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    उन्नाव के जैतीपुर गांव में अनोखी होली:ग्रामीण दो दलों में बंटकर खेलते हैं 'रंगों का युद्ध', गांव को जोड़ने वाली परंपरा

    2 hours ago

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    उन्नाव जिले के जैतीपुर गांव में इस वर्ष भी पारंपरिक और अनोखी होली का आयोजन किया गया। वर्षों पुरानी परंपरा के तहत पूरा गांव दो हिस्सों में बंट गया और मुख्य बाजार में 'रंगों का युद्ध' खेला गया। इस अनूठी होली को देखने के लिए आसपास के गांवों सहित दूर-दराज से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। होली के लिए गांव में पहले से ही तैयारियां शुरू हो गई थीं। मुख्य बाजार में बड़े ड्रमों और बर्तनों में रंग घोला गया था। तय समय पर होली का शुभारंभ होते ही पूरा गांव दो दलों में विभाजित हो गया। दोनों पक्षों को अलग रखने के लिए बाजार के बीचों-बीच एक मोटा रस्सा बांधा गया, जो इस पारंपरिक आयोजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके बाद रंगों का मुकाबला शुरू हुआ। दोनों ओर से होरियारे हाथों में पिचकारियां और रंग लेकर एक-दूसरे पर रंग फेंकने लगे। चारों तरफ रंगों की बौछार होने लगी और पूरा वातावरण गुलाल व रंगों से भर गया। हवा में उड़ते रंगों ने पूरे बाजार को होलीमय बना दिया। ग्रामीणों के अनुसार, जैतीपुर की यह होली सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा है। इसे हर वर्ष पूरे उत्साह और अनुशासन के साथ मनाया जाता है। इस आयोजन की विशेषता यह है कि इसमें किसी प्रकार का मनमुटाव या विवाद नहीं होता, बल्कि यह आपसी प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है। ग्रामीण बालजी साहू ने बताया, "हमारे गांव की यह परंपरा बहुत पुरानी है। इस दिन पूरा गांव एक परिवार की तरह एकत्र होता है और प्रेमपूर्वक होली खेलता है।" अंकुर मौर्य ने कहा कि जैतीपुर की होली आसपास के क्षेत्रों में भी प्रसिद्ध है और लोग इसे देखने दूर-दूर से आते हैं। गुड्डू साहू ने इसे गांव को जोड़ने वाली परंपरा बताया। आयोजन लोगों में उत्साह और एकता का भाव पैदा करता है। नंद किशोर ने कहा कि यह होली गांव की सांस्कृतिक विरासत है, जिसे सभी मिलकर जीवंत बनाए रखते हैं। रंगों के इस अनोखे आयोजन के बाद गांव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। ढोल-नगाड़ों की धुन पर ग्रामीण जमकर झूमे और फाग गीतों की गूंज से पूरा जैतीपुर गांव उत्सव के रंग में रंग गया। महिलाओं और बुजुर्गों ने भी पारंपरिक गीतों के साथ उत्सव में भाग लिया। जैतीपुर की यह अनूठी होली आज “रंगों का युद्ध” के नाम से प्रसिद्ध हो चुकी है। हालांकि यह युद्ध केवल आनंद, प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है, जहां जीत या हार नहीं बल्कि खुशियों का साझा उत्सव ही सबसे बड़ी पहचान बनकर सामने आता है।
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