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    बहरीन में फंसी BJP नेता की मॉडल बेटी वापस लौटी:ईरान-इजराइल युद्ध के बीच 15 दिन पार्किंग में बिताए, शाहजहांपुर लौटने में 12 लाख लगे

    8 hours ago

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    ईरान-इजराइल तनाव के बीच बहरीन में फंसी भाजपा नेता की बेटी और दामाद सुरक्षित भारत लौट आए। मंगलवार को दोनों अपने दो बच्चों के साथ शाहजहांपुर पहुंचे। बेटी की वापसी पर परिवार भावुक हो गया। भाजपा नेता की बेटी बहरीन में मॉडल हैं, जबकि दामाद सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। बेटी ने बताया कि शूट के दौरान उनकी लोकेशन से करीब 1 किलोमीटर दूर मिसाइल हमला हुआ। इससे इलाके में दहशत फैल गई। हालात बिगड़ते देख वह किसी तरह कार से अपने घर पहुंचीं। घर के बाहर भी एक ड्रोन नजर आया। इससे खतरे की आशंका और बढ़ गई। इसके बाद वह तुरंत परिवार के साथ सुरक्षित स्थान के लिए निकलीं। उन्हें एक सेफ बेसमेंट में ले जाया गया। वहां उन्होंने अन्य भारतीयों के साथ करीब 15 दिन तक शरण ली। दामाद ने बताया कि बहरीन से भारत लौटने में करीब 12 लाख रुपए खर्च हुए। इस दौरान भाजपा नेता ने केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद से मुलाकात कर बेटी और दामाद की सुरक्षित वापसी के लिए मदद भी मांगी थी। अब परिवार के सुरक्षित लौटने पर घर में राहत और खुशी का माहौल है। मामले को विस्तार से जानिए… भाजपा नेता संजय पाठक की बेटी प्रियंका पाठक बहरीन में अपने पति अनुज मिश्रा के साथ रहती हैं। अनुज मिश्रा एसटीसी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, जबकि प्रियंका मॉडलिंग करती हैं। इंस्टाग्राम पर उनके 82.9 हजार फॉलोअर्स हैं। प्रियंका और अनुज के दो बच्चे हैं। बेटी आव्या (4) नर्सरी में पढ़ती है, जबकि बेटा आहान (9) चौथी कक्षा का छात्र है। दोनों साल 2011 से बहरीन में ही रह रहे थे। ईरान युद्ध के दौरान प्रियंका अपने पूरे परिवार के साथ वहीं फंस गईं थीं। परिवार की सुरक्षित वापसी के लिए संजय पाठक ने केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद से मुलाकात कर मदद की मांग भी की थी। 17 मार्च को प्रियंका अपने पति और दोनों बच्चों के साथ बहरीन से सुरक्षित लौटकर शाहजहांपुर के तिलहर स्थित अपने घर पहुंचीं। प्रियंका ने कहा- 15 दिन कार पार्किंग में बिताए प्रियंका ने बताया- युद्ध शुरू होते ही हालात बेकाबू हो गए थे। वह फरवरी में मॉडलिंग शूट के लिए बाहर गईं थीं। तभी उनकी लोकेशन से करीब एक किलोमीटर दूर मिसाइल धमाका हुआ। उन्होंने तुरंत पति अनुज मिश्रा को फोन कर हमले की जानकारी दी। कहा- जहां हैं, वहीं सुरक्षित रहें। बच्चों और पति की चिंता में वह खुद कार लेकर घर के लिए निकल पड़ीं। रास्ते में कई जगह धमाके होते देखे। लोग चीख-चिल्ला रहे थे। एयरपोर्ट बंद होने के कारण पूरा परिवार बहरीन में ही फंस गया। एक दिन वह घर पर चाय बना रही थीं, तभी खिड़की के सामने एक ड्रोन दिखा। खतरा भांपते ही वह तुरंत घर से बाहर निकलीं और शोर मचाकर परिवार को भी सुरक्षित बाहर बुला लिया। करीब 24 से 36 घंटे तक वह परिवार के साथ कार में ही रहीं। उनके पास थोड़ा खाना और पानी था। इसके बाद उन्हें अन्य लोगों के साथ एक बेसमेंट में शिफ्ट किया गया। करीब 15 दिन उन्होंने कार पार्किंग में बिताए। यह जगह आर्मी एरिया के पास थी, जिससे हर समय हमले का खतरा बना रहता था। वहां कई अन्य भारतीय परिवार भी फंसे हुए थे। उनसे मिलने पर उन्हें कुछ राहत महसूस हुई। हमले रुकने पर घर जाकर खाना बनाते, फिर बेसमेंट लौटते प्रियंका ने बताया कि रमजान के महीने में सुबह और शाम कुछ समय के लिए