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    'बेटी की शादी थी, घर गंगा में बह गया':महिला बोली- जिंदगीभर की कमाई डूबी, ये दर्द कैसे सहें; फर्रुखाबाद बाढ़ में 31 मकान समाए

    10 hours ago

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    ‘पिछले साल गंगा नदी की कटान में मेरा घर ढह गया। कर्जा लेकर दूसरा बनवाया, वो भी नदी में समाने वाला है। मेरी बेटी की शादी होनी है, मगर कुछ बचा ही नहीं…।’ ये कहते हुए ज्ञानदेवी की आंखों में आंसू आ गए। वह आगे कुछ नहीं कह सकीं। नजदीक ही उनकी बेटी भी सुबक रही थी। ज्ञानदेवी फर्रुखाबाद से करीब 10 किमी दूर बिलावलपुर गांव में रहती हैं। उनके घर से सिर्फ 50 मीटर की दूरी पर गंगा नदी का पानी बह रहा था। जमीन के कटान की वजह से घर गिरने की कगार पर था। हालात ऐसे कि 14 दिन में दिलीप की मड़ैया गांव के 31 मकान उफनाती हुई धारा में समा गए हैं। जो 3 से 4 मकान बचे हैं, लोग उन्हें खुद ही तोड़ रहे हैं। जिससे कुछ सामान बचाकर सुरक्षित जगह लेकर जा सकें। उन्हें आशंका है कि गंगा का जलस्तर ऐसे ही बढ़ता रहा और नदी कटान करती रही, तो ये बचे हुए घर भी धारा में समा जाएंगे। इस तरह पूरे गांव का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। लोगों में गुस्सा, 7 करोड़ से बना बांध बह गया फर्रुखाबाद में गंगा में आए उफान ने बांध का एक हिस्सा ही तोड़ दिया। धारा कटान करते हुए अब 1 किमी दूर बह रही है। 48 गांव बाढ़ के पानी में घिरे हुए हैं। लोगों में गुस्सा है। वो कहते हैं- साढ़े ₹7 करोड़ से बारिश से पहले बांध बना था। गंगा नदी की धारा को कुछ महीने भी रोक नहीं सका। बाढ़ आने से सड़कें डूब चुकी हैं, आने-जाने के लिए सिर्फ नाव ही एकमात्र जरिया बचा है। 1 लाख लोग सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट किए जा चुके हैं। हालात ऐसे हैं कि जिला मुख्यालय से करीब 10 किमी दूर बिलावलपुर गांव पहुंचने के लिए 5 घंटे तक नाव में सफर करना पड़ रहा है। लोग अनाज और घर के बचे हुए सामान को सुरक्षित जगह लेकर जा रहे हैं। ज्ञानदेवी बोलीं- 2 महीने पहले घर बना, अब छोड़ना पड़ रहा ज्ञानदेवी कहती हैं- पहले हम इस जगह से एक किमी दूर गांव में रहते थे। वहां हमारे घर में 4 कमरे, बरामदा सब कुछ था। धारा ने कटान शुरू किया, तो हमारा मकान बाढ़ के पानी में समा गया। इसी साल आषाढ़ (जून) में यह दूसरा घर तैयार हुआ। तब किसी ने सोचा भी नहीं था कि गंगा नदी किनारों को काटते हुए यहां तक पहुंच जाएगी। ज्ञानदेवी खुद के ही फैसले पर अफसोस करते हुए कहती हैं- हम लोगों से गलती हो गई, जो यहां घर बनवाने लगे। कहीं और जमीन ले लेते, तो आज ये दिन नहीं देखना होता। हमने अपनी सारी जमापूंजी इसी घर में लगा दी है। अब हम बर्बाद हो चुके हैं। हंसराम बोले- बाढ़ में फसल, घर सब जा रहा है ज्ञानदेवी के पति हंसराम के शरीर पर फटी शर्ट थी। वह कभी घर की दीवारों को देखते, कभी सामान को। फिर छत पर रखी कुछ ईंटों को उतारकर नीचे लाने लगते हैं। जिससे आगे कहीं मकान बनाना पड़े, तो मदद हो सके। हंसराम कहते हैं- यहां 3-4 साल से कटान हो रहा है। कई घर बह चुके हैं। इस बार हमारे गांव में कटान रोकने के लिए बांध बना था। उसे ही देखकर हमने यहां अपना घर बनवाया। इसमें साढ़े 12 लाख रुपए लगा दिए। लेकिन, बारिश के बाद बांध भी बह गया। वो मिट्टी का था। अब ये घर भी ढहने वाला है। 