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    चुनावी बजट से बरेली के व्यापारियों को मिली निराशा:एम्स और मेडिकल की उम्मीदें टूटीं, बीजेपी का गढ़ होने के बाद भी खाली रही झोली

    11 hours ago

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    योगी सरकार द्वारा पेश किए गए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट को जहां सरकार ऐतिहासिक बता रही है, वहीं बरेली के व्यापारिक जगत में इसे लेकर खासी नाराजगी देखी जा रही है। लखनऊ और दिल्ली के बीच स्थित महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र होने के नाते, बरेली के व्यापारियों को इस 'चुनावी बजट' से बड़ी सौगातों की उम्मीद थी, जो पूरी नहीं हो सकीं। व्यापारियों का कहना है कि बजट में महिलाओं के लिए तो खजाना खोला गया है, लेकिन शहर की बुनियादी जरूरतों को नजरअंदाज किया गया। एम्स और मेडिकल कॉलेज की मांग दरकिनार बरेली के व्यापारियों की सबसे प्रमुख मांग यहां एम्स (AIIMS) की स्थापना और एक नए सरकारी मेडिकल कॉलेज की थी। व्यापारियों के अनुसार, मंडल मुख्यालय होने के बावजूद बरेली में बेहतर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव है। इसके अलावा, शिक्षा के क्षेत्र में रूहेलखंड विश्वविद्यालय को केंद्रीय यूनिवर्सिटी बनाने और ऐतिहासिक बरेली कॉलेज को स्वतंत्र यूनिवर्सिटी घोषित करने की पुरानी मांग पर भी बजट में कोई ध्यान नहीं दिया गया, जिससे युवाओं और व्यापारियों में निराशा है। नाथ नगरी कॉरिडोर और हवाई सेवाओं पर टिकी थीं निगाहें बरेली को 'नाथ नगरी' के रूप में विकसित करने के लिए व्यापारियों को उम्मीद थी कि इस बार नाथ नगरी कॉरिडोर के लिए भारी बजट आवंटित होगा, लेकिन बजट भाषण में इसे लेकर कोई ठोस प्रावधान न होने से पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोग हताश हैं। वहीं, हवाई सेवाओं को लेकर व्यापारियों ने कहा कि बरेली से फिलहाल मुंबई और बेंगलुरु की ही उड़ानें हैं। उन्हें उम्मीद थी कि इस बजट के माध्यम से देश के अन्य बड़े शहरों के लिए भी उड़ानें शुरू करने की घोषणा होगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। भाजपा के "गढ़" में ही उपेक्षा का अहसास व्यापारियों का कहना है कि बरेली को भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता है। यहाँ से भारी जनसमर्थन मिलने के बावजूद बजट में शहर को वो स्थान नहीं मिला, जिसका वह हकदार था। व्यापारियों के मुताबिक, केवल डेयरी प्रोजेक्ट और हॉस्टल जैसी घोषणाएं बरेली की विशाल औद्योगिक और व्यापारिक संभावनाओं के लिए नाकाफी हैं। भारी-भरकम बजट के बावजूद व्यापारियों के हाथ खाली रहना शहर के आर्थिक भविष्य के लिए चिंता का विषय है।
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