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    थारू जनजाति होली उत्सव में झूमे बृजभूषण शरण सिंह:थारू समुदाय के लोगों के साथ गमछा हिलाते बृजभूषण ने मनाया होली उत्सव

    3 hours ago

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    गोंडा जिले के कैसरगंज से पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने अपने पैतृक आवास विश्नोहरपुर में थारू जनजाति होली उत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में बलरामपुर और श्रावस्ती से आए थारू समाज के लोगों ने होली के अवसर पर विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह भी थारू समाज के लोगों, विशेषकर महिलाओं और लड़कियों के साथ होली के गीतों पर झूमते हुए नजर आए। इस दौरान का एक वीडियो भी सामने आया है। कार्यक्रम के समापन पर बृजभूषण शरण सिंह ने सभी उपस्थित लोगों को संबोधित किया। उन्होंने भाईचारे के साथ मिलकर होली का त्योहार मनाने की अपील की। इसके बाद उन्होंने थारू समाज के लोगों को अंग वस्त्र और नकद राशि देकर सम्मानित किया। उनके आने-जाने की पूरी व्यवस्था भी बृजभूषण शरण सिंह द्वारा ही की गई थी। वहीं, मीडिया से बात करते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध पर अपनी टिप्पणी दी। उन्होंने कहा कि युद्ध किसी भी स्थिति में किसी के लिए अच्छा नहीं होता। 3 तस्वीरों में देखिए बृजभूषण शरण सिंह का नृत्य… सिंह ने आगे कहा कि यह पहली बार है जब इतने सारे देश इस तरह के संघर्ष में शामिल हैं, जिससे स्थिति बहुत उथल-पुथल भरी है। उन्होंने मिल रहे समाचारों, हमलों और हत्याओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पूरा भारत इस बात को लेकर चिंतित है और सरकार भी इस पर नजर बनाए हुए है। उन्होंने युद्ध समाप्त कर बातचीत का रास्ता खोलने की वकालत की, क्योंकि जो कुछ भी हो रहा है, वह अच्छा नहीं है। बृजभूषण ने आगे कहा कि देखिए इस पर बड़ा कह लीजिए कि हिंदुस्तान भी दो खेमे में बँटा हुआ है। अभी ईरान में जिनकी हत्या हुई है, अब उनके सजातीय या उनके धर्म को मानने वाले लोग हिंदुस्तान में हैं। तो उनकी भावना को ठेस पहुँची है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता है। उनकी भावना को ठेस पहुँची है और इस कारण से जहाँ-जहाँ पर शिया समुदाय के लोग हैं। वो अपना आक्रोश प्रकट कर रहे हैं, अपना दुःख प्रकट कर रहे हैं और वो भी यही चाहते हैं कि ये बंद होना चाहिए। इस युद्ध के आगे की दिशा को लेकर बृजभूषण ने कहा, “देखिए, बातचीत का ही रास्ता सबको अपनाना पड़ेगा। अब तब तक कितना बड़ा विनाश हो जाता है, कितना बड़ा नुकसान हो जाता है। दुनिया के तमाम ऐसे देश, जो बहुत सुरक्षित माने जाते थे, आज वहाँ भी एक तरह से खलबली मची हुई है। आज भारत के भी तमाम लोग, जैसे खाड़ी के देशों में बहुत बड़ी संख्या में हमारे लोग रह रहे हैं। ऐसा नहीं है कि केवल मुसलमानों की ही संख्या है, हर समाज और हर जाति के लोग वहाँ काम कर रहे हैं। आज वे सभी वहाँ परेशान हैं और उनके परिवार यहाँ परेशान हैं। आधी दुनिया तो पहले ही परेशान हो चुकी है। दुनिया को यही मालूम था कि इज़राइल एक-दो दिन के अंदर ही सब कुछ समाप्त कर देगा, लेकिन स्थिति वैसी नहीं रही। ईरान जिन देशों पर हमला कर रहा है, वे सब अमेरिका के मित्र देश हैं। अब जब अमेरिका उनका कुछ नहीं कर पा रहा है, तो हालात और जटिल हो गए हैं। इसमें भारत भी अछूता नहीं है। कोई ऐसा देश नहीं बचा है जहाँ हमारे लोग प्रभावित न हों। हमारी रेसलिंग टीम भी एक देश में फँस गई है। संभवतः कल तक वे वापस आ जाएँ। दुनिया बहुत बड़ी है, लेकिन अब बहुत छोटी हो चुकी है। एक घटना का असर दूसरी घटनाओं पर पड़ता है। शेयर बाज़ार की स्थिति देख लीजिए—कल क्या हुआ, कैसे उतार-चढ़ाव आए। कहीं भी कुछ भी होता है, तो उसका प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ता है। हमारा देश भी यही चाहता है। हमारे प्रधानमंत्री भी यही चाहते हैं और देश की भावना भी यही है कि बातचीत का रास्ता शुरू हो, क्योंकि युद्ध कोई समाधान नहीं है।”
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