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    वायरल बाबा को देवीराम का लड्डू-ढोकला पंसद:घंटों वहीं बैठकर स्टूडेंट को करते थे गाइड, कर्मचारी बोले- बाबा काफी होशियार हैं

    1 hour ago

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    आगरा में फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने वाले 80 वर्षीय संतोष गोयल का इलाज अब भारतीय सेना करा रही है। दोनों आंखों से नेत्रहीन संतोष गोयल को मंगलवार को आर्मी के जवान अपने साथ कमांड हॉस्पिटल ले गए, जहां उनकी आंखों का इलाज चल रहा है। रोज ढोकला-लड्डू खाने आते थे देवीराम स्वीट्स शाह मार्केट देवीराम स्वीट्स के कर्मचारियों ने बताया-बाबा संतोष गोयल रोज सुबह 10 बजे दुकान पर आ जाते थे। दोनों आंखों से दिखाई नहीं देता था। मैले-कुचैले कपड़े पहने रहते थे। यहां आकर दो ढोकला और दो लड्डू खाते थे। दुकानदार उनसे कभी पैसे नहीं लेते थे। कर्मचारियों ने कहा-बाबा कई साल से दुकान पर आ रहे हैं। लड्डू-ढोकला खाने के बाद सामने दुकान पर बैठ जाते थे। घंटों वहीं बैठकर दिन गुजारते थे। कई स्टूडेंट उनसे सलाह-मशवरा करने आते थे। बाबा बताते थे- NDA में पढ़ाया, छात्र बने मेजर-कर्नल दुकान के स्टाफ ने बताया-हमें पहले से पता था कि बाबा काफी होशियार हैं। बातचीत में बताते थे कि मैंने इंग्लिश से पीएचडी की है। NDA खड़कवासला, पुणे में कैडेट्स को पढ़ाया है। मेरे पढ़ाए छात्र आज सेना में मेजर, कर्नल हैं।" हालांकि उन्होंने अपने घर-परिवार के बारे में कभी कुछ नहीं बताया। वीडियो वायरल होने के बाद देशभर में बाबा की चर्चा होने लगी। देवीराम स्वीट्स के कर्मचारी बोले, "कमिश्नर साहब ने वीडियो बनाया, उसके बाद से बाबा दिखे नहीं। जिस दिन से सेना के जवान उन्हें ले गए, उस दिन से दुकान पर आना बंद है। अब मामला विस्तार से पढ़ें… आगरा में फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने वाले 80 साल के संतोष गोयल का इलाज आर्मी कराएगी। मंगलवार को आर्मी के जवान उन्हें अपने साथ कमांड हॉस्पिटल ले गए। संतोष गोयल की दोनों आंखें खराब हैं। उन्हें दिखता नहीं है। 2 अप्रैल को संतोष गोयल का एक वीडियो सामने आया था। इसे जीएसटी के एडिशनल कमिश्नर अजय मिश्रा ने शूट किया था। संतोष ने अपनी कहानी सुनाई थी। बताया कि उन्होंने 1971 में अंग्रेजी में पीएचडी की थी। नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) खड़कवासला, पुणे में पढ़ाते थे। 3 साल NDA में रहे, आंखों की रोशनी जाने पर बोर्ड ने निकाला संतोष गोयल ने दावा किया था, मैं आर्मी एजुकेशन कोर में शिक्षक रहा था। मेरे पढ़ाए छात्र आज भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट, कैप्टन, मेजर से लेकर जनरल तक हैं और देश की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 3 साल तक NDA में सेवाएं देने के बाद आंखों की रोशनी चली गई थी। इस वजह से मुझे नौकरी से निकाल दिया गया। उन्होंने ये भी कहा कि यदि उनकी सेवा 15 साल पूरी होती तो आज वे सम्माजनक पेंशन पा रहे होते। इस समय करीब 80 हजार रुपए महीने पेंशन मिल रही होती। संतोष ने जीएसटी के एडिशनल कमिश्नर अजय मिश्रा को बताया कि वे दांत नहीं होने के कारण रोटी नहीं खा पाते। इसलिए पास ही स्थित देवीराम