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    सिद्धार्थनगर में फिर मेहरबान हुआ मानसून:नौगढ़ में सबसे ज्यादा 45 मिमी बारिश; खेतों में लौटी नमी, अगले 3-4 दिन और बारिश संकेत

    4 hours ago

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    सिद्धार्थनगर जिले में लंबे इंतजार के बाद शनिवार रात से मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली। पूरी रात और रविवार सुबह तक हुई बारिश ने धान की फसल को बड़ी राहत दी है। कई दिनों से बारिश नहीं होने के कारण सूख रहे खेतों में फिर पानी भर गया है। वहीं ड्रेनेज खंड की ताजा रिपोर्ट के अनुसार जिले की सभी प्रमुख नदियां अभी खतरे के निशान से काफी नीचे बह रही हैं और फिलहाल बाढ़ जैसी कोई स्थिति नहीं है। पिछले कई दिनों से बारिश नहीं होने के कारण धान के खेतों में दरारें पड़ने लगी थीं। सिंचाई की चिंता से परेशान किसानों को अब राहत मिली है। अच्छी बारिश के बाद खेतों में पर्याप्त पानी भर गया है, जिससे रोपाई के बाद धान की फसल की बढ़वार के लिए अनुकूल माहौल बन गया है। कृषि विशेषज्ञों का भी कहना है कि यह बारिश फसल के लिए बेहद लाभकारी साबित होगी। नौगढ़ में सबसे ज्यादा 45 मिमी बारिश दर्ज स्थानीय वर्षा आंकड़ों के अनुसार नौगढ़ गेज स्टेशन पर सबसे अधिक 45 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। बानगंगा बैराज क्षेत्र में 10 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई, जबकि बांसी क्षेत्र में हल्की बारिश हुई। बारिश के बाद ग्रामीण इलाकों के खेतों में पानी भरने से किसानों के चेहरों पर खुशी लौट आई। सभी प्रमुख नदियां अभी खतरे के निशान से नीचे ड्रेनेज खंड की रविवार की गेज रिपोर्ट के अनुसार बानगंगा, राप्ती, बूढ़ी राप्ती, कूड़ा समेत जिले की सभी प्रमुख नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से 3 से 6 मीटर नीचे बना हुआ है। अधिकांश गेज स्टेशनों पर जलस्तर स्थिर है, जबकि बांसी पुल और रेलवे पुल के पास हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन लगातार जलस्तर की निगरानी कर रहे हैं। अगले तीन-चार दिन और बारिश के आसार मौसम विभाग ने अगले तीन से चार दिनों तक जिले में रुक-रुक कर मध्यम से तेज बारिश का पूर्वानुमान जताया है। इस दौरान बादलों की आवाजाही बनी रहेगी और कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ वर्षा हो सकती है। लगातार बारिश होने पर नदियों के जलस्तर में धीरे-धीरे वृद्धि की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने निचले इलाकों के लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। अब तक सामान्य से कम बारिश, अगस्त में पूरी हो सकती है कमी इस मानसून सीजन में अब तक जिले में करीब 280 से 290 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में कम है। पिछले साल अगस्त की शुरुआत तक जिले में लगभग 330 से 350 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई थी। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगस्त के पहले और दूसरे सप्ताह में अच्छी बारिश होने पर वर्षा की यह कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है। कृषि विभाग बोला- धान के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं बारिश कृषि विभाग का कहना है कि समय पर हुई यह बारिश धान की फसल के लिए संजीवनी साबित हुई है। जिन खेतों में नमी की कमी के कारण दरारें पड़ने लगी थीं, वहां अब पर्याप्त पानी पहुंच गया है। विभाग के अनुसार यदि अगले कुछ दिनों तक बीच-बीच में इसी तरह बारिश होती रही तो जिले में धान की फसल की स्थिति और बेहतर होने की उम्मीद है।
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