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    भगवान जगन्नाथ के रथ का पूरे वर्ष होगा दर्शन:हाईटेक रथशाला का 3D तस्वीर हुआ जारी,16 जुलाई को भगवान भक्तों को दर्शन

    22 hours ago

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    काशी में भगवान जगन्नाथ के भक्तों को पवित्र रथ के दर्शन के लिए केवल वार्षिक रथयात्रा मेले का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट की ओर से आधुनिक सुविधाओं से युक्त एक भव्य हाईटेक रथशाला का निर्माण कराया जा रहा है, जहां पूरे वर्ष भगवान के रथ का दर्शन किया जा सकेगा। इसके साथ ही रथ की नियमित पूजा-अर्चना, देखभाल और साफ-सफाई की भी व्यवस्था की जाएगी। रथ पर लगेंगे आठ सीसीटीवी कैमरे, बदला जाएगा हनुमत ध्वज ट्रस्ट श्री जगन्नाथ जी के सचिव शैलेष त्रिपाठी ने बताया कि वर्ष 1966 में बने करीब 18 फीट ऊंचे सागौन की लकड़ी के रथ की साफ-सफाई, रंग-रोगन और तकनीकी मरम्मत का कार्य शुरू हो चुका है। रथ पर लगा हनुमत ध्वज इस बार बदला जाएगा। इसके साथ ही पुरानी विद्युत व्यवस्था हटाकर नई लाइटें और वायरिंग लगाई जा रही है। बारिश से सुरक्षा के लिए रथ की छतरी भी दुरुस्त की जा रही है। बदहाल स्थिति में रखा गया था रथ रथयात्रा समाप्त होने के बाद भगवान का रथ नगर निगम द्वारा उपलब्ध कराए गए स्थान पर रखा जाता था। हालांकि समय के साथ वहां रखरखाव की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण रथ की स्थिति लगातार खराब होती चली गई। ट्रस्ट के सचिव शैलेश त्रिपाठी ने बताया कि पहले रथयात्रा चौराहे पर रथ रखा जाता था, लेकिन सड़क चौड़ीकरण के बाद नगर निगम ने त्रिनेत्र भवन के पास एक स्थान उपलब्ध कराया। वहां की छत पर लगी टीन जर्जर हो चुकी थी, जिससे बारिश का पानी सीधे रथ पर गिरता था। सड़क धंसने के कारण वहां पानी भर जाता था और रथ लगातार नमी की चपेट में रहता था। उन्होंने कहा कि रथ की हालत इतनी खराब हो चुकी थी कि देखकर विश्वास करना कठिन था कि यह भगवान जगन्नाथ का पवित्र रथ है। हाईटेक रथशाला में मिलेगा मंदिर जैसा स्वरूप रथ की सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट ने नई रथशाला के निर्माण का निर्णय लिया। नई रथशाला को मंदिर जैसा स्वरूप दिया जा रहा है, ताकि यह केवल रथ रखने का स्थान न होकर श्रद्धा और दर्शन का स्थायी केंद्र बन सके। ट्रस्ट के अनुसार पहले रथ की ऊंचाई लगभग 18 फीट थी, जबकि शिखर सहित इसकी कुल ऊंचाई 22 फीट हो जाती थी। नई रथशाला की डिजाइन इसी अनुसार तैयार की गई है। अब रथशाला का मुख्य प्रवेश द्वार 20 फीट ऊंचा होगा और पूरी संरचना की कुल ऊंचाई 44 फीट रखी गई है। पारदर्शी ग्लास से होंगे दर्शन नई रथशाला की सबसे बड़ी विशेषता इसका ट्रांसपेरेंट ग्लास गेट होगा। श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के बाहर से ही भगवान के रथ का दर्शन कर सकेंगे। इससे रथ सुरक्षित भी रहेगा और दर्शन की सुविधा भी लगातार उपलब्ध रहेगी। मंदिर ट्रस्ट ने रथशाला में नियमित धार्मिक व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की हैं। यहां एक पुजारी की नियुक्ति की जाएगी, जो प्रतिदिन भगवान के रथ की पूजा, सेवा और साफ-सफाई करेंगे। इससे रथ की धार्मिक गरिमा और संरक्षण दोनों सुनिश्चित होंगे। 15 जुलाई को रथ पहुंचेगा मेला स्थल 15 जुलाई की सुबह करीब पांच बजे रथ को रथयात्रा चौराहे स्थित मेला स्थल पर लाया जाएगा। उसी दिन शाम को अस्सी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर से प्रभु की डोली यात्रा पहुंचने के बाद शाम छह बजे वैदिक मंत्रोच्चार के बीच रथ का पूजन होगा।16 जुलाई की भोर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को विधि-विधान से रथ पर विराजमान कराया जाएगा। इसके बाद उनका विशेष श्रृंगार होगा और सूर्योदय के साथ श्रद्धालुओं के लिए दर्शन-पूजन प्रारंभ हो जाएगा। तीन दिवसीय रथयात्रा मेला 18 जुलाई तक चलेगा।
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