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    त्यौहारों पर भी पहनना पड़ता था स्कूल ड्रेस:काशी के छोटेलाल यादव को मिलेगा द्रोणाचार्य अवॉर्ड; पहली बार पिता के पीएफ से गए थे विदेश

    5 hours ago

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    मैं 3 भाई और 2 बहनें हैं। पिताजी बीएलडब्ल्यू में नौकरी करते थे। महीने का वेतन महज 3 हजार रुपए था। बगल में कावेरी सरकारी स्कूल था। वहां ड्रेस मिलती थी। उस ड्रेस को हम स्कूल पहनकर तो जाते ही थे साथ ही शादी-ब्याह और त्योहारों पर भी वही पहनना पड़ता था। शर्म आती थी, पर कोई रास्ता नहीं था। उसी समय से मन में आग थी कि इसे बदलना है। ये बातें काशी के रहने वाले मैरीकॉम की कोच मुक्केबाज छोटेलाल यादव ने कही; इसके बाद काफी देर तक शांत रहे और कमरे में रखे अपने मेडल्स को देखते रहें। छोटेलाल यादव को भारत सरकार ने प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए चयनित किया है। ऐसे में दैनिक भास्कर ने छोटेलाल यादव से उनके घर पहुंच कर उनके संघर्ष की कहानी जानी साथ ही मैरी कॉम और अन्य मुक्केबाजों के साथ ट्रेनिंग सेशन के बारे में जाना। पढ़िए, एक स्कूल ड्रेस से गोल्ड मेडल तक की कहानी… सवाल: यहां तक पहुंचने का सफर कैसा रहा, बचपन में क्या संघर्ष रहे? जवाब: छोटेलाल ने बताया कि हम 3 भाई और 2 बहनें हैं। पिताजी बीएलडब्ल्यू में नौकरी करते थे। महीने का वेतन महज 2800 से 3 हजार रुपए था। पिताजी के लिए सात लोगों को पालना मुश्किल था। हमारे पास पहनने को कपड़े नहीं थे। बगल में कावेरी सरकारी स्कूल था, जहां पर हमें स्कूल से ही ड्रेस मिलती थी। वही ड्रेस पहनकर हम शादी-ब्याह या किसी फंक्शन में जाते थे। बहुत शर्म आती थी, पर पता था कि कोई विकल्प नहीं है। उसी समय से मन में था कि इस परिस्थिति को बदलना है। छोटेलाल ने बताया कि जब मैं पहली बार उज्बेकिस्तान खेलने गया, तब पिता जी से पैसे मांगे। पिता जी ने पीएफ से 5 हजार रुपए निकालकर मुझे दिए। जब इंडियन आर्मी में सेलेक्शन हुआ तो मैंने पापा से जींस दिलाने को कहा, पर पैसे न होने की वजह से वो नहीं दिला पाए। मेरे अभावों ने मुझे मजबूत बनाया है। मैंने जो कुछ किया, पहले खुद के लिए किया, फिर देश के लिए किया। सवाल: बचपन में खेल की शुरुआत कैसे हुई? जवाब- छोटेलाल के पिता ने बताया कि इसको खेलने में रुचि थी। ये अपने दादा के साथ अखाड़े जाते थे। वहां लोगों ने कहा कि कुश्ती में कुछ नहीं है, दौड़ लगाओ। तो यह दौड़ भी लगाने लगा, रनिंग करने लगा। एक दिन इन्हें सूचना मिली कि सिगरा में स्विमिंग का ट्रायल है। इन्होंने कहा कि मैं वहां जाऊंगा। मैंने पूछा, कैसे जाओगे? तो बोले, दौड़कर चला जाऊंगा। इतनी लगन थी इसके अंदर। फिर मैंने अपने बगल के कुछ बच्चों के साथ इसे वहां तक भेजा। वहां पर यह फर्स्ट आया। उसके बाद फिर वहां से इनका सेलेक्शन हुआ और पुणे चला गया। सवाल: आपने शुरुआत में बॉक्सिंग नहीं, स्विमिंग की थी? जवाब- छोटेलाल यादव ने बताया कि जब मैं पुणे गया था तो पहले मैंने स्विमिंग की। स्टार्टिंग में छह महीने स्विमिंग की और महाराष्ट्र डिस्ट्रिक्ट में स्विमिंग में गोल्ड लिया था। लेकिन मेरे सीनियर ने मुझे कहा कि मेरी बॉडी स्विमिंग के लिए नहीं, बॉक्सिंग के लिए है। तो मुझे अपने आपको स्विमिंग से चेंज करके बॉक्सिंग में लगाना पड़ा। मैंने खुद को बॉक्सिंग में झोंक दिया। सवाल: मैरीकॉम जैसी सेलिब्रिटी को ट्रेनिंग देना कितना चैलेंजिंग रहा? जवाब: 2015 से मैं मैरीकॉम को ट्रेनिंग दे रहा हूं। 2015 में चार्ल्स एक कोच थे। उनके साथ असिस्टेंट कोच के तौर पर मैंने मैरी को ट्रेनिंग दी है। 