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    हाशमी सुरमा वालों के रिश्तेदार फर्जी GST सिंडिकेट में गिरफ्तार:नेपाल में हिंदू नाम से छिपा था फरजान, 100 करोड़ से ज्यादा के नेटवर्क का खुलासा

    8 hours ago

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    बरेली के मशहूर हाशमी सुरमा कारोबार से जुड़े परिवार के रिश्तेदार फरजान हाशमी को 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के संदिग्ध लेनदेन वाले बोगस GST सिंडिकेट में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, फर्जी फर्मों के जरिए करोड़ों रुपये की फर्जी ITC पास ऑन करने वाले इस नेटवर्क में फरजान मुख्य फर्म ऑपरेटर की भूमिका में था। GST विभाग की कार्रवाई के बाद वह गिरफ्तारी से बचने के लिए नेपाल भाग गया था। वहां उसने अपनी पहचान छिपाकर हिंदू नाम से रहना शुरू कर दिया। पुलिस का दावा है कि नेपाल में रहते हुए भी वह गिरोह के संपर्क में था। अब जीएसटी एसआईटी और कैंट पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। बरेली का सुरमा कारोबार देश ही नहीं, विदेशों तक अपनी पहचान रखता है। इसी कारोबार से जुड़े हाशमी परिवार के रिश्तेदार फरजान की गिरफ्तारी ने इस मामले को और चर्चित बना दिया है। कौन है फरजान हाशमी, क्या था उसका रोल? फरजान हाशमी पुत्र स्व. अनवर हाशमी, उम्र करीब 36 साल, बरेली के किला थाना क्षेत्र के गरईया बड़ा बाजार का रहने वाला है। एसपी क्राइम मनीष चंद्र सोनकर ने बताया कि फरजान इस सिंडिकेट में एक फर्म का स्वामी और मुख्य ऑपरेटर है। फरजान ने पूछताछ में खुद को बरेली के प्रसिद्ध हाशमी सुरमा कारोबार से जुड़े परिवार का रिश्तेदार बताया है। पुलिस के मुताबिक, फरजान के नाम और पते पर FS Traders नाम की फर्म खोली गई थी। पूछताछ में फरजान ने बताया कि विनीत अरोरा ने उसे फर्जी फर्म बनाने की सलाह दी थी और इसके बदले उसे 50 हजार रुपये दिए गए थे। इसके बाद उसके घर के पते पर FS Traders फर्म खुलवाई गई। फरजान के मुताबिक, इस फर्म को विनीत अरोरा, सद्दाम हुसैन, मोहम्मद समद उर्फ शाहरुख, अनुज अग्रवाल, सैफ और शाजिर ने तैयार कराया था। फरजान ने पुलिस को बताया कि वह बरेली और कुंडा गेट, बछराऊ स्थित फार्म हाउस पर विनीत अरोरा, अनुज अग्रवाल, मोहम्मद समद उर्फ शाहरुख, सद्दाम हुसैन, सैफ, शाजिर और आसिफ से कई बार मिला था। इसी दौरान उसे फर्जी फर्म के काम में शामिल किया गया। डीएम कंपाउंड के सामने ऑफिस से चलता था खेल फरजान के मुताबिक, विनीत अरोरा ने डीएम कंपाउंड के सामने एक बिल्डिंग में ऑफिस खोल रखा था। यहां विनीत अरोरा, अनुज अग्रवाल और फरजान बैठते थे। इसी ऑफिस से फर्जी कंपनियों के बिल काटने, बिना वास्तविक लेनदेन के बैंक खातों में पैसा घुमाने और GST क्लेम से जुड़ा काम किया जाता था। फरजान ने पूछताछ में बताया कि वह मुख्य रूप से Art Life Associate, Night Star जैसी फर्मों के फर्जी इनवॉइस तैयार करता था। वहीं, फर्जी फर्मों के दूसरे काम और रिटर्न भरने की जिम्मेदारी अनुज अग्रवाल संभालता था। मास्टरमाइंड कौन? फरजान ने सागर अग्रवाल को बताया सरदार पूछताछ में फरजान ने पूरे नेटवर्क