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    डिप्टी सीएम से मिलने की जिद पर अड़े आयुष छात्र:लखनऊ में 7,500 से 25 हजार रुपए स्टाइपेंड करने की मांग, बोले- MBBS-BDS से भेदभाव क्यों

    4 hours ago

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    लखनऊ में 15 साल से स्टाइपेंड नहीं बढ़ने से नाराज आयुष छात्रों ने बुधवार को हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा पर प्रदर्शन किया। छात्रों ने 7,500 रुपए का स्टाइपेंड बढ़ाकर 25 हजार रुपए करने की मांग की। उनका कहना है कि MBBS और BDS इंटर्न का स्टाइपेंड बढ़ चुका है, लेकिन आयुष छात्रों को अब भी पुरानी रकम मिल रही है। छात्र डिप्टी सीएम से मुलाकात की मांग पर अड़े हैं। तेज धूप के बावजूद बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं गांधी प्रतिमा पर जुटे रहे। कई छात्र छाता लेकर तो कुछ पोस्टर और बैनर से सिर ढककर प्रदर्शन करते नजर आए। इस दौरान उन्होंने 'मेहनत हमारी पूरी है, 25 हजार मांग जरूरी है' और 'काम हमारा पूरा, स्टाइपेंड क्यों आधा-अधूरा' जैसे नारे लगाए। छात्रों का कहना है कि कॉलेज में पढ़ाई के साथ मरीजों के इलाज और अस्पताल से जुड़े कार्यों में भी वे अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें मिलने वाला स्टाइपेंड लंबे समय से जस का तस है। बढ़ती महंगाई में 7,500 रुपए प्रतिमाह में अपनी जरूरतें पूरी करना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। प्रदर्शन की 2 तस्वीरें देखिए… 'हमारे स्टाइपेंड में एक रुपए की भी बढ़ोतरी नहीं हुई' डॉक्टर पवन शुक्ला ने कहा, हम आयुर्वेद के छात्र हैं और नीट की परीक्षा पास करने के बाद इस कोर्स में दाखिला लेते हैं। साढ़े चार साल की पढ़ाई के बाद एक साल की इंटर्नशिप करनी होती है। 2011 से 2026 आ गया, लेकिन हमारे स्टाइपेंड में एक रुपए की भी बढ़ोतरी नहीं हुई। बहुत से छात्र कमरा किराए पर लेकर रहते हैं। जितना स्टाइपेंड हमें मिलता है, उसमें एक कमरा भी किराए पर नहीं मिल पाता। बाकी खर्च हम कैसे पूरा करेंगे? हमें करीब 250 रुपए प्रतिदिन मिलते हैं। इससे ज्यादा तो एक दिहाड़ी मजदूर कमा लेता है। पिछले 15 साल में महंगाई कहां से कहां पहुंच गई, लेकिन हमारा स्टाइपेंड वहीं का वहीं है। हमें जो पैसा मिल रहा है, वह बेहद अपमानजनक है। इससे अच्छा है कि सरकार हमें कुछ न दे, हम मुफ्त में सेवा करने के लिए तैयार हैं। इससे पहले एमबीबीएस इंटर्न ने प्रदर्शन किया था, जिसके बाद उनका स्टाइपेंड 12 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपए कर दिया गया। हमारा काम भी उन्हीं के बराबर है। फिर हमें यह स्टाइपेंड क्यों नहीं दिया जा रहा? जब मेहनत बराबर है तो पैसा भी बराबर क्यों नहीं? 'प्रदेश में करीब 5 हजार आयुष इंटर्न हैं' प्रदर्शन कर रहे प्रखर सिंह चौहान ने कहा, पूरे प्रदेश में करीब 5 हजार आयुष इंटर्न हैं। अभी हमें 7,500 रुपए प्रतिमाह स्टाइपेंड मिल रहा है। इसकी शुरुआत 2011 में हुई थी। उस समय भी यह रकम कम थी, लेकिन पिछले 15 साल में महंगाई कई गुना बढ़ गई है। दूध, पेट्रोल, राशन, सब्जी और फल समेत हर चीज के दाम बढ़ गए हैं। शहर में किराए पर कमरा लेकर रहने वाले एक छात्र का खर्च 20 से 25 हजार रुपए महीने तक पहुंच जाता है। हम सिर्फ इतना स्टाइपेंड मांग रहे हैं, जिससे हमें अपने खर्च के लिए घर से पैसे न लेने पड़ें। यह बहुत दुर्भाग्य की बात है कि कल हमने डिप्टी सीएम बृजेश पाठक से मुलाकात की थी। उन्होंने शाम तक कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन कोई काम नहीं हुआ। आज दूसरे दिन फिर हमें धरने पर बैठकर अपनी आवाज उठानी पड़ रही है। हमारी बात सुनने के लिए कोई तैयार नहीं है। अधिकारी मिलते नहीं हैं और मंत्री जो आश्वासन देते हैं, उस पर भी अमल नहीं होता। ऐसा लग रहा है कि सभी मिलकर हमें गुमराह कर रहे हैं।”
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