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    शंकराचार्य का नार्को टेस्ट हो...जांच के लिए मैं भी तैयार:आशुतोष महाराज ने कहा- गोपनीय पत्नी को सामने लाया जाए, संपत्ति की जांच हो

    4 hours ago

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    शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ यौन उत्पीड़न का केस दर्ज कराने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज अब नए आरोपों के साथ सामने आए हैं। इस बार आशुतोष महाराज ने अवि मुक्तेश्वरानंद पर परिवार को लेकर गंभीर आरेप लगाए हैं। उन्होंने पुलिस अफसरों को प्रार्थना पत्र देकर गंभीरता से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही शंकराचार्य का नार्को टेस्ट कराने की मांग की है। आशुतोष महाराज का कहना है कि सत्य सामने लाने के लिए नार्को टेस्ट जरूरी है। आशुतोष महाराज का आरोप है कि शंकराचार्य की गोपनीय पत्नी नंदिनी उर्फ पूर्णाबा का प्रकरण सामने लाया जाए। साथ ही शंकराचार्य की बहन सरला उर्फ शारदांबा का मामला खोला जाए। आशुतोष महाराज का कहना है कि इन दोनों के निवास स्थान की जांच हो। उनके नाम पर वाराणसी और अन्य स्थानों पर दर्ज संपत्तियों की खरीद की जांच हो। आरोप लगाया कि अविमुक्तेश्वरानंद की बहन सरला उर्फ शारदांबा का प्रकरण से क्या संबंध है, इसकी जांच की जाए। साथ ही अविमुक्तेश्वरानंद के जीजा सदानंद (जिन्हें गुरु भाई बताया जाता है) और सरला उर्फ शारदांबा के संबंध, निवास व्यवस्था, संपर्क, आवागमन तथा उनके नाम दर्ज संपत्तियों की भी जांच की जाए। इन चारों व्यक्तियों के बीच मोबाइल कॉल डिटेल, डिजिटल संचार, वित्तीय लेनदेन एवं आपसी संपर्क का वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाए। आशुतोष महाराज ने मांग की है कि न्यायालय की अनुमति लेकर नार्को टेस्ट /पॉलीग्राफ परीक्षण कराया जाए। 'मेरा भी नार्को टेस्ट हो, मैं तैयार हूं' आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने यह भी कहा कि निष्पक्ष जांच के लिए उनके बाद स्वयं भी न्यायालय के आदेशानुसार अपना नार्को परीक्षण कराने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल सत्य को सामने लाना है, ताकि पूरी घटना का निष्पक्ष खुलासा हो सके। उन्होंने यह भी मांग की कि जांच प्रक्रिया पारदर्शी हो और यदि न्यायालय अनुमति दे तो नार्को परीक्षण की वीडियो सार्वजनिक की जाए, जिससे "दूध का दूध और पानी का पानी" हो सके। उन्होंने पुलिस प्रशासन से बिना किसी दबाव के उच्च स्तरीय, पारदर्शी एवं निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की अपील की है। जानिए अब तक क्या-क्या हुआ 21 फरवरी एडीजे रेप एंड पोक्सो स्पेशल कोर्ट विनोद कुमार चौरसिया ने झूंसी थाने की पुलिस को मुकदमा दर्ज कर विवेचना का आदेश दिया। 21 फरवरी– रात 11.37 बजे कोर्ट के इस आदेश के अनुपालन में पुलिस ने झूंसी थाने में केस दर्ज किया। पुलिस ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी और दो-तीन अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। 22 फरवरी बीएनएस की धारा 351(3), लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम की धारा 5l, 6,3,4(2),16 और 17 के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू। 22 फरवरी झूंसी थाना प्रभारी महेश मिश्र के नेतृत्व में 8 पुलिसकर्मी वादी आशुतोष महाराज को लेकर माघ मेला क्षेत्र के उस मौका-ए-वारदात का नक्शा तैयार किया, जहां नाबालिक बटुकों के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप लगे हैं। यह वह घटनास्थल है जहां माघ मेला में शंकराचार्य अवि मुक्तेश्वरानंद का शिविर लगा था। घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ ही विवेचना अधिकारी ने त्रिवेणी मार्ग माघ मेला स्थल पर लगे सीसीटीवी के बारे में जानकारी जुटाई। 23 फरवरी झूंसी थाना प्रभारी महेश मिश्र के नेतृत्व में एक टीम वाराणसी के लिए रवाना हुई। वाराणसी पुलिस अधिकारियों को प्रयागराज में दर्ज केस की पूरी जानकारी दी। साथ ही आरोपियों के वाराणसी में रहने के बारे में अवगत कराते हुए निगरानी को कहा। 23 फरवरी प्रयागराज की पुलिस टीम वाराणसी से हरदोई के लिए रवाना हो गई। पीड़ित बटुक का घर हरदोई में है। ऐसे में पुलिस टीम ने वहां पूछताछ कर जानकारी जुटाई। बटुक के घर के आसपास पूछताछ हुई। परिवार का लेखाजोखा तैयार किया गया। इसके बार हरदोई पुलिस से संपर्क कर जानकारी दी गई। पुलिस टीम बटुक के घर पहुंच परिवारवालों से पूछताछ कर उनका बयान दर्ज किया। 24 फरवरी रिपोर्ट दर्ज कराने वाले वादी आशुतोष महाराज का ऑन रिकॉर्ड कैमरे में बयान दर्ज हुआ। उनके पास मौजूद साक्ष्य पेपरी दस्तावेज, सीडी, पेन ड्राइव समेत अन्य साक्ष्यों को हासिल किया। 25 फरवरी यौन उत्पीड़न के शिकार दोनों नाबालिग बटुकों को मजिस्ट्रेट के सामने पेश कर कमलबंद बयान दर्ज किया गया। ऑन कैमरा हुए बयान में बटुकों ने मजिस्ट्रेट को आपबीती सुनाई। 25 फरवरी दोनों नाबालिग लड़कों को पुलिस तेज बहादुर स्प्रू अस्पताल (बेली अस्पताल ) ले गई। दो डॉक्टरों के पैनल ने मेडिकल परीक्षण किया। 26 फरवरी सरकारी अस्पताल में हुए मेडिकल परीक्षण की बंद लिफाफा रिपोर्ट विवेचक को सौंपी गई। दावा किया गया कि मेडिकल रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न की पुष्टि हुई है। 27 फरवरी इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। साथ ही कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला रिजर्व कर लिया।
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