का मुख्य सरगना सागर अग्रवाल को बताया है। पुलिस रिकॉर्ड में सागर अग्रवाल पुत्र रामअवतार, निवासी लिकर इनक्लेव कॉलोनी, कर्मचारीनगर, थाना इज्जतनगर को मास्टरमाइंड बताया गया है। फरजान के बयान के मुताबिक, सागर अग्रवाल लाभ प्राप्त करने वाली फर्मों और बोगस ITC बनाने वाली फर्जी फर्मों के बीच मुख्य कड़ी था। वही फर्जी फर्म उपलब्ध कराता था और उनसे फर्जी बिल कटवाता था। इसके बाद बड़ी कंपनियों की रकम को अलग-अलग खातों में घुमाकर फर्जी ITC का खेल किया जाता था। फरजान ने पुलिस को दिए बयान में सागर को पूरे नेटवर्क का 'सरदार' बताया है। उसके मुताबिक, सागर ही अलग-अलग कंपनियों से फर्जी इनवॉइस का काम विनीत अरोरा तक पहुंचाता था। रकम कहां जाती थी, यह भी बताया फरजान के मुताबिक, अरहम एग्रो फूड्स नाम की फर्म का इस्तेमाल रकम घुमाने के लिए किया जाता था। उसके बयान में बताया गया है कि यह फर्म आसिफ नाम के व्यक्ति की थी और इसका संचालन सैय्यद सैफ उर्फ सैय्यद मोहिउद्दीन अहमद और शाजिर करते थे। फरजान के मुताबिक, अरहम एग्रो फूड्स के बैंक खाते से आसिफ, सैफ और शाजिर चेक के जरिए रकम निकालकर विनीत अरोरा को देते थे। इसके बाद विनीत यह रकम नीम की चढ़ाई, बड़ा बाजार स्थित शिवम गुप्ता उर्फ लाला की दुकान पर ले जाता था। वहां से रकम सागर अग्रवाल तक पहुंचती थी और गिरोह के सदस्यों को उनका हिस्सा दिया जाता था। पुलिस अब इस पूरे लेनदेन की बैंकिंग हिस्ट्री और दूसरे वित्तीय दस्तावेजों की जांच कर रही है। फर्जी फर्मों की चेन से चलता था ITC का खेल फरजान के बयान के मुताबिक, लाभार्थी फर्मों और फर्जी ITC तैयार करने वाली फर्मों के बीच कई बोगस फर्मों की चेन इस्तेमाल की जाती थी। इनमें Night Star, Art Life Hooda और Art Life Associate जैसी फर्मों के नाम सामने आए हैं। लाभार्थी फर्मों में एनडी रेलवे, एमएस रोड लाइन, सोबती इन्फ्रा, सोबती इन्फ्राटेक, पावर एंड कंस्ट्रक्शन, यसी इंटरप्राइज, पैंटा स्टार, मीना गुप्ता और श्रीनाथ जी इंटरप्राइज के नाम पुलिस जांच में सामने आए हैं। इन फर्मों के बीच हुए लेनदेन, बिलिंग और ITC क्लेम की अब जांच की जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका 1. फरजान हाशमी, उम्र करीब 36 वर्ष निवासी 103 गरईया, बड़ा बाजार, थाना किला। पुलिस के मुताबिक, फर्म स्वामी और सिंडिकेट के ऑपरेटरों में शामिल। उसके नाम-पते पर FS Traders फर्म खोली गई। पूछताछ में Art Life Associate और Night Star समेत फर्मों के फर्जी इनवॉइस काटने की बात सामने आई। 2. सागर अग्रवाल पुत्र रामअवतार, निवासी लिकर इनक्लेव कॉलोनी, कर्मचारीनगर, थाना इज्जतनगर। पुलिस ने उसे मास्टरमाइंड/मुख्य सरगना बताया है। आरोप है कि वह लाभार्थी फर्मों और बोगस ITC वाली फर्जी फर्मों के बीच मुख्य कड़ी था और फर्जी फर्म उपलब्ध कराता था। 3. विनीत अरोरा पुत्र मुनेन्द कुमार, निवासी ख्वाजा कुतुब, थाना कोतवाली। पुलिस के मुताबिक, कैश सेटल करने और रकम को आगे पहुंचाने की भूमिका में था। फरजान के अनुसार, उसी ने उसे फर्जी फर्म खोलने के लिए तैयार किया था। 