2016 से 2022 तक मैंने उसे सिंगल हैंडेड कोचिंग दी है। मैं उसका पर्सनल कोच था। मैरी के साथ-साथ मैंने बच्चों को भी ट्रेनिंग दी है। उन्होंने कहा कि मैरी के साथ सबसे चैलेंजिंग यह था कि वो पहले से चैंपियन थी। मेरे लिए चैंपियन को चैंपियन बनाए रखना एक चैलेंज था। एक एज फैक्टर भी था। लोग बोलते थे छोड़ देना चाहिए, छोड़ देना चाहिए। ऐसे में मुझे बहुत स्मार्टली ट्रेनिंग करानी पड़ती थी। उसके जितने बच्चे थे, सब ऑपरेशन से हुए थे। तो मुझे ऑपरेशन के हिसाब से ट्रेनिंग करानी पड़ती थी, ताकि उसे इंजरी न हो। यह सिर्फ उसकी नहीं, मेरी भी परीक्षा थी। अगर मैं परफॉर्मेंस नहीं देता तो मुझे भी आउट कर देते। सवाल: मैरीकॉम की सबसे खास बात क्या लगी? जवाब: छोटेलाल यादव वह ऐसी प्लेयर है कि ट्रेनिंग के दौरान बहुत फोकस रहती है और अपने परफॉर्मेंस से जवाब देती है, ना कि बातों से। वो बॉक्सिंग की लीजेंड है। वो ऐसी प्लेयर है, जो हारने के बाद भी ट्रेनिंग करती है और जीतने के बाद भी। 2017 में मंगोलिया में मैरी का टूर्नामेंट था। ये मेरी ट्रेनिंग में उनका पहला टूर्नामेंट था, लेकिन वो क्वार्टर फाइनल में हार गई थी। अगले दिन मुझे लगा कि वो थकी होगी और ट्रेनिंग के लिए नहीं आएगी, पर वो आई। हमने साथ मिलकर बहुत काम किया। उसके दो महीने बाद एशियन चैंपियनशिप वियतनाम में थी, जिसमें जिस लड़की से वो हारी थी, उसी लड़की को हराकर एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड जीता था।और जीतने के बाद अगले दिन वो फिर ट्रेनिंग के लिए आई थी। उस समय वो सांसद थी। सवाल: वर्तमान में आप क्या कर रहे हैं? जवाब: मैं अभी इंडियन आर्मी में सूबेदार हूं। आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट, पुणे में वूमेन टीम को ट्रेनिंग दे रहा हूं। मैंने और कर्नल मनोज ने 2022 में आर्मी में अपने ऑफिसर्स से बात करके वूमेन टीम शुरू कराई। वूमेन टीम शुरू करने के लिए मुझे बहुत संघर्ष करना पड़ा, बहुत फाइट करनी पड़ी। हमारी वूमेन टीम में चार लड़कियां हैं, जिन्हें हवलदार के तौर पर भर्ती कराया था। ये भारतीय सेना की ओर से बॉक्सिंग करती हैं। जैस्मिन पहली लड़की है, जिसने आर्मी वूमेन टीम ज्वाइन की थी। इसके बाद साक्षी और फिर अरुंधति ने ज्वाइन किया। सवाल: महिला टीम शुरू होने के बाद क्या बदलाव आया? जवाब: इस कंपनी के खुलने के बाद आर्मी से महिलाओं को खेलने का मौका मिला। आर्मी में बॉक्सिंग की वूमेन टीम ही शुरू कराई थी। इसके शुरू होने के बाद से आर्मी में और सारी चीजें शुरू हो गईं। अभी इंस्टीट्यूट, पुणे में गर्ल्स कंपनी खुल गई। इसमें वेटलिफ्टिंग, बॉक्सिंग, आर्चरी ये सारी चीजों की ट्रेनिंग दी जाने लगी है। तो सबसे पहले जो शुरुआत थी, वह बॉक्सिंग टीम ही थी। सवाल: बनारस ने आपको क्या सिखाया, जो आप अपने खिलाड़ियों को भी सिखाते हैं? जवाब: मैं जब छोटा था तो बनारस के अखाड़े में दादाजी के साथ जाता था। दादाजी पहलवान थे, उनकी वजह से मैं कुश्ती करता था, अखाड़े में जाता था। लेकिन बनारस से मैंने यही सीखा कि मस्त रहना है। जब तक आप ट्रेनिंग कर रहे हैं, पूरा फोकस रहिए। लेकिन जब आप रिंग में लड़ रहे हैं तो मजे से लड़िए, एन्जॉय कीजिए। यह कोई बनारसी ही कर सकता है। क्योंकि जितना आप एन्जॉय करके खेलते हो, उतना ही अच्छा परफॉर्म करते हो। प्रेशर लेकर खेलोगे तो अच्छा परफॉर्म नहीं होता। कौन है छोटोलाल वाराणसी के पहाड़ी गांव निवासी सुबेदार छोटेलाल यादव का जन्म 5 मई 1988 को हुआ था। वह भारतीय सेना के आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट, पुणे से जुड़े रहे हैं। बॉक्सर के रूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीतने के बाद उन्होंने कोचिंग की दुनिया में कदम रखा। 2014-15 में एनआईएस पटियाला से बॉक्सिंग कोचिंग डिप्लोमा किया। इसके बाद 2015 से 2022 तक मैरीकॉम के पर्सनल कोच रहे। वर्तमान में वह आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट, पुणे की एलीट महिला बॉक्सिंग टीम के कोच हैं।
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