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    आगरा विश्वविद्यालय के छात्रों से तैयार की सोलर पैनल ई-साइकिल:प्रधानमंत्री से मिली प्रेरणा,बिना बिजली और पेट्रोल के 30KM चलेगी

    8 hours ago

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    आगरा में डॉ भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के मैकेनिकल ब्रांच के 4th ईयर के दो बीटेक छात्रों ने सिर्फ 10 दिन में सोलर ई-साइकिल तैयार की है। जिसे कहीं भी, कभी भी धूप में खड़ा करके चार्ज किया जा सकता है। छात्रों ने बताया- उन्हें यह प्रेरणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डीजल-पेट्रोल बचत के विजन से मिली। इसी सोच के साथ उन्होंने इस ई-साइकिल को तैयार किया है। आगरा विश्वविद्यालय के छात्रों ने 10 दिन में बना दी सोलर पैनल ई-साइकिल पूरी तरह मेड इन इंडिया मटेरियल से तैयार इस ई-साइकिल को एक बार फुल चार्ज करने पर 30 किलोमीटर तक चलाया जा सकता है। अगर रास्ते में बैटरी डिस्चार्ज हो जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है। छात्रों ने इसमें पेडल की टेक्नोलॉजी भी जोड़ी है। पैडल मारकर इसे मैन्युअल भी चलाया जा सकता है और साथ ही बैटरी को चार्ज भी किया जा सकता है। छात्रों का कहना है कि यह साइकिल कम कीमत में आम आदमी के लिए तैयार की गई है। इसे जल्द मार्केट में भी उतारा जा सकता है। प्रधानमंत्री से मिली प्रेरणा, तो 10 दिन में बना दी सोलर ई-साइकिल छात्रों ने बताया कि खाड़ी देशों में युद्ध चल रहा है और भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोगों से अपील की है कि पेट्रोल-डीजल की बचत करनी है। हम फोर्थ ईयर मैकेनिकल के छात्र हैं। हमें प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए कहा गया था। एक दिन दोनों दोस्त बैठकर प्रधानमंत्री की बात कर रहे थे। उसी दौरान हमें यह आइडिया आया। हमने बजट को ध्यान में रखते हुए ई-साइकिल तैयार की, जिसमें बिजली की भी जरूरत नहीं है और यह धूप से चार्ज हो जाएगी। इस प्रोजेक्ट से हम देश के प्रधानमंत्री के 2047 के विकसित भारत में अपना भी योगदान देना चाहते हैं, ताकि देश को भारी पेट्रोल-डीजल के संकट से बचाया जा सके। विस्तार से पढ़े.... सोलर पैनल ई-साइकिल तैयार करने वाले छात्र अभिषेक सविता इलाहाबाद के बांदा जिले के रहने वाले हैं, वहीं उनके दोस्त विशाल जौनपुर के हैं। दोनों चौथे वर्ष मैकेनिकल के छात्र हैं और नसीरबाग, मऊ रोड पर किराए के कमरे में रहते हैं। इस साल कॉलेज की ओर से प्रोजेक्ट बनाने के लिए कहा गया था। छात्रों ने बताया, "पहले समझ नहीं आ रहा था कि क्या प्रोजेक्ट बनाएं। प्रधानमंत्री की पेट्रोल-डीजल बचाओ अपील से सोलर साइकिल का आइडिया आया। हमने सोचा कि ऐसी साइकिल बनाएं जिसमें बिजली की भी जरूरत न हो। पहले नई साइकिल खरीदी, फिर सोलर पैनल, बैटरी लेकर मॉडल तैयार किया। 10 दिन में प्रोजेक्ट पूरा कर दिया। लागत करीब 20 हजार आई। यह साइकिल ग्लोबल वॉर्मिंग और नो पॉल्यूशन का संदेश दे रही है। इसमें धूप, बारिश से बचने के लिए शेड लगाया गया है। बैटरी खत्म होने पर पैडल मारकर भी चार्ज किया जा सकता है। अभी आगे फाइबर लगाना बाकी है जिससे पतंग के मांझे से बचा जा सके। पैनल को 360 डिग्री बढ़ाने का प्लान है। अगर इसमें जितनी अच्छी बैटरी और सोलर पैनल लगाया जाएगा, उतना अच्छा ये ई-साइकिल प्रदर्शन करेगी। इसमें अभी कम वोल्टेज की बैटरी है, इसलिए ये 30 किमी तक चल रही है। जितनी अच्छी हाई बैटरी डालेंगे, उतनी ज्यादा चलेगी। मैकेनिकल डिपार्टमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर महेश दीक्षित ने बताया, "फाइनल ईयर में प्रोजेक्ट दिया जाता है। प्रधानमंत्री के पेट्रोल-डीजल बचत संदेश को देखते हुए हमने सोलर साइकिल का प्रोजेक्ट दिया था। दोनों छात्रों ने बेहतरीन डिजाइन किया है। यह धूप, इलेक्ट्रिसिटी और पैडल तीनों से चार्ज हो सकती है। प्रोफेसर राघवेंद्र ने कहा-अभी इसका वाइवा होना है। इसका डिटेल फाइल किया जाएगा। अगर अच्छा बजट मिलता है तो इसे और बेहतर डिजाइन करके मार्केट में उतार सकते हैं। यह बिजली खर्च में क्रांति ला सकती है। इसकी लागत बाजार की अन्य साइकिलों से कम है।
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