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    दोस्त को बचाने के चक्कर में नदी में डूबे तीनों:लखनऊ में गणेश प्रतिमा ऊपर गिरने से हादसा, दो प्रेग्नेंट पत्नियों का बुरा हाल

    5 hours ago

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    लखनऊ में गणपति प्रतिमा विसर्जन के दौरान सई नदी में डूब रहे बचपन के दोस्त प्रमोद को बचाने के लिए धीरज और हरिप्रसाद ने भी नदी में छलांग लगा दी। प्रमोद ने दोनों दोस्तों की पीठ पर हाथ रखकर नदी से बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन तेज बहाव के कारण तीनों नदी में डूब गए। प्रमोद को तैरना आता था, इसके बावजूद वह प्रतिमा के नीचे दबने के बाद तेज बहाव में बह गया। प्रमोद के भाई मनोज ने बताया कि धीरज और हरिप्रसाद बचपन से ही उसके दोस्त थे। गणपति प्रतिमा की स्थापना के बाद से प्रमोद मजदूरी करने नहीं गया था। सोमवार रात कार्यक्रम स्थल पर देवी जागरण हुआ था। पूरी रात जागरण में शामिल होने के बाद मंगलवार सुबह प्रमोद घर पर नहाने आया। इसके बाद दोपहर करीब 12 बजे गणपति प्रतिमा विसर्जन के लिए निकल गया। मनोज ने बताया कि धीरज और हरि प्रसाद की पत्नियां प्रेग्नेंट हैं। दोनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार किसी तरह उन्हें संभाल रहा है। हादसे के बाद की 3 तस्वीरें देखिए… प्रतिमा लेकर आगे चल रहा था प्रमोद मनोज के मुताबिक धीरज, प्रमोद, हरिप्रसाद समेत अन्य ग्रामीण गणपति प्रतिमा लेकर सई नदी में उतरे थे। प्रमोद को तैरना आता था, इसलिए वह प्रतिमा लेकर सबसे आगे चल रहा था। धीरज और हरिप्रसाद प्रतिमा को दोनों तरफ से पकड़े हुए थे। नदी के गहरे हिस्से में पहुंचने पर अचानक प्रमोद का पैर फिसल गया और वह गिर पड़ा। इसी दौरान प्रतिमा उसके ऊपर गिर गई और वह उसके नीचे दब गया। कुछ देर बाद प्रमोद घटनास्थल से कुछ दूरी पर नदी में डूबता नजर आया। उसे बचाने के लिए धीरज और हरिप्रसाद ने भी नदी में छलांग लगा दी। दोनों ने प्रमोद को बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन तेज बहाव में वे भी डूबने लगे। प्रमोद ने दोनों दोस्तों की पीठ पर हाथ रखकर नदी से बाहर निकलने की दो बार कोशिश की, लेकिन तेज बहाव के कारण तीनों नदी में डूब गए। 15 अक्टूबर के देवी जागरण की तैयारियों में जुटा था प्रमोद परिजनों के मुताबिक प्रमोद धार्मिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता था। 15 अक्टूबर को होने वाले देवी जागरण के लिए उसे कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था। वह गणेश पूजा के साथ देवी जागरण की तैयारियों में भी जुटा था। उसकी मौत से मां रानी, पिता हरिशंकर, भाई मनोज, विनोद और विजय और बहन संतोषी का रो-रोकर बुरा हाल है। सुबह फिर नदी में उतरीं टीमें, एक-एक कर मिले तीनों शव बुधवार सुबह चार नावों के साथ एसडीआरएफ की टीमें और जल पुलिस के करीब एक दर्जन गोताखोर नदी में उतरे। डूबने वाले स्थान के आसपास से लेकर बहाव वाले क्षेत्र में लगातार तलाश की गई। सुबह करीब 6:30 बजे धीरज का शव घटनास्थल से लगभग 300 मीटर दूर मिला। इसके करीब एक घंटे बाद 7:30 बजे हरिप्रसाद का शव भी बरामद कर लिया गया। तीसरे युवक प्रमोद की तलाश इसके बाद भी जारी रही। गोताखोरों और एसडीआरएफ की टीमों ने नदी में काफी दूर तक सर्च किया। करीब 11:45 बजे घटनास्थल से लगभग ढाई किलोमीटर दूर प्रमोद का शव मिला। तीनों शव मिलने के बाद पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई पूरी कर उन्हें पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। शव घर पहुंचे तो टूट गया परिवारों का सब्र पोस्टमार्टम के बाद बुधवार दोपहर करीब सवा तीन बजे धीरज और हरिप्रसाद के शव एक ही एंबुलेंस से गांव पहुंचे। शव देखते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। परिजन शवों से लिपटकर रोने लगे। शाम करीब पांच बजे प्रमोद का शव भी घर पहुंचा तो वहां भी मातम छा गया। गांव में तनाव जैसी स्थिति न बने और अंतिम संस्कार शांतिपूर्वक हो सके, इसके लिए पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा। बाद में परिजनों ने गमगीन माहौल में तीनों का अंतिम संस्कार कर दिया। दो घरों में बच्चे के आने का इंतजार था हादसे ने सबसे गहरा जख्म धीरज और हरिप्रसाद के परिवार को दिया है। धीरज ने करीब दो साल पहले अनीता से प्रेम विवाह किया था। अनीता करीब दो माह की गर्भवती हैं। पति के नदी में डूबने की खबर मिलने के बाद वह बदहवास हालत में नदी किनारे पहुंचीं और घंटों शव मिलने का इंतजार करती रहीं। हरिप्रसाद की पत्नी श्यामावती भी आठ माह की गर्भवती हैं। परिवार में नए सदस्य के आने की तैयारियां चल रही थीं। उनके एक बेटा निहाल और बेटी निहालिका हैं। हादसे के बाद परिवार की खुशियां अचानक मातम में बदल गईं। प्रमोद के परिवार में मां रानी देवी, तीन भाई मनोज, विनोद और सनोज तथा बहन संतोषी हैं। तीनों शवों के घर पहुंचने के बाद परिवार की महिलाओं और रिश्तेदारों का रो-रोकर बुरा हाल रहा। विसर्जन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल हादसे के बाद ग्रामीणों और मृतकों के परिजनों ने नदी किनारे सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, जबरेला पुल के पास हर साल गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। इस बार भी लखनऊ, उन्नाव समेत आसपास के इलाकों से लोग पहुंचे थे। ग्रामीणों का आरोप है कि नदी का जलस्तर बढ़ा होने और भीड़ अधिक होने के बावजूद मौके पर पहले से पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी। उनका कहना है कि जल पुलिस की नाव और गोताखोरों की तैनाती विसर्जन शुरू होने से पहले होनी चाहिए थी। परिजनों ने मामले की जांच कर सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। तीनों शव मिलने तक मौके पर डटे रहे एसीपी हादसे की सूचना मिलने के बाद एसीपी आरके सिंह और प्रभारी निरीक्षक रामबाबू सिंह लगातार मौके पर निगरानी करते रहे। मंगलवार शाम से बुधवार दोपहर तक एसडीआरएफ, जल पुलिस के गोताखोरों और पुलिस टीमों ने करीब 18 घंटे तक नदी में सर्च ऑपरेशन चलाया। तीसरे युवक का शव मिलने के बाद ही अभियान समाप्त किया गया। ………… इससे संबंधित ये खबर भी पढ़ें… सई नदी में डूबे तीनों व्यक्तियों के शव बरामद:लखनऊ में गणेश प्रतिमा विसर्जन करने गए थे, पुलिस-पीएसी की मौजूदगी में अंतिम संस्कार लखनऊ के मोहनलालगंज में मंगलवार शाम गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान सई नदी में डूबे तीनों व्यक्तियों के शव बरामद कर लिए गए हैं। बुधवार को एसडीआरएफ ने धीरज (35), हरिप्रसाद (40) और प्रमोद (22) के शव नदी से निकाल लिए। प्रमोद की तलाश में करीब तीन किलोमीटर के दायरे में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। तीनों शवों के पोस्टमॉर्टम के बाद पुलिस-पीएसी की मौजूदगी में अंतिम संस्कार हुआ। पढ़िए पूरी खबर…
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