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    आगरा में परिषदीय-विद्यालय की परीक्षा में आया पंडित का प्रश्न:संस्कृत के एग्जाम में आया पेपर, टीचर बोले- जानबूझकर ब्राह्मण समाज को अपमानित कर रहे

    4 hours ago

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    उत्तर प्रदेश पुलिस की उपनिरीक्षक परीक्षा में पूछे सवाल में पंडित शब्द से शुरू हुआ विवाद अभी थमा नहीं है कि आगरा में बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय विद्यालय की परीक्षा में भी इस तरह का प्रश्न आने से विवाद खड़ा हो गया है। बेसिक शिक्षा विभाग की कक्षा सात में संस्कृत की परीक्षा में प्रश्न एक के भाग पांच में पंडित शब्द का प्रश्न आया है। परीक्षा के बाद जब विभाग के लोग और ब्राह्मण समाज से जुडे़ शिक्षकों ने इस प्रश्नपत्र को पढ़ा तो उनमें आक्रोशित हो गए। लोग इसे ब्राह्मण समाज और विद्वानों के अपमान के रूप में देख रहे हैं। मामले में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जांच कर शासन को रिपोर्ट भेजने की बात कही है। उनका कहना है कि जो प्रश्न पूछा गया वह प्रहेलिका पाठ में पहेली ही नहीं है। जिससे स्पष्ट होता है कि यह कार्य पेपर सेटर ने जानबूझकर किया है। इस तरह प्रश्न यदि शामिल किए जाते हैं, तो वह पाठ का हिस्सा तो होते। लेकिन यह पहेली ही पाठ का हिस्सा नहीं है। ये पूछा गया प्रश्न प्रहेलिका: पाठ के आधार पर वह कौन है जो बिना पैर के दूर तक जाता है और साक्षर है लेकिन पंडित नहीं है. विकल्प: बादल, पक्षी, वायु, पत्र ये है पूरा मामला यूपी के सभी परिषदीय स्कूलों में वार्षिक परीक्षाएं चल रही हैं। मंगलवार को आगरा के परिषदीय स्कूल में कक्षा सात के छात्र संस्कृत की परीक्षा दे रहे थे। संस्कृत के प्रश्न पत्र के पांचवें नंबर पर एक प्रहेलिका (पहेली) पूछी गई थी। जिसने सबका ध्यान खींचा। पहेली में सवाल कुछ इस तरह था: “वह कौन है जो बिना पैर के दूर तक जाता है और साक्षर है लेकिन पंडित नहीं है?” जैसे ही यह पेपर सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों और विभाग के लोगों ने इसका विरोध किया। संघ का कहना है कि जानबूझकर एक खास वर्ग की भावनाओं को आहत करने के लिए ऐसे शब्दों का चुनाव किया गया है। शिक्षक संघ ने जताई आपत्ति उप्र प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश संगठन मंत्री बृजेश दीक्षित ने कहा- ये जानबूझकर किया जा रहा है। ब्राह्मण समाज को जानबूझकर अपमानित किया जा रहा है। ये बर्दाश्त नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि पाठ्यपुस्तक के संबंधित पाठ में ऐसी किसी पहेली का जिक्र ही नहीं है, जिसे विभाग ने आधार बनाया है। ऐसा कार्य करने वाले पेपर सेटर के विरुद्ध कार्यवाही होनी चाहिए। वहीं जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र कसाना का कहना है कि 'जिला स्तर पर एक कमेटी होती है, जिसमें डायट एवं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी होते हैं। जिन्हें पेपर बनाने और पेपर चेक करने की जिम्मेदारी होती है। पहेली जो पूछी गई वह पाठ का हिस्सा नहीं है, जिससे प्रतीत होता है यह जानबूझकर किया गया है। इस प्रश्न की ओर ध्यान न देकर ब्राह्मण समाज के विरुद्ध कार्य किया है। इस मामले की गहनता से जांच होना अनिवार्य है। जो भी दोषी हैं उनके खिलाफ कार्रवाई जरूर हो। जांच के दिए आदेश बीएसए जितेंद्र गौड़ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा, यह एक संवेदनशील मुद्दा है। हमने परीक्षा पेपर की जांच शुरू कर दी है और पूरी रिपोर्ट शासन को भेज रहे हैं। उचित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और कहा कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। सवाल, जिससे शुरू हुआ बवाल दरअसल, दरोगा भर्ती परीक्षा के पहले दिन शनिवार (14 मार्च) को सामान्य हिंदी के प्रश्नपत्र में पूछा गया था- अवसर के हिसाब से बदल जाने वाले को क्या कहेंगे? इसके 4 विकल्पों में पंडित, अवसरवादी, निष्कपट और सदाचारी थे। सवाल सामने आते ही विरोध शुरू हो गया। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा- यह मामला स्वीकार्य नहीं है। जांच के बाद जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। भाजपा के ब्राह्मण विधायकों ने भी विरोध जताते हुए सीएम को लेटर लिखकर कार्रवाई की मांग कर दी। अगले दिन सीएम योगी ने सभी भर्ती बोर्ड को निर्देश दिए। कहा कि जाति, धर्म को लेकर अमर्यादित टिप्पणी न की जाए। यह कतई बर्दाश्त नहीं है। बार-बार ऐसी गलती करने वालों को प्रतिबंधित किया जाए। ………………….. ये खबरें पढ़िए- दरोगा भर्ती में 'पंडित' पर बवाल, जान देने पहुंचा भगवाधारी : लखनऊ में भर्ती बोर्ड ऑफिस में घुसा, केरोसीन छिड़का; पुलिसवालों ने पकड़ा लखनऊ में पुलिस भर्ती बोर्ड मुख्यालय पर भगवाधारी युवक ने मंगलवार को सुसाइड की कोशिश की। वह अपने साथ बोतल में केरोसीन लेकर पहुंचा था। बोर्ड के मेन गेट से अंदर घुसते हुए उसने अपने ऊपर केरोसीन छिड़कना शुरू किया। वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसे तुरंत पकड़ लिया। (पूरी खबर पढ़िए)
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