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    वायनाड में लैंडस्लाइड की चपेट में आए कई लोग, VIDEO:मलबे से बचकर भागते दिखे, 200 फुट दूर से तिनके की तरह बहता आया टैंकर

    19 hours ago

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    केरलम के वायनाड में मंगलवार को लैंडस्लाइड में 4 लोगों की मौत हो गई। 9 से ज्यादा लापता हैं। कल्लाडी स्थित मीनाक्षी ब्रिज के पास मलप्पुरम-वायनाड टनल के सामने यह घटना हुई। यहां कंस्ट्रक्शन चल रहा था और टनल के सामने सैकड़ों टन मिट्टी जमा थी। इस हादसे का VIDEO सामने आया है। इसमें दिख रहा है कि तेज बारिश के चलते लैंड स्लाइड हुई और अचानक पूरा मलबा तेजी से बहने लगा। लोग मलबे से बचकर भागते दिखे। दर्जनों चपेट में आ गए। गाड़ियां बह गईं। घटनास्थल पर एक टैंकर खड़ा था, जो मलबे के साथ तिनके की तरह करीब 200 फुट तक बहता हुआ आया। टैंकर वहां मौजूद महिला और पुरुष से चंद फीट दूर रुका। जिससे उनकी जान बच गई। हादसे के बाद कई लोग मलबे में दब गए हैं। इनको बचाने का काम चल रहा है, JCB मशीनें लगाई गई हैं। अधिकारियों के अनुसार, लगातार बारिश के कारण सोमवार से ही सुरंग कंस्ट्रक्शन का काम रोक दिया गया था। देखें हादसे का पूरा CCTV फुटेज टनल की लंबाई 8 किमी, 2200 करोड़ का प्रोजेक्ट मलप्पुरम-वायनाड टनल प्रोजेक्ट के तहत मलप्पुरम को वायनाड से सुरंग (टनल) के जरिए जोड़ना है। टनल की लंबाई करीब लगभग 8.17 किमी है। इसकी लागत करीब ₹2,100–2,200 करोड़ है। दो साल पहले भी वायनाड में एक के बाद एक तीन भूस्खलन हुए थे, जिसमें 400 से ज्यादा जानें चली गई थीं। 4 तस्वीरों में वायनाड लैंड स्लाइड लैंडस्लाइड के बाद रेस्क्यू मिशन वायनाड हादसा कैसे हुआ, ग्राफिक्स से समझें वायनाड में लैंडस्लाइड की क्या वजह है वायनाड में 2024 में सबसे बड़ा हादसा, 400 से ज्यादा की मौत वायनाड में 2 साल पहले सबसे बड़ा लैंडस्लाइड हादसा हुआ था। 30 जुलाई 2024 रात करीब 2 बजे से 4 बजे के बीच मुंडक्कई, चूरलमाला, अट्टामाला और नूलपुझा गांवों में लैंडस्लाइड हुईं। इस हादसे में 400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। वहीं 2019 में भी भारी बारिश के कारण इन्हीं इलाकों में लैंडस्लाइड हो चुकी हैं। उस हादसे में 17 लोगों की मौत हुई थी। भारत का करीब 12.6% हिस्सा लैंडस्लाइड डेंजर जोन में आता है भारत के करीब 12.6% भूभाग (लगभग 4.2 लाख वर्ग किमी) को लैंडस्लाइड संभावित क्षेत्र माना जाता है। हिमालय और पश्चिमी घाट देश के सबसे संवेदनशील लैंडस्लाइड क्षेत्र हैं। भारत में जून से सितंबर (मानसून) के दौरान सबसे ज्यादा भूस्खलन होते हैं। 80% से ज्यादा लैंडस्लाइड भारी बारिश के कारण होते हैं। सड़क, सुरंग, बांध, खनन और जंगलों की कटाई जैसी मानवीय गतिविधियां भी भूस्खलन का खतरा बढ़ाती हैं। केरलम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और दार्जिलिंग सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। भारत में हर साल सैकड़ों लोगों की मौत भूस्खलन की घटनाओं में होती है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) देशभर में लैंडस्लाइड सस्प्टिबिलिटी मैप तैयार करता है, ताकि संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर समय रहते चेतावनी दी जा सके। ------------------------- ये खबर भी पढ़ें… जम्मू-कश्मीर के डोडा में बादल फटा, मलबे में गाड़ियां दबीं: मुंबई में 48 घंटे में 15 इंच बारिश जम्मू-कश्मीर के डोडा में ऊपरी इलाके में बादल फटने से मलबा रिहायशी इलाकों में घुस गया। सड़कों पर कई गाड़ियां मलबे में दब गईं। महाराष्ट्र के कई जिलों में लगातार भारी बारिश हो रही है। मुंबई में पिछले 48 घंटे में करीब 15 इंच (380 मिमी) बारिश दर्ज की गई। IMD ने मंगलवार के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। पूरी खबर पढ़ें…
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