसे बताया गया कि जिन लोगों ने यहां लाया है, उन्होंने रेस्टोरेंट में चलने को कहा है और वहीं इंटरव्यू होगा। इसके बाद पांचों लड़कियों को एक जगह ले जाया गया। कंप्यूटर की बेसिक जानकारी होने की बात वहां उनसे पूछा गया कि वे क्या-क्या काम कर सकती हैं। किशोरी ने बताया कि उसने सामान्य टाइपिंग और कंप्यूटर की बेसिक जानकारी होने की बात कही। इसके बाद उसे पानी पीने के लिए दिया गया। किशोरी का दावा है कि पानी पीने के कुछ देर बाद वह बेहोश हो गई। किशोरी ने दैनिक भास्कर को बताया कि बेहोशी के दौरान उसके साथ गलत काम किया गया। उसके मुताबिक, बाद में उसके ऊपर पानी डाला गया, जिसके बाद उसे होश आया। आंख खुलने पर उसने खुद को एक ऐसी जगह पाया, जो उसे रेस्टोरेंट नहीं लगी। किशोरी के मुताबिक, वहां मौजूद एक युवक उसे गलत तरीके से देखने लगा और उसे छूने की कोशिश की। उसने खुद को छुड़ाया और वहां से भागने लगी। बाहर निकलते समय किशोरी ने दावा किया कि उसने अपने साथ आई चार लड़कियों को इंजेक्शन लगाए जाते देखा। इसके बाद वह तेजी से वहां से बाहर भागी। किशोरी के मुताबिक, कुछ दूर भागने के बाद वह एक व्यक्ति के पास पहुंची और उसे पूरी बात बताई। उस व्यक्ति ने उससे कहा कि यह गलत इलाका है और वह वहां कैसे पहुंच गई। महिला को भी पूरी घटना बताई इसके बाद किशोरी बस के जरिए दिल्ली वापस आई। दिल्ली में उसे एक महिला मिली। किशोरी ने महिला को भी पूरी घटना बताई। उसके मुताबिक, महिला ने उसे थाना दिखाया और अपनी बात पुलिस को बताने के लिए कहा। किशोरी थाने पहुंची और उसने वहां पूरी घटना बताई। बाद में परिवार से संपर्क हुआ और परिजन दिल्ली पहुंचकर उसे वापस सिद्धार्थनगर ले आए। किशोरी के बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल उन चार लड़कियों को लेकर है, जो उसके मुताबिक 18 सितंबर को बांसी में बस में सवार हुई थीं और उसके साथ जयपुर गई थीं। उनकी पहचान क्या है, वे कहां की रहने वाली हैं और वर्तमान में कहां हैं, यह पुलिस जांच का अहम हिस्सा है। किशोरी ने चारों लड़कियों को इंजेक्शन लगाए जाने की बात कही है। इस दावे की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों से ही हो सकेगी। पुलिस के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि ये चारों लड़कियां कौन थीं और जयपुर पहुंचने के बाद उनके साथ क्या हुआ। किशोरी के मुताबिक, दोनों युवकों को उसकी आंखों की समस्या के बारे में पहले से जानकारी थी। पूरी कड़ी की जांच जरूरी ऐसे में पुलिस के सामने यह भी सवाल है कि उन्हें किशोरी की परेशानी के बारे में कैसे पता चला और वे सनई चौराहे तक कैसे पहुंचे। आंखों के ऑपरेशन और नौकरी दिलाने का भरोसा, 5 हजार रुपए, कपड़े, सैंडल और मोबाइल देने से लेकर उसे दिल्ली और फिर जयपुर ले जाने तक की पूरी कड़ी की जांच जरूरी है। किशोरी के आरोपों की पुष्टि के लिए बस यात्रा, रास्ते में मौजूद कैमरों और अन्य संभावित साक्ष्यों को खंगाला जा सकता है। सिद्धार्थनगर थाना प्रभारी निरीक्षक नवीन कुमार सिंह ने बताया कि किशोरी के पिता की ओर से शिकायत मिली है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। 18 सितंबर को जहां से किशोरी बस में बैठी थी और बांसी में उसके मुताबिक चार लड़कियां बस में सवार हुई थीं, उन स्थानों के सीसीटीवी फुटेज चेक किए जाएंगे। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल किशोरी की आपबीती के आधार पर सामने आए आरोपों की जांच जारी है। पुलिस के लिए सनई चौराहे से लेकर बांसी, दिल्ली और जयपुर तक की पूरी कड़ी जोड़ना महत्वपूर्ण होगा। किशोरी को इलाज और नौकरी का भरोसा साथ ही किशोरी के साथ गई चार लड़कियों की पहचान और उनका पता लगाना भी जांच का अहम हिस्सा रहेगा। इस पूरे मामले में यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि किशोरी को इलाज और नौकरी का भरोसा देने वाले दोनों युवक कौन थे, उन्होंने उससे संपर्क कैसे किया और पांचों लड़कियों को एक साथ जयपुर ले जाने के पीछे क्या वजह थी। किशोरी के आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
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