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    Tehran से सीधे भिड़ेगा France? सबसे घातक परमाणु विमानवाहक पोत Charles de Gaulle समंदर में उतरा, Rafale ने भरी हुंकार! Middle East War

    3 hours from now

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    फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने परमाणु संचालित फ्रांसीसी जहाज को बाल्टिक सागर से भूमध्यसागर भेजने का आदेश दिया है। मैक्रों ने कहा कि चार्ल्स डी गॉल की वायुसेना विंग और सहायक फ्रिगेट इसे सुरक्षा प्रदान करेंगे। फ्रांसीसी टीवी पर प्रसारित एक पूर्व-रिकॉर्डेड भाषण में मैक्रों ने कहा कि पिछले कुछ घंटों में पश्चिम एशिया में राफेल लड़ाकू विमान, वायु रक्षा प्रणाली और हवाई रडार प्रणाली तैनात की गई हैं।इसे भी पढ़ें: दुनिया में महायुद्धों से कोहराम! भारत से भिड़ना चाहता है पाकिस्तान, LOC पर गोलीबारी शुरू, विमान जैसा गुब्बारा भारत में आया मैक्रों का राष्ट्र के नाम संबोधनमैक्रों ने टीवी पर प्रसारित अपने संदेश में कहा कि क्षेत्र में बढ़ती अनिश्चितता और अस्थिरता को देखते हुए यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया है। इमैनुएल मैक्रों ने कहा "इस अस्थिर स्थिति और आने वाले दिनों की अनिश्चितताओं का सामना करने के लिए, मैंने विमानवाहक पोत चार्ल्स डी गॉल, उसके हवाई बेड़े और फ्रिगेट एस्कॉर्ट को भूमध्य सागर के लिए रवाना होने का आदेश दिया है।" साइप्रस और यूएई की सुरक्षा के लिए 'राफेल' तैनातमैक्रों ने यह भी पुष्टि की कि फ़्रांस ने पिछले कुछ घंटों में राफेल (Rafale) लड़ाकू विमान, हवाई रक्षा प्रणाली और रडार सिस्टम को सक्रिय कर दिया है। सोमवार को साइप्रस स्थित ब्रिटिश एयरबेस पर हुए हमले के बाद, फ़्रांस ने वहां अतिरिक्त हवाई रक्षा संपत्तियां और अपना युद्धपोत 'लैंगडोक' (Languedoc) भेजने का निर्णय लिया है। फ्रांसीसी विदेश मंत्री ज्यां-नोएल बैरो ने बताया कि अबू धाबी के अल-धफरा बेस पर तैनात राफेल जेट विमानों ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के हवाई क्षेत्र की सुरक्षा के लिए उड़ानें शुरू कर दी हैं।इसे भी पढ़ें: Famous Temple In Vrindavan: Vrindavan Yatra को बनाएं यादगार, Banke Bihari के अलावा इन 5 मंदिरों में जरूर करें दर्शन फ़्रांसीसी बेस पर हुआ हमलायह कार्रवाई तब और तेज हुई जब रविवार को संयुक्त अरब अमीरात में स्थित एक फ़्रांसीसी सैन्य ठिकाने (हैंगर) पर ईरानी ड्रोन द्वारा हमला किया गया। हालांकि इसमें जानमाल का बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन फ़्रांस ने इसे अपनी संप्रभुता और हितों पर सीधे खतरे के रूप में लिया है।युद्ध की पृष्ठभूमिशुरुआत: 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमले में सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद यह संघर्ष शुरू हुआ। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संकेत दिया है कि यह युद्ध कई हफ्तों या उससे अधिक समय तक चल सकता है। ईरान ने जवाब में खाड़ी क्षेत्र के उन देशों को निशाना बनाया है जो अमेरिका के सहयोगी हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक मार्ग खतरे में पड़ गए हैं।रणनीतिक महत्वफ़्रांस का 'चार्ल्स डी गॉल' वर्तमान में उत्तरी अटलांटिक में एक अभ्यास का हिस्सा था, जहाँ से इसे अब युद्ध क्षेत्र की ओर मोड़ा गया है। यह तैनाती दर्शाती है कि यूरोपीय शक्तियां अब इस संघर्ष में केवल दर्शक नहीं रहना चाहतीं, बल्कि अपने नागरिकों और हितों की रक्षा के लिए सैन्य हस्तक्षेप के लिए तैयार हैं। 
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