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    उमाशंकर सिंह को मुखाग्नि बाद भावुक हुए मंत्री दिनेश सिंह:बोले-‘आज उमाशंकर सचमुच देवता हो गए’; 100 किमी यात्रा में लाखों लोग उमड़े

    15 hours ago

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    बलिया के शिवरामपुर गंगा घाट पर बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के अंतिम संस्कार के बाद उत्तर प्रदेश सरकार के स्वतंत्र प्रभार मंत्री दिनेश प्रताप सिंह भावुक हो गए। मुखाग्नि दिए जाने के बाद मीडिया से बातचीत करते समय उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े और वे फफककर रोने लगे। दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि बलिया के लोगों ने उमाशंकर सिंह की सेवाओं को न केवल देखा, बल्कि उन्हें दिल से सराहा भी। उनकी अंतिम यात्रा में लाखों लोग शामिल हुए। उन्होंने कहा कि यात्रा जिस मिट्टी से होकर गुजरी, लोग उस मिट्टी को चूमते नजर आए। ‘आज उमाशंकर सचमुच देवता हो गए’ मंत्री ने कहा, "आज उमाशंकर सिंह सचमुच देवता हो गए हैं।" उन्होंने बताया कि करीब 100 किलोमीटर की अंतिम यात्रा में लाखों लोग बारिश में भीगते हुए श्रद्धांजलि देने पहुंचे। उनके मुताबिक, कई लोग चार-चार घंटे तक सड़क किनारे खड़े रहे। लोगों की आंखों में आंसू थे और वे उमाशंकर सिंह को अंतिम विदाई देने के लिए घंटों इंतजार करते रहे। मंत्री ने कहा कि यही उमाशंकर सिंह की सबसे बड़ी पूंजी थी। ‘सेवा का ऐसा प्रतिफल कम लोगों को मिलता है’ दिनेश प्रताप सिंह ने भारतीय संस्कृति और परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि जो व्यक्ति इस धरती से गोलोक जाता है, वह देव हो जाता है। उन्होंने कहा कि समाज में विनम्रता के साथ सेवा करने वाले लोगों को इस तरह का सम्मान कम ही मिलता है। उन्होंने कहा कि उमाशंकर सिंह के मामले में यह साफ तौर पर देखने को मिला। अलग-अलग राजनीतिक दलों और विचारधाराओं के लोगों ने भी उनके निधन पर दुख जताया और परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं। ‘दलीय सीमाओं से ऊपर थीं उमाशंकर के प्रति संवेदनाएं’ मंत्री ने कहा कि उमाशंकर सिंह को केवल किसी एक व्यक्ति या परिवार तक सीमित नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि देश के गृह मंत्री ने भी उनके इलाज के दौरान अमेरिका तक अपनी भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री की भी उनके प्रति संवेदनाएं और भावनाएं थीं। प्रधानमंत्री कार्यालय लगातार उनके बेहतर इलाज को लेकर संपर्क में रहा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में शायद ही कोई ऐसा दल हो, जिसके लोग उमाशंकर सिंह के निधन से दुखी न हों। बलिया में लोग उन्हें 'रसड़ा का भगवान' और 'बलिया का भगवान' तक कह रहे हैं। यह सम्मान हर किसी को नसीब नहीं होता। ‘छोटा बच्चा बड़ा उमाशंकर बनेगा’ दिनेश प्रताप सिंह ने उमाशंकर सिंह के परिवार के प्रति भी संवेदना जताई। उन्होंने कहा कि परिवार के बच्चों को आगे बढ़ाने में जहां उनकी जरूरत होगी, वे और उनके सहयोगी साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने कहा कि परिवार के बच्चों को संबल देना और उनके रास्ते को आसान बनाना समाज और संस्कृति का हिस्सा है। मंत्री ने उम्मीद जताई कि उमाशंकर सिंह का छोटा बच्चा लोगों की दुआओं और शुभकामनाओं के बल पर आगे चलकर 'बड़ा उमाशंकर' बनेगा। ‘परिवार सक्षम, सेवा की परंपरा आगे बढ़ेगी’ मंत्री ने बताया कि उमाशंकर सिंह का भरा-पूरा परिवार है। परिवार में 105 वर्षीय पिता और छोटा भाई भी हैं, जो बलिया के लोगों की सेवा में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि परिवार सक्षम है और उमाशंकर सिंह के अधूरे सपनों को आगे बढ़ाने की पूरी कोशिश की जाएगी। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि उमाशंकर सिंह को अपने चरणों में स्थान दें और उनके परिवार, शुभचिंतकों और समर्थकों को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। 55 साल की उम्र में हुआ निधन बसपा के यूपी में इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का बुधवार रात करीब साढ़े 9 बजे दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में निधन हुआ था। वह 55 वर्ष के थे और लंबे समय से ब्रेन कैंसर से जूझ रहे थे। उनका अमेरिका में भी इलाज कराया गया था, लेकिन बीमारी चौथे स्टेज तक पहुंच गई थी। गुरुवार तड़के उनका पार्थिव शरीर लखनऊ के गोमतीनगर स्थित आवास पर लाया गया था। यहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बसपा सुप्रीमो मायावती, सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव समेत कई राजनीतिक हस्तियों ने श्रद्धांजलि दी। इसके बाद गुरुवार रात करीब 8:45 बजे पार्थिव शरीर पैतृक गांव खनवर लाया गया। शुक्रवार को शिवरामपुर गंगा घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। मुखाग्नि उनके बेटे प्रिंस युकेश सिंह ने दी। मंत्री दिनेश प्रताप सिंह, जो उमाशंकर सिंह के समधी भी हैं, उनके पार्थिव शरीर के साथ बलिया पहुंचे थे।
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