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    ईरान–इजराइल तनाव की आंच फिरोजाबाद तक:गैस कोटे में कटौती से कांच-चूड़ी उद्योग पर संकट के बादल

    1 hour ago

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    पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब फिरोजाबाद के कांच और चूड़ी उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय गैस आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हुई है। गैस आपूर्ति करने वाली कंपनी गेल इंडिया ने उद्यमियों को ईमेल भेजकर बताया है कि कतर से आने वाली आरएलएनजी गैस के कोटे में करीब तीन लाख घनमीटर तक कटौती कर दी गई है। इससे शहर के प्रमुख कांच उद्योग में उत्पादन लागत बढ़ने और इकाइयों के संचालन पर संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है। इंडस्ट्रियल स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटी फिरोजाबाद के अध्यक्ष बिन्नी मित्तल के अनुसार, गैस आपूर्ति करने वाली कंपनी गेल इंडिया ने उद्यमियों को ईमेल के माध्यम से जानकारी दी है कि कतर से मिलने वाली आरएलएनजी गैस के कोटे में कटौती की गई है। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण अब गैस की आपूर्ति का मार्ग बदलकर चीन के रास्ते से किया जा रहा है। इस मार्ग परिवर्तन के चलते गैस आपूर्ति पर करीब 10 प्रतिशत अतिरिक्त कर लगाया गया है, जिससे गैस की कीमतों में बढ़ोतरी होना तय माना जा रहा है। पूरी तरह गैस पर निर्भर है फिरोजाबाद का कांच उद्योग फिरोजाबाद का कांच और चूड़ी उद्योग पूरी तरह प्राकृतिक गैस पर आधारित है। यह क्षेत्र ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) के अंतर्गत आता है, इसलिए यहां कोयला या लकड़ी जैसे पारंपरिक ईंधन के इस्तेमाल की अनुमति नहीं है। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद वर्ष 1996 से यहां के उद्योगों को प्राकृतिक गैस उपलब्ध कराई जा रही है। वर्तमान में शहर में करीब 120 चूड़ी कारखाने और 80 कांच इकाइयां संचालित हैं। इन सभी इकाइयों में प्रतिदिन लगभग 15 लाख घनमीटर गैस की खपत होती है। अब महंगी स्पॉट गैस का सहारा उद्योगों को अब तक एपीएम और आरएलएनजी गैस को मिलाकर यूनिफॉर्म प्राइस मैकेनिज्म (यूपीएम) के तहत गैस मिलती रही है। इसमें करीब 11 लाख घनमीटर एपीएम गैस और लगभग चार लाख घनमीटर आरएलएनजी गैस की आपूर्ति होती है। वर्तमान में एपीएम गैस की कीमत करीब 29 रुपये प्रति घनमीटर और यूपीएम गैस लगभग 35 रुपये प्रति घनमीटर है। लेकिन गैस कोटे में कटौती के बाद उद्यमियों को स्पॉट आरएलएनजी गैस खरीदनी पड़ सकती है, जिसकी कीमत 95 से 100 रुपये प्रति घनमीटर तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। इससे उत्पादन लागत में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। आपूर्ति सामान्य न हुई तो संकट गहराएगा उद्योगपतियों का कहना है कि गैस महंगी होने से कांच और चूड़ी उद्योग के संचालन पर सीधा असर पड़ेगा। कई उद्यमियों ने आशंका जताई है कि यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो कुछ इकाइयों को बंद करना पड़ सकता है। उद्योगपति हिमांशु पाराशर के अनुसार आरएलएनजी गैस की आपूर्ति बाधित होने से अब उद्योगों को स्पॉट गैस खरीदनी पड़ेगी, जो काफी महंगी है। वहीं गेल गैस लिमिटेड फिरोजाबाद के डीजीएम एवं स्टेशन इंचार्ज मनमोहन ने बताया कि उच्च अधिकारियों से मिले निर्देशों के अनुसार आरएलएनजी गैस कोटे में कटौती की जानकारी ईमेल के माध्यम से दी गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जल्द युद्ध विराम हो जाता है तो अगले आठ से दस दिनों में गैस आपूर्ति सामान्य हो सकती है। इस बीच उद्योग जगत की निगाहें अंतरराष्ट्रीय हालात पर टिकी हैं, क्योंकि इसका सीधा असर फिरोजाबाद के हजारों कामगारों और उद्योगों के भविष्य पर पड़ सकता है।
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