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    बटुक बोले, हमें अपने गुरु पर पूरा भरोसा:काशी में शंकराचार्य के मठ में रहने वाले बटुकाें ने कहा, हमारे शंकराचार्य को फंसाने की बड़ी साजिश

    1 hour ago

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    प्रयागराज के माघ मेले से लगातार शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती सुर्खियों में हैं। इन दिनों वह काशी के अपने श्री विद्या मठ में हैं। 2 बटुकों ने उन पर यौन शोषण के आरोप लगाए तो प्रयागराज की झूंसी पुलिस ने शंकराचार्य व उनके शिष्य मुकुंदानंद महराज पर एफआईआर दर्ज कर लिया। शंकराचार्य के अधिवक्ता इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचे तो शुक्रवार को कोर्ट से उन्हें राहत मिल गई और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की बात कही गई। इसके बाद उनके मठ में खुशी का माहौल दिखा। शंकराचार्य के मठ में सैकड़ों की संख्या में बटुक धर्म और अध्यात्म की शिक्षा ले रहे हैं। दैनिक भास्कर ने यहां के कई बटुकों से बातचीत की। बटुकों ने कहा, उन्हें अपने गुरु परी पूरा भरोसा है, हमारे शंकराचार्य को फंसाने की बड़ी साजिश रची जा रही है। सभी को कोर्ट पर पूरा भरोसा है, सत्य की जीत तय है। पढ़िए, क्या कहते हैं श्री विद्या मठ के बटुक आर्यन पांडेय ने कहा, “वह वर्ष 2012 से इसी श्री विद्या मठ में शंकराचार्य जी के सानिध्य में रहते हैं। इतने दिनों में हमारे साथ यहां कभी कोई भी गलत नहीं हुआ है। गुरुजी पर लगाए गए सारे आरोप फर्जी हैं, इसकी पुष्टि भी कोर्ट से हुई है। 2019 से यहां हैं। यह अफवाह फैलाई गई महराज जी पर। यहां पर कोई दिक्कत नहीं हुई है। कोर्ट से राहत मिलने पर लग रहा है कि सत्य की जीत हुई है।” आदर्श पाठक ने कहा, “तीन सालों से हम यहां रहते हैं। जो आरोप लगाए गए हैं वह तो सोचना भी पाप हैं। इतने बड़े संत को मनगढ़त तरीके से बदनाम करने का काम कर कर रहे हैं। यह कौन सा धर्म है… आज हम सभी लोग बहुत खुश हैं जो कोर्ट से राहत मिली है।” बटुक कुश तिवारी पिछले चार सालों से यहां पर रहकर अध्ययन कर रहे हैं। वह कहते हैं “यहां पर हम सैकड़ों बटुक रहकर गुरुजी के सानिध्य में सनातन को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। यहां का वातावरण बहुत अच्छा है। महराज जी खुद आकर हम लोगों से पूछते हैं कि कोई परेशानी तो नहीं है? यह आरोप लगाकर उन्हें फंसाने का काम किया जा रहा है ताकि वह गाय माता के लिए जो मुहिम चला रहे हैं वह कहीं न कहीं प्रभावित हो।” प्रीतम पांडेय कहते हैं, “आज हमारे गुरुजी पर जो आरोप लगाए गए हैं वह पूरा देश मानने को तैयार नहीं है, क्याेंकि धर्म को मानने वाले प्रत्येक व्यक्ति को पता है कि शंकराचार्य जी कैसे हैं? हम सबको पूरा विश्वास है सच की जीत होगी और झूठ हारेगा।” सार्थक चौबे बिहार के रहने वाले हैं। वह एक साल से यहां रहते हैं। वह कहते हैं “संगम के माघ मेले में शिखा खींचकर संन्यासियों को पीटा गया। एक संन्यासी होकर दूसरे संन्यासी के साथ इस तरह का बर्ताव योगी जी कर रहे हैं यह बहुत ही गलत है, उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए।” संगम स्नान को लेकर शुरू हुआ था विवाद दरअसल, माघ मेला में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का शिविर लगा हुआ था। मौनी अमवास्या के दिन वह अपने शिष्यों के साथ संगम स्नान के लिए रवाना हुए थे। संगम नोज पर ही पुलिस प्रशासन ने उनकी पालकी रोक ली थी। कहा गया कि पालकी संगम पर नहीं जाएगी। इसके बाद विवाद बढ़ गया था। पुलिस द्वारा बटुकों की चोटी पकड़कर पीटा गया। इसके बाद बिना स्नान के ही शंकराचार्य को अपने शिविर में लौटना पड़ा। लगातार वह 14-15 दिनों तक अपने शिविर के बाहर बैठे रहे। यह मामला हाई प्रोफाइल होता गया। उसके बाद आशुतोष महराज की ओर उन पर तमाम तरह के आरोप लगाए गए। 2 बटुकों से यौन शोषण का भी आरोप लगाया गया।
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