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    3.5 लाख संदिग्ध मतदाताओं को नोटिस:मैपिंग डेटा पर संदेह, बीएलओ घर जाकर जांच कर रहे

    7 hours ago

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    जिले में लगभग 3.5 लाख मतदाताओं की जांच प्रक्रिया शुरू हो गई है। इन मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं और सुनवाई भी प्रारंभ हो चुकी है। ये वे मतदाता हैं जिनकी मैपिंग एसआईआर (सिस्टेमैटिक इन्वेस्टिगेशन ऑफ रिकॉर्ड्स) के तहत की गई थी। इस कार्य के लिए अतिरिक्त सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को तैनात किया गया है। इन मतदाताओं के डेटा को संदिग्ध मानते हुए जांच के निर्देश दिए गए हैं। लगभग सभी तहसीलों में इन चिन्हित मतदाताओं को बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) के माध्यम से नोटिस जारी किए जा रहे हैं। बीएलओ संबंधित मतदाताओं के घर जाकर उनसे आवश्यक दस्तावेज इकट्‌ठा करेंगे और उन्हें मौके पर ही अपलोड करेंगे। मतदाताओं की सुविधा के लिए चुनाव आयोग ने यह नई व्यवस्था लागू की है, जिसके तहत उन्हें फिलहाल कहीं जाने की आवश्यकता नहीं होगी। पहले मतदाताओं को सुनवाई के लिए एआरओ कार्यालय जाना पड़ता था। हालांकि, जो मतदाता अपने दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पाएंगे, उन्हें एआरओ के समक्ष उपस्थित होना पड़ सकता है। एआरओ को ऐसे मतदाताओं को बुलाने का अधिकार है। यह कार्रवाई मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान का हिस्सा है। इस अभियान के तहत मतदाता बने रहने के लिए वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मैपिंग की व्यवस्था की गई थी। इसमें फॉर्म के साथ दादा-दादी, नाना-नानी और अन्य रिश्तेदारों के वोटर आईडी नंबर सहित उनका विवरण भरा गया था। जिले में कुल 3,56,627 ऐसे मतदाता चिन्हित किए गए हैं, जिनके डेटा पर संदेह है। आयोग मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए इन मामलों की गहन जांच कर रहा है। मिल्कीपुर के उप जिलाधिकारी ने बताया कि 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसीज' (तार्किक विसंगतियों) वाले मतदाताओं को चिन्हित किया गया है। ये सभी मैपिंग मतदाता हैं। इनकी जांच के लिए आयोग की ओर से कई बिंदु निर्धारित किए गए हैं। बीएलओ मतदाताओं के घर जाकर दस्तावेज एकत्र करेंगे और उन्हें अपलोड करेंगे। जो मतदाता दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पाते, उन्हें एआरओ द्वारा बुलाया जा सकता है।
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