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    हैदराबाद यूनिवर्सिटी विवाद पर CJI बोले-यह छात्रों और मेरा मामला:बार काउंसिल दखल देने वाला कौन; जस्टिस सूर्यकांत के विरोध पर एनरोलमेंट रोकने कहा था

    3 hours ago

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    सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को हैदराबाद की लॉ यूनिवर्सिटी, NALSAR से जुड़े विवाद को लेकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया को फटकार लगाई। CJI सूर्यकांत ने कहा कि यह छात्रों और मेरे बीच की बातचीत है, BCI इसमें दखल देने वाला कौन होता है? CJI सूर्यकांत ने बार काउंसिल के उस सर्कुलर पर भी नाराजगी जताई जिसमें NALSAR के 2026 बैच के लॉ ग्रेजुएट्स का वकील के तौर पर एनरोलमेंट रोकने को कहा गया था। CJI ने कहा- यह बिल्कुल बेवजह था। इसे मुद्दा बनाने की जरूरत नहीं थी। उन्होंने कहा- भले ही छात्रों का फैसला गलत हो या उन्हें किसी ने गलत सलाह दी हो, फिर भी उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और विरोध करने का अधिकार है। कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस जारी किया और यूनिवर्सिटी के किसी छात्रों या फैकल्टी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया। छात्रों ने दीक्षांत में CJI को चीफ गेस्ट बनाने का विरोध किया था NALSAR यानी नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च, हैदराबाद की लॉ यूनिवर्सिटी है। यहां करीब 1,400 छात्र पढ़ते हैं। इनमें से करीब 450 छात्रों ने 2026 के दीक्षांत समारोह में CJI जस्टिस सूर्यकांत को चीफ गेस्ट बनाए जाने का विरोध किया था। छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को पत्र लिखकर CJI का न्योता वापस लेने की मांग की थी। हालांकि, यूनिवर्सिटी ने पुष्टि की थी कि जस्टिस सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह के लिए चीफ गेस्ट के तौर पर आमंत्रित किया गया है। समारोह की तारीख अभी तय नहीं हुई थी और यूनिवर्सिटी उनके जवाब का इंतजार कर रही थी। छात्रों की नाराजगी पिछले महीने CJI की एक टिप्पणी को लेकर थी। यह टिप्पणी दिल्ली में NEET प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिका की सुनवाई के दौरान की गई थी। बार काउंसिल ने सभी 2026 ग्रेजुएट्स का एनरोलमेंट रोक दिया था कुछ घंटे बाद ही BCI ने आदेश बदला आदेश जारी होने के कुछ घंटे बाद BCI ने अपना रुख बदल दिया। काउंसिल ने कहा कि NALSAR के 2026 बैच के ज्यादातर छात्र निर्दोष हैं और वे CJI के अनादर वाले किसी अभियान में शामिल होने के इच्छुक नहीं थे। BCI ने कहा कि कुछ शिक्षकों और बाहरी लोगों ने निर्दोष छात्रों को इस अभियान में शामिल करने की कोशिश की। इसके बाद सभी छात्रों को अपनी पसंद की स्टेट बार काउंसिल में एनरोल होने की अनुमति दे दी गई। हालांकि उस समय BCI ने कहा था कि वह NALSAR के वाइस चांसलर की रिपोर्ट का इंतजार करेगी और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने भी BCI के एक्शन पर सवाल उठाए बार काउंसिल ऑफ इंडिया के शुरुआती आदेश पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष और सीनियर वकील विकास सिंह ने भी आपत्ति जताई थी। उन्होंने इसे मनमाना, गैरकानूनी और जरूरत से ज्यादा कार्रवाई बताते हुए कहा था कि छात्रों को अपनी बात रखने के कारण वकालत में प्रवेश से वंचित करने की धमकी नहीं दी जानी चाहिए। CJI सूर्यकांत के हाल की 3 बयान, जिसपर विवाद हुए 15 मई: CJI ने कहा था- कुछ युवा कॉकरोच की तरह भटक रहे सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान युवाओं पर टिप्पणी की थी। CJI सूर्यकांत ने कहा था- कॉकरोच की तरह ऐसे युवा हैं, जिन्हें इस पेशे में रोजगार नहीं मिल रहा है। इनमें से कुछ मीडिया, कुछ सोशल मीडिया और कुछ RTI और दूसरे तरह के एक्टिविस्ट बन रहे हैं। ये हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं।’ इस बयान के बाद ही 16 जुलाई को अभिजीत दीपके नाम के शख्स ने कॉकरोच जनता पार्टी नाम से सोशल मीडिया पेज बनाया। इसने ही दिल्ली जंतर-मंतर पर 35 दिन तक प्रदर्शन किया था। 22 जुलाई: CJI ने कहा था- हमें वीडियो देखने में दिलचस्पी नहीं है दरअसल, 22 जुलाई को एक वकील ने CJI की अगुआई वाली 3 जजों की बेंच के सामने जनहित याचिका लगाई थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता वकील ने कहा- छात्र महत्वपूर्ण मुद्दे उठा रहे हैं। लेकिन उन पर पुलिस की बर्बरता के वीडियो भी हैं। यदि संभव हो तो मामले की सुनवाई जल्द की जाए। इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा था, 'हमें वीडियो में दिलचस्पी नहीं है, हमारे पास देखने का समय नहीं है।' जब वकील ने छात्रों के साथ मारपीट के वीडियो देखने का दूसरी बार अनुरोध किया तो CJI ने कहा, ‘हमारा और अपना समय बर्बाद मत कीजिए।’ पढ़ें पूरी खबर… 24 जुलाई: CJI ने कहा था- किसी भी याचिका की सुनवाई से इनकार नहीं किया प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की हिंसा से जुड़ी 2 याचिकाएं दायर की गई हैं। इनमें कई राज्य पक्षकार के तौर पर शामिल हैं। इनका जिक्र पहले इसलिए नहीं किया गया क्योंकि वे डायरी नंबर का इंतजार कर रहे थे। इन दलीलों के बाद CJI ने कहा, "इसे लिस्टिंग में आने दें, हम इस पर सुनवाई करेंगे।" इससे पहले एक दूसरे मामले की सुनवाई के दौरान CJI ने कहा था- मैंने CJP के प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज से जुड़ी किसी भी याचिका की सुनवाई से इनकार नहीं किया। सच ये है कि कोई रिट याचिका दाखिल ही नहीं की गई थी। मीडिया ने भी गलत खबरें चलाईं। पढ़ें पूरी खबर…
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