हमले रुक जाते थे। इसी दौरान वह घर जाकर जल्दी-जल्दी खाना बनाते और तुरंत बेसमेंट में लौट आते थे। इस दौरान लिफ्ट का इस्तेमाल नहीं करते थे। डर था कि धमाकों के बीच लिफ्ट में फंस सकते हैं या बिजली चली सकती है। जब हालात थोड़ा सामान्य हुए और सड़क मार्ग सुरक्षित लगा, तो उन्हें सऊदी अरब ले जाया गया। वहां से सोमवार को वे मुंबई पहुंचे। इसके बाद मंगलवार सुबह करीब 9 बजे तिलहर स्थित अपने घर सकुशल पहुंच गए। प्रियंका ने कहा कि उनकी किस्मत अच्छी रही कि वे सऊदी से निकल आए। उनके निकलने के तुरंत बाद वहां के एयरपोर्ट पर फिर से हमला हो गया। अब सभी उड़ानें बंद हो चुकी हैं और कई भारतीय अभी भी वहां फंसे हुए हैं। परिवार को लाने में 12 लाख खर्च प्रियंका के पति अनुज मिश्रा ने बताया कि भारत आने का टिकट सामान्यतः करीब 25 हजार रुपए का होता है, लेकिन संकट के समय प्रति व्यक्ति करीब साढ़े तीन लाख रुपए चुकाने पड़े। पूरे परिवार को सुरक्षित भारत लाने में लगभग 12 लाख रुपए खर्च हो गए। गल्फ एयरवेज और इंडियन एयरवेज ने वहां फंसे लोगों को निकालने में मदद की। उनका ऑफिस भारतीय दूतावास के पास है, जहां नजदीकी एक बिल्डिंग में कई धमाके हुए थे।अनुज ने भारत सरकार से अपील की है कि खाड़ी देशों में अब भी फंसे अन्य भारतीयों को जल्द से जल्द सुरक्षित निकाला जाए। पढ़िए जंग के 19 दिनों में अब तक क्या हुआ... बता दें कि अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच पिछले 19 दिनों से युद्ध चल रहा है। जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई है। अब उनके बेटे मुजतबा खामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर बनाया गया है। इजराइली सेना के प्रवक्ता एफी डेफ्रिन ने मंगलवार को खुली चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई को भी ढूंढकर खत्म कर दिया जाएगा। इजराइल में 100 से अधिक जगहों पर दागी गईं मिसाइलें इससे पहले इजराइल ने ईरान पर एक बड़ा हमला किया था। इस हमले में ईरान के सिक्योरिटी चीफ अली लारिजानी और उनके बेटे की मौत हो गई। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी इस खबर की पुष्टि भी की है। बदले की कार्रवाई में ईरान ने इजराइल की राजधानी तेल अवीव समेत 100 से ज्यादा जगहों पर मिसाइलें दागी। ईरान का कहना है कि यह हमला लारिजानी, उनके बेटे और कमांडर घोलामरेजा सुलेमानी की मौत का बदला है। इसी बीच अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए ईरानी मिसाइल ठिकानों पर भीषण बमबारी की है। अमेरिकी सेना ने करीब 2700 किलो वजनी खतरनाक बम गिराए हैं। ये बम जमीन के गहरे अंदर बने सैन्य ठिकानों को भी पूरी तरह तबाह करने की क्षमता रखते हैं। -------------- यह खबर भी पढ़ें… इच्छामृत्यु पाने वाले हरीश की मां का दर्द:भगवान बेटे को इतना मत तड़पाना कि देख न पाऊं, अस्पताल में कर रहीं प्रार्थना ‘हे भगवान, बेटे को अब अधिक दिनों तक दर्द मत देना। इतना मत तड़पाना कि हम उसे देख भी न पाएं। 13 साल तक हम हाथ जोड़कर प्रार्थना करते रहे। मन्नतें मांगीं, लेकिन हरीश बोल नहीं सका। उसका शरीर भले ही हमसे दूर जा रहा हो, लेकिन वह हमारे अंदर ही बसा रहेगा। पूरा परिवार इस दर्द को जीवन भर नहीं भूल पाएगा।’ ये शब्द हैं सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु पाने वाले गाजियाबाद के हरीश राणा की मां निर्मला देवी के। अस्पताल में उनसे मिलकर आई पड़ोसी महिला ने नाम न छापने की शर्त पर ये बातें दैनिक भास्कर रिपोर्टर को बताईं। उन्होंने बताया कि हरीश की मां पति अशोक राणा के साथ बेटे के लिए प्रार्थना कर रही हैं। पढ़ें पूरी खबर…
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