मिष्ठान भंडार से मिलने वाले भोग (ढोकले और लड्डू) से अपना पेट भरते हैं। पड़ोसियों को संतोष के दावे पर भरोसा नहीं, आर्मी पूछताछ करेगी फिलहाल, संतोष गोयल के दावों पर आस-पड़ोस के लोगों को भरोसा नहीं हो रहा है। लोगों का कहना है कि वे NDA में शिक्षक रहे या नहीं, पता नहीं। सालों से वे बाबा को हर रोज यहीं पर आते-जाते देख रहे हैं। रिश्तेदारों ने भी उनसे दूरी बना रखी है। लोगों का कहना है कि बाबा जिस घर में रहते थे, वह उनके रिश्तेदार का है। लेकिन, घर में रहने वाले किसी भी तरह का रिश्ता होने से इनकार कर रहे हैं। सेना के जवान रविवार को संतोष गोयल के घर पहुंचे। उन्हें अपनी गाड़ी में बैठाकर ले गए। बताया जा रहा है, सेना उनकी आंखों का इलाज करा रही है। इसके साथ ही उनसे पूछताछ भी की जा रही है। अब जानिए घर का हाल... संतोष गोयल न्यू आगरा के नगला पदी में रहते हैं। मुख्य सड़क से 150 मीटर अंदर गली के आखिर में एक छोटा सा घर है। बाबा इसी घर में रहते हैं। मगर, घर में रहने वाले उनसे किसी प्रकार का रिश्ता होने से इनकार कर रहे हैं। कहते हैं, बाबा उनके यहां अक्सर रात गुजारने के लिए आते हैं। लेकिन वे उनके बारे में जानते नहीं हैं। बाबा पढ़े-लिखे तो हैं, लेकिन उन्होंने NDA में नौकरी की या नहीं, ये उन्हें नहीं पता। कुछ देर बातचीत के बाद संतोष गोयल के रिश्तेदार घर के अंदर चले गए और गेट बंद कर लिया। दैनिक भास्कर की टीम ने इस घर के 200 मीटर के दायरे में रहने वाले कई लोगों से पूछताछ की। पड़ोसी रामबाबू ने बताया, वे यहां लगभग 15 साल से यहां रह रहे हैं। लेकिन उन्होंने संतोष गोयल को न तो कभी फौज की ड्रेस में देखा और न ही कभी नौकरी पर जाते हुए। रामबाबू ने बताया- हर सुबह बाबा को कहीं जाते हुए देखते हैं और शाम को लौटते हुए। कभी-कभी उन्हें अंग्रेजी में किसी से बातचीत करते हुए जरूर देखा है। रामबाबू का कहना है- संतोष गोयल पढ़े-लिखे लगते हैं, लेकिन उन्होंने नौकरी कभी नहीं की। उन्होंने ये भी बताया, जिस घर में संतोष गोयल रहते हैं, उस का एक युवक उन्हें हर रोज अपने स्कूटर पर कहीं छोड़ने जाता है और वे शाम को रिक्शे से लौटते हैं। उनका कहना है कि शाह मार्केट के आसपास वे किसी से मदद मांग कर अपना खर्च चलाते हैं। मैले-कुचैले कपड़ों में ही रहते बाबा गली के मोड़ पर स्थित दुकान के मालिक सोनी वर्मा का कहना है, वे लगभग 48 साल से बाबा संतोष गोयल को यहीं देख रहे हैं। बाबा ने कभी नौकरी की, ये मैंने न देखा और न ही सुना। उन्होंने बताया कि वे बाबा को सालों से गंदे कपड़े और गंदी हालत में ही देख रहे हैं। वायरल होने के बाद आए लाइम लाइट में नगला पदी में ही बाबा के घर से बमुश्किल 150 मीटर पहले स्थित दुकानदार शेखर ने बताया, जब से बाबा का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, उसके बाद से कई यूट्यूबर उनका वीडियो बनाने आ चुके हैं। सेना जब उन्हें अपने साथ ले गई, उसके बाद से यूट्यूबर नहीं आए। इससे पहले बाबा का वीडियो वायरल होने पर उनका वीडियो बनाने वालों की लाइन लग गई थी। शेखर का ये भी कहना है, आसपास के लोग पहले उनके बारे में इतना नहीं जानते थे। अधिकांश लोगों को नहीं पता था कि वे इतनी अंग्रेजी बोल लेते हैं।
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