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    26 साल से बैनामा जमीन पर नहीं मिला कब्जा:समाजसेवी जज सिंह अन्ना DM से मिले, न्यायिक प्रणाली सुधारने की मांग

    2 hours ago

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    जौनपुर के कलेक्ट्रेट परिसर में गुरुवार दोपहर 12 बजे समाजसेवी जज सिंह अन्ना ने जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें न्यायिक प्रणाली में सुधार और 26 वर्षों से लंबित बैनामा जमीन पर कब्जा दिलाने की मांग की गई है। अन्ना ने त्वरित न्याय के सरकारी दावों के बावजूद लोगों के दशकों से न्यायालयों के चक्कर काटने पर चिंता व्यक्त की। इस व्यवस्थागत विफलता के खिलाफ एक जनहित याचिका भी दायर की गई है। इसमें नरेंद्र बहादुर सिंह (राजेपुर द्वितीय) का मामला एक प्रमुख उदाहरण है। वह पिछले 26 वर्षों से अपनी 14.7 एयर बैनामा जमीन पर कब्जा पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसमें 20 वर्ष दीवानी न्यायालय में और 6 वर्ष सदर तहसील में बीते हैं, लेकिन उन्हें आज तक कब्जा नहीं मिल सका है। याचिका में बताया गया है कि न्यायालय में उनकी फाइल कभी पटल पर रखी ही नहीं गई। SDM पर भी कार्रवाई की मांग जज सिंह अन्ना ने प्रशासन से स्पष्ट करने को कहा कि पहले जमीन पर कब्जा दिलाया जाए या बैनामा किया जाए। याचिका में यह भी कहा गया है कि 26 साल तक कब्जा न मिलने पर पीड़ित अक्सर जमीन दोबारा बेच देता है, जिससे सरकार को केवल स्टाम्प राजस्व मिलता है। उन्होंने मांग की कि बैनामा जमीन पर तीन महीने के भीतर कब्जा न दिलाने वाले उपजिलाधिकारी पर दंडात्मक कार्रवाई हो और कब्जा न देने वाले विक्रेता को दो वर्ष की सजा दी जाए। फाइलों पर अलग रंग के स्टीकर लगाए जाएं न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया गया है। इसके तहत मुकदमों की अवधि दर्शाने हेतु फाइलों पर हर छह महीने में अलग-अलग रंगों के स्टिकर लगाए जाएं, जिससे पुराने मुकदमों की आसानी से पहचान हो सके। ज्ञापन में अधिकारियों से उद्घाटन और भ्रमण के बजाय समयबद्ध न्याय की गारंटी देने और रजिस्ट्री कार्यालयों में व्याप्त घूसखोरी व 'गड्डी' प्रथा पर तत्काल रोक लगाने की भी मांग की गई है। याचिका में भू-माफियाओं द्वारा धोखे से दूसरों की या सरकारी जमीन बेचने, एक ही जमीन को कई अलग-अलग लोगों को बेचने, और राजस्व कर्मियों द्वारा रिश्वत के लिए दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) को कई वर्षों तक अटकाने जैसे गंभीर मुद्दों पर भी प्रकाश डाला गया है।
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