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    आप ने मोदी-ट्रंप ट्रेड डील रद्द करने की मांग की:रायबरेली में किसानों के हितों के खिलाफ बताकर देशव्यापी प्रदर्शन की घोषणा

    3 hours ago

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    आम आदमी पार्टी (आप) ने मोदी-ट्रंप ट्रेड डील को तत्काल रद्द करने की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि यह समझौता देश के किसानों और आम नागरिकों के हितों के खिलाफ है। इसी क्रम में, आप ने 14 फरवरी, 2026 को उत्तर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। विरोध प्रदर्शन के दौरान, आप कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालयों पर मोदी-ट्रंप ट्रेड डील की प्रतियां जलाईं। उन्होंने इस समझौते के खिलाफ अपना जनआक्रोश व्यक्त किया। पार्टी ने राष्ट्रपति से संविधान प्रदत्त अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए केंद्र सरकार को इस डील पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करने का निर्देश देने का आग्रह किया है। आप का कहना है कि इस ट्रेड डील के तहत अमेरिका भारतीय उत्पादों पर 18 प्रतिशत टैक्स लगाएगा, जबकि भारत अमेरिकी उत्पादों पर शून्य प्रतिशत टैक्स वसूलेगा। पार्टी ने चिंता जताई कि भारतीय कृषि बाजार अमेरिकी किसानों के लिए खोल दिया गया है, जिन्हें वहां लगभग 80 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिलती है। ऐसे में भारतीय किसान बिना किसी सब्सिडी के उनसे प्रतिस्पर्धा कैसे करेंगे, यह एक बड़ा सवाल है। आलोचकों ने यह भी बताया कि डील में कुछ चुनिंदा वस्तुओं के साथ "और अन्य उत्पाद" जैसे शब्द जोड़कर भविष्य में और अधिक क्षेत्रों को खोलने की गुंजाइश रखी गई है। इससे देश की आर्थिक और खाद्य सुरक्षा दोनों पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। पार्टी ने इस डील के किसानों, एमएसएमई, छोटे व्यापारियों, युवाओं और मध्यम वर्ग पर पड़ने वाले प्रभावों पर कोई विस्तृत श्वेत पत्र या संसदीय चर्चा न होने पर भी चिंता व्यक्त की है। आप ने मोदी सरकार पर देश के करोड़ों किसानों के हितों को अमेरिका के सामने गिरवी रखने का आरोप लगाया है। पार्टी ने इस डील की समय-संवेदनशीलता और इसके पीछे की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं। विशेष रूप से ऐसे समय में जब कुछ भारतीय उद्योग समूहों (जैसे अडानी) के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं और समन से संबंधित कार्रवाइयां चल रही हैं। राफेल सौदे के दौरान अनिल अंबानी की कंपनी को ऑफसेट पार्टनर बनाए जाने का भी उल्लेख किया गया है, जहां सरकारी नीतिगत निर्णयों से चुनिंदा कॉर्पोरेट समूहों को लाभ पहुंचाने के आरोप लगे थे। यदि यह डील भारतीय बाजार को असंतुलित तरीके से विदेशी हितों के लिए खोलती है, तो इसका सीधा दुष्परिणाम कृषि, रोजगार और स्थानीय उद्योगों पर पड़ेगा। यह केवल एक आर्थिक समझौता नहीं, बल्कि देश की आत्मनिर्भरता और कृषि संरचना पर सीधा प्रहार है। इससे छोटे किसानों की आय पर असर पड़ेगा, स्थानीय बाजार विदेशी कंपनियों के लिए खोले जाएंगे और आम जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ेगा। आप ने राष्ट्रपति से इस "देश विरोधी" डील को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने की मांग की है।
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