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    17 October International Updates: आज दुनिया में क्या हुआ? किस खबर ने बढ़ाई टेंशन, कहां भड़की नई जंग

    2 hours ago

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    दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है, जहां एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के अभेद्य भूमिगत परमाणु ठिकाने 'पिकक्स माउंटेन' को दुनिया के सबसे विध्वंसक गैर-परमाणु हथियार 'मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स' (MOAB) से नेस्तनाबूद करने के संकेत देकर तीसरे विश्व युद्ध की आहट तेज कर दी है, तो दूसरी तरफ अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को धता बताते हुए ईरान द्वारा म्यांमार समेत अन्य देशों को एलपीजी और जेट ईंधन के गुप्त निर्यात का सनसनीखेज खेल बेनकाब हुआ है; इसी बीच यूरोप के आसमान में नाटो ने 17 देशों के लड़ाकू विमानों और हजारों सैनिकों के साथ शीत युद्ध के बाद का सबसे खौफनाक और विशाल परमाणु युद्धाभ्यास 'स्टेडफास्ट नून' शुरू कर दिया है, जबकि दूसरी ओर कूटनीतिक पैंतरेबाजी दिखाते हुए ट्रंप ने अमेरिका के राष्ट्रीय हित का हवाला देकर रूस पर नए कड़े प्रतिबंध लगाने वाले कानून पर फिलहाल रोक लगाकर वैश्विक राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। तो आज इन सभी खबरों को समझिए।ईरान के परमाणु ठिकानों अमेरिका का नया अल्टीमेटमट्रंप ने पिकक्स माउंटेन और एमओएबी यानी कि मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स के इस्तेमाल के संकेत दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा है कि यदि ईरान परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश जारी रखता है तो अमेरिका को उसके सबसे सुरक्षित और जमीन के नीचे ग्रेनाइट की परतों में दबे परमाणु ठिकाने पिकक्स माउंटेन पर सीधे हमला करना होगा। हालांकि ट्रंप ने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की बात से इंकार जरूर किया है। लेकिन उन्होंने इस बात से कोई इंकार नहीं किया कि अमेरिका अपनी सबसे घातक पारंपरिक हथियार जीबीयू43 बी यानी कि मदर ऑफ ऑल बोम्स का इस्तेमाल कर सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे इस टकराव में यह बयान अब तक का सबसे आक्रामक रणनीतिक संकेत है। 8 टन विस्फोटक क्षमता वाले मुआब बम का संभावित इस्तेमाल यह साबित करता है कि वाशिंगटन ईरान के अंडरग्राउंड न्यूक्लियर फैसिलिटीज को जड़ से उखाड़ने फेंकने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। इससे मध्य पूर्व में एक नए और बड़े खतरनाक सैन्य टकराव का फिर से खतरा बन रहा है।  इसे भी पढ़ें: Ukraine में Starlink एक्सेस रुकने पर बोले Donald Trump, Elon Musk जिम्मेदार नहींक्या अमेरिकी नाकेबंदी फेल हो चुकी है?ईरान के ने ओमान और म्यांमार के रास्ते एलपीजी और जेट ईंधन का गुप्त निर्यात शुरू कर दिया है। तो क्या खबर है? शिपिंग इंटेलिजेंस और मेरिटाइम सिक्योरिटी डाटा खुलासा हुआ है इन सबके जरिए कि अमेरिकी सेना की आयरन क्लॉड नौसेसिक नाकेबंदी के बावजूद ईरान ने जुलाई के बाद से ओमान के पास गुप्त रूप से जहाज से जहाज शिप टू शिप ट्रांसफर के जरिए एलपीजी और जेट इंजन के बड़े खेप बाहर भेजने में कामयाबी हासिल की है। अमेरिकी एडवोक्रेसी ग्रुप यूएएआई और सन मैक्स के मुताबिक कम से कम