10 साल पहले तक यहां बाढ़ नहीं आती थी। बाढ़ आने से साल में सिर्फ एक फसल ही हो पाती है। बेटी की शादी करनी थी, इसलिए घर बनवा रहे थे। लेकिन, अब कुछ नहीं हो पाएगा। हमने 17 गाय और बकरी भी पाल रखे थे। शालिनी बोली- अधिकारी आधे गांव से लौट जाते हैं, मदद नहीं मिलती हंसराम की 18 साल की बेटी शालिनी घर से कुछ दूरी पर चुपचाप बैठी थी। शालिनी कहती हैं- घर में शादी होनी थी, अब न जाने क्या होगा? हमने पूछा- अब आगे कहां जाओगी? शालिनी के मुंह से शब्द नहीं फूटे, वह भावुक हो गई। कुछ देर चुप रहने के बाद कहती हैं- कोई अधिकारी मदद के लिए आता नहीं, जो लोग आए भी… वे आधे गांव से लौट गए। सर्वेश बोले- जहां खड़े हैं, वहां मकान थे, अब देखिए कुछ नहीं बचा गांव के रहने वाले सर्वेश बताते हैं- मेरा घर भी कटान में ढह गया। मेरा और मेरे चाचा दोनों के मकान थे। एक घर सुबह ही गिरा है। यहां कुछ दूरी पर 2 से 3 मकान थे, अब देखिए... कुछ भी नहीं है। वो गुस्से में कहते हैं- यहां बांध बनाया गया। अधिकारी बोले कि बांध बना है, गांव की जमीन नहीं कटेगी। करोड़ों रुपए लगा दिए, वो कहां गया। इससे अच्छा हमको कहीं और जमीन दिलवाते। हम अपना मकान वहां बनवा लेते। पैसा भी चला गया... हमारा घर भी चला गया। अब हम मारे-मारे घूम रहे हैं। ‘राशन नहीं, अब कहां जाए, समझ नहीं आता’ संतोष कुमार कहते हैं- पिछले साल कटाव बहुत ज्यादा हुआ। घर छोड़िए, पूरे के पूरे गांव चले गए। आप समझिए कि 5 गांव में सिर्फ 2 से 4 घर बचे हैं। ऐसे ही कटान जारी रहा तो और लोगों का भी नुकसान तय है। गांव में बाढ़ के पानी से घिरे दूसरे घरों को छोड़कर लोग जा चुके थे। सरकार से मदद नहीं मिली। कुछ दिन पहले अधिकारी आए थे, वो राशन देकर गए। वो भी खत्म हो गया। अब कहां जाएं? ये समझ नहीं आ रहा है। 2 तस्वीरों में लोगों की परेशानी देखिए- गंगा का जलस्तर ऐसे ही बढ़ा, तो पूरा गांव डूबेगा फर्रुखाबाद में गंगा नदी डेंजर लेवल 137.05 से सिर्फ 5 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। 48 गांव टापू बन चुके हैं। आने-जाने की सड़कें डूब चुकी हैं। कनेक्टिविटी कटने की वजह से प्रशासन यहां नाव चलवा रहा है। सिंचाई विभाग के अधिकारी मानते हैं कि गंगा का जलस्तर ऐसे ही बढ़ा तो स्थिति और बिगड़ सकती है। ADM अरुण सिंह कहते हैं- सदर तहसील में आने वाले 22 गांव में बाढ़ का पानी है। सरकार की तरफ से 1.20 लाख रुपए की मदद दी जा रही है। बाढ़ पीड़ितों की लिस्ट बनाकर हमने शासन को भेजी है। राहत शिविर और पशु केंद्र बनाए गए हैं। --------------------------- यह खबर भी पढ़ें - यूपी में उफनाती नदी में स्कॉर्पियो सवार 6 लोग बहे, कूदकर बचाई जान; काशी में 100 मंदिर डूबे, सीढ़ियों पर जल रहीं चिताएं पहाड़ों पर हो रही जोरदार बारिश से यूपी में गंगा, यमुना और शारदा समेत 10 नदियां उफान पर हैं। सहारनपुर में शाहपुर गाड़ा नदी पर बना पुल डूब गया। मंगलवार शाम को पुल पर स्कॉर्पियो कार फंस गई। स्कॉर्पियो सवार 6 लोग कार सहित बहने लगे। किसी तरह कार से कूदकर लोगों अपनी जान बचाई। बाद में आसपास के लोगों ने ट्रैक्टर से कार बाहर निकाली। पढ़िए पूरी खबर…
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