4. अनुज अग्रवाल पुत्र राकेश कुमार, निवासी खैरुल्ला गली, थाना कोतवाली। पुलिस के मुताबिक, फर्जी फर्मों के GST रिटर्न भरने और दूसरे तकनीकी काम की जिम्मेदारी संभालता था। 5. शिवम गुप्ता उर्फ लाला पुत्र शिवशंकर गुप्ता, निवासी नीम की चढ़ाई, बड़ा बाजार। पुलिस के मुताबिक, रकम घुमाने, उसे ठिकाने लगाने और बेनिफिशियरी फर्मों तथा सागर अग्रवाल तक रकम पहुंचाने में भूमिका थी। फरार और वांछित आरोपियों की भूमिका सैय्यद सैफ उर्फ सैय्यद मोहिउद्दीन अहमद - निवासी 538 रोहिली टोला, थाना बारादरी। पुलिस के मुताबिक, अरहम एग्रो फूड्स के संचालन से जुड़ा था। शाजिर - अरहम एग्रो फूड्स का सह-संचालक बताया गया है। आसिफ पुत्र रज्जाक - निवासी लक्ष्मी नगर, दिल्ली। पुलिस के मुताबिक, फर्जी आधार और पैन कार्ड उपलब्ध कराने का काम करता था। तौसिफ - पुलिस के अनुसार, बटलर बरेली ऑफिस के जरिए फर्जी फर्मों के क्रेडेंशियल उपलब्ध कराने में भूमिका थी। फिरोज - पुलिस के मुताबिक, फर्जी फर्म बेचने का काम करता था। फम्मी उर्फ फराज - निवासी रामपुर। पुलिस के अनुसार, फर्जी फर्म तैयार करने के काम से जुड़ा था। पुलिस के मुताबिक, इन सभी की भूमिका फरजान से पूछताछ और अब तक की जांच में सामने आई है। इनके खिलाफ साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है। ऐसे समझें फरजान से लेकर मास्टरमाइंड तक पूरा नेटवर्क फरजान हाशमी → फर्जी फर्म का स्वामी/ऑपरेटर ↓ विनीत अरोरा → फर्जी फर्मों का संचालन और कैश सेटलमेंट ↓ अनुज अग्रवाल → फर्जी फर्मों के रिटर्न और तकनीकी काम ↓ अरहम एग्रो फूड्स → रकम घुमाने के लिए इस्तेमाल बैंक खाता ↓ शिवम गुप्ता उर्फ लाला → रकम को आगे पहुंचाने/घुमाने की भूमिका ↓ सागर अग्रवाल → मास्टरमाइंड, फर्जी फर्म और लाभार्थी फर्मों के बीच मुख्य कड़ी ↓ लाभार्थी फर्में → फर्जी बिलों के आधार पर ITC का दावा पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क में फर्जी फर्में बनाकर बिना वास्तविक माल की आपूर्ति के बिल तैयार किए जाते थे। इन बिलों के जरिए बोगस ITC का दावा किया जाता था। बैंक खातों के जरिए रकम का लेनदेन दिखाया जाता और बाद में उसे निकालकर गिरोह के सदस्यों में बांटने का आरोप है। पुलिस की जांच में अब तक इस नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के लेनदेन की जानकारी सामने आई है। हालांकि, वास्तविक सरकारी राजस्व नुकसान और फर्जी ITC की कुल रकम जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। फर्जी फर्में बनाईं, बिना माल के करोड़ों के बिल काटे पुलिस के अनुसार, गिरोह ने कई ऐसी फर्में तैयार की, जिनका वास्तविक कारोबार या अस्तित्व नहीं था। इन फर्मों के नाम पर कागजों में सामान की खरीद-बिक्री दिखाई जाती थी। वास्तविक माल की आपूर्ति किए बिना दूसरी फर्मों के नाम बिल काटे जाते थे। इन्हीं बिलों के आधार पर लाभार्थी फर्में इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC का दावा करती थीं। इस पूरे खेल में फर्जी फर्में सिर्फ कागजों पर सप्लायर बनती थीं। दूसरी तरफ लाभार्थी फर्में इन फर्जी बिलों के आधार पर अपनी टैक्स देनदारी कम करती थीं। इसके बाद बैंक खातों में रकम का लेनदेन किया जाता था और बाद में नकद निकासी कर रकम को अलग-अलग लोगों के बीच बांटने का आरोप है। 