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    गन्ने का भाव 600 रुपए करने को किसानों का धरना:शामली में चीनी का रेट 60 रुपए किलो करने और पुराने भुगतान पर ब्याज की मांग

    1 hour ago

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    शामली में गन्ने का भाव 600 रुपए प्रति क्विंटल करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने सोमवार से आंदोलन शुरू कर दिया। संगठन के आह्वान पर किसान गन्ना समिति कार्यालय पहुंचकर धरना दे रहे हैं। किसानों ने चेतावनी दी है कि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन अनिश्चितकाल तक जारी रखा जाएगा। चीनी का रेट 60 रुपए किलो करने की मांग किसानों की प्रमुख मांगों में गन्ने का भाव 600 रुपए प्रति क्विंटल करने और चीनी का सरकारी रेट 60 रुपए प्रति किलो तय करना शामिल है। इसके अलावा वर्षों से लंबित गन्ना भुगतान पर ब्याज दिलाने, गन्ने की घटतौली रोकने और किसानों का पूरा कर्ज माफ करने की मांग भी उठाई गई। सोमवार और मंगलवार को किसान दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक गन्ना समिति कार्यालय पर धरने पर बैठे। 1996-97 से ब्याज का हिसाब मांगा भाकियू जिलाध्यक्ष चौ. निखिल खैवाल ने बताया कि किसानों की समस्याओं को लेकर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और जिला गन्ना अधिकारी को पहले ही पत्र भेजे जा चुके हैं, लेकिन अभी तक मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने गन्ना कानून-1966 के तहत चीनी मिलों पर बकाया पुराने ब्याज का भुगतान कराने की मांग की। किसानों ने 1996-97 से 2025-26 तक के बकाये पर देय ब्याज का हिसाब भी मांगा है। हाईकोर्ट के आदेश का दिया हवाला किसान कर्मवीर सिंह ने जिला गन्ना अधिकारी को पत्र भेजकर विलंबित गन्ना मूल्य भुगतान पर देय ब्याज का वर्षवार विवरण मांगा है। पत्र में 16 जुलाई 2026 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए पेराई सत्र 1996-97 से 2025-26 तक 15 प्रतिशत की दर से देय ब्याज का पूरा विवरण उपलब्ध कराने की मांग की गई है। कर्मवीर सिंह ने प्रत्येक पेराई सत्र के हिसाब से ब्याज की गणना कर विवरण देने और नियमानुसार किसानों को ब्याज का भुगतान कराने की मांग की है। बढ़ती लागत से किसान परेशान निखिल खैवाल ने कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और कर्ज का दबाव भी किसानों पर है। भुगतान में देरी से उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो रही है। ऐसे में सरकार को किसानों के हित में तत्काल निर्णय लेना चाहिए। किसानों ने चेतावनी दी कि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो गन्ना समिति कार्यालय पर शुरू किया गया आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
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