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    स्वामी आनंद स्वरूप बोले- सुप्रीम कोर्ट से बड़ी जनता है:यूजीसी कानून के विरोध में शांभवी पीठ के पीठाधीश्वर का बयान

    6 hours ago

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    शांभवी पीठ बेंगलुरु के पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप ने यूजीसी कानून 2026 का कड़ा विरोध किया है। अयोध्या में नगर पंचायत कुमारगंज निवासी शैलेंद्र पाण्डेय के आवास पर दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने कहा कि देश की जनता सुप्रीम कोर्ट से भी बड़ी है। स्वामी आनंद स्वरूप ने यूजीसी कानून को एक सोची-समझी राजनीतिक चाल बताया। उन्होंने इसे वोट लेने का तरीका और हिंदू धर्म को बांटने की साजिश करार दिया। उन्होंने चिंता जताई कि आजादी के 75 वर्ष बाद भी यूजीसी एक्ट और आरक्षण जैसे मुद्दे समाज को पीछे धकेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह कानून समाज में वैमनस्य पैदा करेगा और इसे तोड़ने का काम करेगा। स्वामी आनंद स्वरूप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवर्ण समाज को समाप्त करने और एक ऐसी व्यवस्था लागू करने का आरोप लगाया, जिससे स्वाभाविक रूप से पराक्रमी और बुद्धिमान सवर्ण समाज कमजोर होगा। स्वामी आनंद स्वरूप ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध यूजीसी कानून की वापसी और हिंदू धर्म को विभाजित न करने को लेकर है। उन्होंने चतुर्वर्णीय व्यवस्था (ब्राह्मण,क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र) को चार भाइयों के समान बताया। उनका उद्देश्य इन चारों को एकजुट करना है, जबकि राजनीति हमेशा तोड़ने का काम करती है। उन्होंने संत और नेता के बीच अंतर भी स्पष्ट किया। उनके अनुसार, नेता राजनीतिक लाभ के लिए लोगों को पिछड़ा या दलित बनाते हैं, जबकि संत सभी को आगे बढ़ाने और ऊंचा उठाने की बात करते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक संत होने के नाते वह चारों वर्णों को जोड़ने की बात करते हैं, क्योंकि वर्णीय व्यवस्था प्रगति के लिए है, लेकिन नेता समाज को तोड़ने का काम कर रहे हैं। स्वामी आनंद स्वरूप ने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट भी जनता से बड़ी नहीं है, बल्कि इस देश की जनता सुप्रीम कोर्ट से बड़ी है। उन्होंने तर्क दिया कि गणराज्य में हमेशा 'गण'(जनता) बड़ा होता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि न्यायपालिका भी जनता के खिलाफ आती है, तो वे न्यायपालिका के खिलाफ भी विद्रोह करने को तैयार रहेंगे। इस मौके पर इस मौके पर संजय तिवारी, राघवेंद्र सिंह, तेजबली पाण्डेय राहुल तिवारी पंकज पाण्डेय सहित अन्य संभ्रांत लोग मौजूद रहे।
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