100 करोड़ से ज्यादा निकालने की बात सामने आई एसपी क्राइम मनीष चंद्र सोनकर के मुताबिक, फरजान से पूछताछ और उससे जुड़ी फर्मों की जांच में अब तक 80 करोड़ रुपये से अधिक की रकम अलग-अलग खातों से निकालकर आपस में बांटने और लाभार्थी फर्मों तक पहुंचाने की बात सामने आई है। वहीं, पुलिस की अब तक की जांच में इस पूरे नेटवर्क के अलग-अलग बैंक खातों से 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के लेनदेन की जानकारी सामने आई है। पुलिस का कहना है कि अभी सभी बैंक खातों, GST रिकॉर्ड, फर्मों और दस्तावेजों की जांच चल रही है। इसके बाद ही फर्जीवाड़े की वास्तविक रकम स्पष्ट होगी। अरहम एग्रो फूड्स बना था म्यूल अकाउंट एसपी क्राइम मनीष चंद्र सोनकर ने बताया कि गिरोह ने कुछ बैंक खातों का इस्तेमाल म्यूल अकाउंट की तरह किया। इनमें अरहम एग्रो फूड्स का नाम सामने आया है। लाभार्थी फर्मों से रकम इन खातों में ट्रांसफर कराई जाती थी। इसके बाद अलग-अलग माध्यमों से रकम निकालकर गिरोह के सदस्य आपस में उसका बंटवारा करते थे। पुलिस अब इन खातों की पूरी ट्रांजेक्शन हिस्ट्री खंगाल रही है। किस फर्म से कितनी रकम आई, किस खाते में गई, किसने निकाली और आगे किसे दी गई-इन सभी कड़ियों को जोड़ा जा रहा है। फर्जी आधार-पैन से तैयार होती थीं फर्में जांच में सामने आया है कि गिरोह फर्जी आधार और पैन कार्ड के जरिए फर्में तैयार करता था। पुलिस के मुताबिक, कई मामलों में जिस व्यक्ति के नाम पर फर्म दिखाई जाती थी, उसे इसकी जानकारी तक नहीं होती थी। उसके दस्तावेज और क्रेडेंशियल्स का इस्तेमाल कर GST रजिस्ट्रेशन कराया जाता था। जांच में FS Traders, सिद्धि विनायक एंटरप्राइज, मां एंटरप्राइज, Night Star, Art Life Hooda, Art Life Associate, Arham Agro Foods और KH Enterprise समेत कई फर्मों के नाम सामने आए हैं। पुलिस के मुताबिक, इन फर्मों के बीच एक चेन तैयार की गई थी। एक फर्म से दूसरी फर्म के नाम बिल काटे जाते थे और इस तरह फर्जी कारोबार का पूरा नेटवर्क कागजों पर खड़ा किया जाता था। DM कंपाउंड के सामने था ऑफिस पूछताछ में फरजान हाशमी ने पुलिस को बताया है कि बरेली में डीएम कंपाउंड के सामने एक बिल्डिंग में ऑफिस खोला गया था। वहां वह विनीत अरोरा और अनुज अग्रवाल के साथ बैठता था। इसी जगह से फर्जी फर्मों के बिल काटने और बैंक खातों में रकम घुमाने का काम किया जाता था। फरजान के मुताबिक, उसने ART LIFE ASSOCIATE और NIGHT STAR जैसी फर्मों के फर्जी इनवॉइस काटे थे। गिरोह के दूसरे सदस्य फर्मों के रिटर्न और दूसरे तकनीकी काम संभालते थे। सागर अग्रवाल को बताया गया मुख्य सरगना पुलिस पूछताछ में सागर अग्रवाल को पूरे सिंडिकेट का मुख्य सरगना बताया गया है। पुलिस के मुताबिक, सागर लाभार्थी फर्मों और बोगस ITC बनाने वाली फर्जी फर्मों के बीच मुख्य कड़ी था। आरोप है कि सागर फर्जी फर्म उपलब्ध कराता था। इन फर्मों से फर्जी इनवॉइस कटवाए जाते थे और फिर बड़ी कंपनियों के बीच रकम घुमाकर फर्जी ITC का लाभ लिया जाता था। जांच में विनीत अरोरा, अनुज अग्रवाल और शिवम गुप्ता उर्फ लाला की भूमिका भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, विनीत रकम को सेटल करने, अनुज फर्जी फर्मों के रिटर्न भरने और शिवम रकम को घुमाने तथा आगे पहुंचाने के काम से जुड़ा था। नेपाल में बना 'संदीप', कपड़ों की फेरी का बताया काम फरजान हाशमी ने पुलिस के सामने दिए बयान में स्वीकार किया कि मामले की जानकारी होने के बाद वह नेपाल चला गया था। उसका कहना है कि वहां उसने अपनी पहचान छिपाकर रहना शुरू किया। पुलिस के अनुसार, फरजान नेपाल में 'संदीप' नाम से रह रहा था। फरजान ने अपने बयान में बताया कि वहां वह कपड़ों आदि की छोटी-मोटी फेरी लगाकर अपना खर्च चला रहा था। हालांकि, पुलिस जांच में उसके गिरोह के लोगों से संपर्क में रहने की बात सामने आई है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि नेपाल में रहने के दौरान वह फर्जी GST इनवॉइस और गिरोह की गतिविधियों में किस हद तक शामिल रहा। फरजान बोला- मुझे सिर्फ 20-22 हजार रुपये मिले पुलिस की गिरफ्त में आए फरजान हाशमी ने मीडिया के सामने दिए बयान में कहा कि इस फर्जीवाड़े में कई लोग शामिल थे और उसकी भी इसमें कुछ भूमिका थी। उसने बताया कि मामले का पता चलने के बाद वह नेपाल भाग गया था। फरजान ने फर्जीवाड़े की रकम के बारे में करीब 79 लाख रुपये की बात कही और कहा कि उसे इस काम के बदले सिर्फ 20 से 22 हजार रुपये मिले थे। हालांकि, पुलिस की जांच में सामने आया है कि पूरे नेटवर्क में 80 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम निकालने और बांटने की बात सामने आ चुकी है, जबकि अलग-अलग बैंक खातों के जरिए 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के लेनदेन की जांच की जा रही है। पांच आरोपी जेल भेजे जाने की बात एसपी क्राइम मनीष चंद्र सोनकर के मुताबिक, इस मामले में पहले दो आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है। अब फरजान हाशमी समेत अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद कुल पांच आरोपियों को जेल भेजे जाने की बात पुलिस ने कही है। पुलिस का कहना है कि फर्जी फर्मों के दस्तावेज, बैंक खातों, GST रिटर्न, इनवॉइस और डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी है। गिरोह के फरार सदस्यों की तलाश की जा रही है। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क से कितनी लाभार्थी फर्में जुड़ी थीं और सरकार को वास्तविक राजस्व नुकसान कितना हुआ। लैपटॉप और छह मोबाइल बरामद गिरफ्तार फरजान के पास से एक लैपटॉप, उसका चार्जर, माउस और छह मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पुलिस इन उपकरणों से मिले डेटा, चैट और दस्तावेजों की जांच कर रही है। इससे फर्जी फर्मों के संचालन, इनवॉइस तैयार करने और रकम के लेनदेन की नई कड़ियां सामने आने की उम्मीद है। इस पूरी कार्रवाई का नेतृत्व जीएसटी एसआईटी बरेली के मुख्य विवेचक और कैंट थाना प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार धीर ने किया। टीम में निरीक्षक अपराध भारत सिंह, उपनिरीक्षक वीर भद्र सिंह, इंतजार हुसैन, प्रतीक तोमर, त्रिवेंद्र कुमार समेत पुलिसकर्मी शामिल रहे।
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