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    तमिलनाडु के 19 सांसदों ने परिसीमन का विरोध किया:बैठक में नहीं पहुंचे DMK और AIADMK सांसद; अकाली दल का सरकार को समर्थन

    21 hours ago

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    केंद्र के प्रस्तावित परिसीमन को लेकर तमिलनाडु मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने शनिवार को राज्य के लोकसभा और राज्यसभा सांसदों की बैठक बुलाई। इसमें कांग्रेस, VCK, CPI, CPI(M), MDMK और IUML समेत अलग-अलग दलों के 19 सांसद शामिल हुए। बैठक में केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन का पूरी तरह विरोध करने का फैसला लिया गया। DMK और AIADMK सांसदों ने बैठक का बहिष्कार किया। DMK ने बैठक को ‘तमाशा’ बताया, जबकि AIADMK ने इसे ‘जल्दबाजी में किया गया ड्रामा’ करार दिया। DMK के सहयोगी MNM और DMDK भी बैठक में शामिल नहीं हुए। दोनों के राज्यसभा में एक-एक सांसद हैं। लोकसभा-राज्यसभा सीटों का अनुपात 2.2:1 रखने की मांग तमिलनाडु सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक, सांसदों ने मांग की कि लोकसभा और राज्यसभा के बीच सीटों का अनुपात 2.2:1 बना रहना चाहिए। बैठक में सर्वसम्मति से तमिलनाडु और दूसरे दक्षिण भारतीय राज्यों के अधिकारों की स्थायी सुरक्षा के लिए विधानसभा में प्रस्ताव लाने का फैसला भी किया गया। बैठक में मुख्यमंत्री विजय ने सभी सांसदों से कहा कि केंद्र को प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया को छोड़ देना चाहिए, क्योंकि इससे तमिलनाडु के प्रतिनिधित्व और महत्व पर असर पड़ेगा। 543 लोकसभा सीटें और तमिलनाडु की 39 सीटें बनाए रखने की मांग बैठक के बाद राज्य के कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार ने कहा कि लोकसभा की 543 सीटों की संख्या में कोई बदलाव नहीं होना चाहिए। तमिलनाडु की 39 लोकसभा सीटें भी पहले की तरह बरकरार रहनी चाहिए। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने भी कहा कि लोकसभा में सांसदों की संख्या 543 पर स्थिर रहनी चाहिए और राज्यों के बीच सीटों का मौजूदा अनुपात भी बरकरार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि 543 सदस्यों वाली लोकसभा में तमिलनाडु की 39 सीटें बनी रहनी चाहिए। शिरोमणि अकाली दल का केंद्र सरकार को समर्थन वहीं, शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने परिसीमन और महिला आरक्षण बिल के समर्थन की घोषणा की। पार्टी ने मांग की है कि लोकसभा में दोनों विधेयक पारित किए जाएं और राज्यों की सीटों में समान 50% बढ़ोतरी की जाए। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने SAD के बदले रुख का स्वागत किया और सभी दलों से निष्पक्ष परिसीमन के लिए साथ आने की अपील की। क्या है परिसीमन और महिला आरक्षण का कनेक्शन अप्रैल में बहुमत के अभाव में बिल पास नहीं हो सका था केंद्र ने अप्रैल में तीन दिन का विशेष सत्र बुलाकर इन प्रस्तावों को आगे बढ़ाने की कोशिश की थी। हालांकि जरूरी दो-तिहाई विशेष बहुमत हासिल नहीं होने के कारण संविधान (131वां संशोधन) विधेयक लोकसभा में पास नहीं हो सका। 528 सदस्यों में 298 ने बिल के पक्ष में और 230 ने विरोध में वोट दिया। इसके बाद सरकार ने परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक को आगे नहीं बढ़ाया। यानी अप्रैल में प्रस्तावित 850 सीटों वाला नया ढांचा लागू नहीं हो सका, लेकिन परिसीमन और महिला आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर मौजूदा मानसून सत्र में राजनीतिक बहस के केंद्र में है। चर्चा है कि सरकार 13 अगस्त तक चलने वाले मानसून सत्र में बिल को फिर से सदन में ला सकती है। ------------------------- यह खबर भी पढ़ें… शाह ने समझाया- कैसे लोकसभा की सीटें 850 होंगी: दक्षिण के 5 राज्यों की सीटें 129 से 195 हो जाएंगी; यूपी-महाराष्ट्र को सबसे ज्यादा फायदा लोकसभा में अप्रैल में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन बिलों पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि परिसीमन से किसी राज्य को नुकसान नहीं होगा। उन्होंने बताया कि लोकसभा की सीटें 543 से 850 कैसे होंगी। पूरी खबर पढ़ें…
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