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    गोरखपुर की डॉक्टर को डिजिटल अरेस्ट कर 1.58 करोड़ हड़पे:ED का अफसर बनकर जालसाज बोले- मनी लांड्रिंग करती हैं...8 दिन बंधक बनी रही

    3 hours ago

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    गोरखपुर के कैंट इलाके में रहने वाली डॉ. मंजुला श्रीवास्तव (64) को डिजिटल अरेस्ट कर जालसाजों ने 1.58 करोड़ रुपये हड़प लिए। जालसाजों ने ATS और NIA, ED, का अफसर बनकर वीडियो कॉल किए। डॉक्टर से बोले- मनी लांड्रिंग में नाम आया है। इतना कहते ही डॉक्टर डर गईं। वह जालसाजों के इशारे पर काम करने लगी। इस तरह 8 दिन तक वह डिजिटल अरेस्ट रहीं। जालसाजों ने डराकर जांच के नाम पर उनसे 1.58 करोड़ रुपये अपने खाते में जमा करा लिए। जालसाजी का अहसास होने पर डॉ. मंजुला श्रीवास्तव ने साइबर क्राइम थाने में 25 फरवरी को तहरीर दी। जिसके आधार पर अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। अब विस्तार से जानें पूरा मामला कैंट इलाके के कैनाल रोड के पास डॉ. मंजुला श्रीवास्तव अपने बच्चों के साथ रहती हैं। उनके पति की मौत हो चुकी है। डाक्टर आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी पद पर कार्य कर चुकी हैं। वह वर्ष 2018 में रिटायर हुई हैं। डॉ. मंजुला ने तहरीर देकर बताया कि 13 फरवरी 2026 को एक अज्ञात व्यक्ति का व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने मुझे ATS और NIA, ED, का अफसर बताकर डिजिटल अरेस्ट करने की बात कही। यह सुनकर मैं डर गई। दूसरे कमरे में बच्चे भी थे, लेकिन उन्हें इस बारे में नहीं बताया। वीडियो कॉल सामने जो लोग दिख रहे थे, उन्होंने बकायदा वर्दी भी पहन रखी थी। दो लोग शूट टाई पहने हुए थे। एक व्यक्ति ने मुझे एक एटीएम दिखाया, जिसपर मेरा नाम लिखा था। इसके बाद कॉल करने वाले ने बोला कि केनरा बैंक आपका अकाउंट है। जिसमें आपने 50 लाख रुपये लिया है। यह सुनकर मैं डर गई। कॉल् करने वाले ने बोला कि आपके बैंक खाते की जांच की जाएगी। तब तक आपको सपोर्ट करना होगा। अगर निर्दोष रहेंगी तो कुछ नहीं होगा। मनी लॉड्रिंग होने की बाते बताकर मेरा जितना भी फंड मिला था, सब ले लिए। 13 फरवरी से 21 फरवरी तक सारी एफडी तुड़वाकर, एक करोड़ 58 लाख रुपए ट्रांसफर करा लिया। डॉक्टर ने बताया कि बैंक का कोई आदमी इस कार्य में मिला हुआ है। वो बोलता था कि एक साल के लिए जेल में बंद करेंगे तब आपको पता लगेगा। मैं अपने घर में अकेली रहती हूं बच्चे को भी बताने नहीं दे रहे थे। हर वक्त उसके निगरानी थी। मुझे ऑनलाइन कुछ भी नहीं आता न मैं फोटो खींच पाती हूं न मै किसी को भेज पाती हूं। इतने दिनों तक मेरा घर में 24 घंटे मोबाइल चार्जिंग में लगा हुआ था। कॉल करने वाले ने बोला था कि सारा पैसा लीगलाइजेशन के लिए जा रहा है। अगर आपका पैसा होगा तो आपके उसी अकाउंट में वापस आ जाएगा। घबराइए मत माताजी खाते में वापस आ जाएगा फंड मैं उसकी बातों में आ गई। 21 फरवरी को जो बची एफडी थी उसे भी तुड़वाकर 30 लाख कॉल करने वाले के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए। इस तरह करके कई बार में मुझसे पूरी रकम ली गई। इसके बाद 24 फरवरी को मुझसे बोला गया कि माताजी आपका यूनियन बैंक का फंड आएगा। आप चिंता ना करें, यह कहते हुए ईडी की 03 रसीदें भेजी हैं। सबका नंबर एक ही है। अपने ही फोन पर जिसका नंबर लास्ट डिजिट 340 और 68 है। मुझे उसी दिन शाम को बोला था कि सुबह यूनियन बैंक के सारे पैसे आ जाएंगे। सुबह भी हो गई, रकम नहीं आई। सवाल करने पर बोला गया कि आप जैसे 247 लोग हैं। हम पुणे से बोल रहे तीनों बैंक की रसीदे भी संलग्न कर रहे हैं। मैंने भी बहुत प्रश्न किया। उसने बोला आप मेरे डिपार्टमेंट पर शक कर रही है तो आप सीधे इधर ही आ जाइए। इस तरह डराकर मुझसे सारे पैसे ले लिए गए। साइबर क्राइम थाना प्रभारी मो. राशीद खान ने बताया कि तहरीर के आधार पर एफआईआर दर्ज कर जांच पड़ताल की जा रही है।
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