आठ ईरानी गैस टैंकर और एक जेट ईंधन ले जाने वाला टैंकर म्यांमार तक पहुंचने में कामयाब रहा है। तो इसका मतलब क्या होता है कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड भले ही नाकेबंदी को पूरी तरह से सफल बता रही हो लेकिन ईरान द्वारा अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को ठेंगा दिखाकर इस तरह गुप्त रूप से ऊर्जा उत्पादों का निर्यात करना दर्शाता है कि तेहरान आर्थिक तौर पर भी घुटने टेकने से लगातार बच रहा है और अमेरिका की जो नाकेबंदी है वो फेल हो रही है। यह अमेरिकी नौसेना के लिए एक बड़ा सामरिक झटका है। जो आयरन वॉल खड़ा करने की बात कही थी कि हमने खड़ा कर दिया है और ईरान का आर्थिक रूप से गला घोट देंगे वो बेकार साबित हो रही है। नाकाम साबित हो रहे हैं।यूरोप के आसमान में क्या चल रहा है? न्यूक्लियर वॉर की आहट नाटो ने अब तक का सबसे बड़ा परमाणु अभ्यास स्टेट फास्ट नून शुरू कर दिया है। 13 से 23 अक्टूबर तक 2026 अभी चल रहा है और 13 से 23 अक्टूबर के बीच यूरोप के आसमान में शीत युद्ध के बाद का सबसे बड़ा शक्ति प्रदर्शन शुरू हो गया है। इसको लेकर के पुतिन का डर भी बताया जा रहा है कि क्या पुतिन के परमाणु चुनौती के बाद अब नाटो इस कदर डर उठा है कि न्यूक्लियर वॉर की प्रैक्टिस में जुट गया है। नाटो ने इटली, जर्मनी, फ़िनलैंड, स्वीडन समेत 17 देशों के फाइटर जेट्स जिनमें F35 टोनाडो भी शामिल हैं और हजारों सैनिकों को मैदान में उतार दिया है और अपना वार्षिक परमाणु युद्धाभ्यास, स्टेट फास्ट नून आधिकारिक तौर पर शुरू कर दिया है। इस ड्रिल का मकसद अमेरिकी परमाणु हथियारों को यूरोपीय एयरबेस से उठाकर दुश्मन पर दागने की तैयारियों को परखने का है। अब इसके पीछे की बात क्या है? रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन ने बाल्टिक और कैलिनी ग्राद क्षेत्र को लेकर के जो लगातार चेतावनी जारी की है। नाटो का यह विशाल युद्धाभ्यास उसके डर का नतीजा बताया जा रहा है कि कहीं किसी भी तरह से रूसी हमले हो गए तो उससे निपटने के लिए कैसे नाटो तैयार रहे। अपने आप को तैयार करें। न्यूक्लियर प्रिपयर्डनेस के मोड में नाटो आता नजर आ रहा है। हाइब्रिड वॉर के इस दौर में यह परमाणु खेल वैश्विक तनाव को और ज्यादा भड़काता नजर आ रहा है। इसे भी पढ़ें: भारत पर 100% टैरिफ लागू होने से ठीक एक दिन पहले Donald Trump का बड़ा यू-टर्न! रूस से तेल पर लगे प्रतिबंध और शुल्क हटाएट्रम्प ने भारत पर 100% टैरिफ लगाने वाला कानून रोकाअमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाने वाले कानून को फिलहाल रोक दिया है। ट्रम्प ने शुक्रवार को इस फैसले से जुड़े आदेश पर हस्ताक्षर किए और कहा कि यह कदम अमेरिका के हित में है। इस कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता था। इन देशों में चीन, भारत, स्लोवाकिया समेत हंगरी और अजरबैजान शामिल थे। ट्रम्प ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले बिल (लिंडसे ग्राहम एक्ट) पर 18 सितंबर 2026 को साइन किए थे। 16 सितंबर को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने इसे 262-159 वोटों से मंजूरी दी थी। कानून पर साइन करने के बाद ट्रम्प को प्रतिबंध लगाने का फैसला 30 दिन के अंदर करना था। हालांकि, ट्रम्प ने इससे पहले ही प्रतिबंधों और टैरिफ पर छूट दे दी।
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