Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    ‘जब अपनों ने ठुकराया, चचेरी सास ने सहारा दिया’:मथुरा में सिर पर बैठाकर 350 किमी की परिक्रमा करा रही बहू, बोली- ये मेरा फर्ज

    11 hours ago

    1

    0

    ‘जब मेरे अपनों ने मुझे त्याग दिया, तब मेरी चचेरी सास ने सहारा दिया। पति की मौत के बाद बच्चों के पालन-पोषण में मदद की। जिस चचेरी मां ने मुझे सब कुछ सौंप दिया, उस मां रूपी सास को अगर 84 कोस परिक्रमा करा रही हूं तो कौन-सा बड़ा काम कर रही हूं।’ ये बातें दैनिक भास्कर से बातचीत में उस बहू ने कहीं, जो 95 साल की चचेरी सास को सिर पर बैठाकर 84 कोस (करीब 350 किमी) की पैदल ब्रज परिक्रमा करा रही हैं। 38 साल की काजल चौधरी के पति की मौत हो चुकी है। मथुरा के कोसी इलाके के हताना गांव की रहने वाली हैं। काजल हरियाणा के पलवल जिले के बनचारी गांव स्थित बलदाऊ जी के मंदिर से 31 मई को टब में बैठी सास को सिर पर रखकर निकल पड़ी हैं। बहू की सास के प्रति इस सेवा भाव को देखकर लोग उनकी तारीफ कर रहे हैं। वहीं, परिक्रमा पथ में जगह-जगह स्वागत किया जा रहा है। पहले काजल चौधरी के बारे में जानिए… शादी के 7 साल बाद हुई पति की मौत तुमौला गांव की रहने वाली काजल चौधरी की शादी उनके परिवार ने 13 साल की उम्र में ही राजू से कर दी थी। राजू चौधरी की 18 साल पहले एक सड़क हादसे में मौत हो गई थी। वह सिर्फ 7 साल सुहागन रहीं। 20 साल की उम्र में विधवा हो गई थीं। काजल बताती हैं- पति की मौत के 5 महीने बाद ससुराल वालों ने मेरे ऊपर जुल्म ढाना शुरू कर दिया। फिर एक दिन पीटकर 3 बच्चों के साथ घर से निकाल दिया था। बेघर हुई काजल को चचेरी सास चंद्रे ने सहारा दिया और अपने पास रख लिया। माता-पिता और पति को खो चुकीं काजल के दुख भरे दिनों में चचेरी सास सहारा बनीं, तो काजल ने उनको मां मान लिया। चचेरी सास की सिर्फ एक बेटी है, जिसकी शादी हो चुकी है। ऐसे में काजल ने अपनी चचेरी सास की सेवा में कोई कमी नहीं छोड़ी। काजल ने बताया- पहले मैं और बच्चे अम्मा के दर्शन करते हैं। कुछ खिलाना होता है तो अम्मा को पहले खिलाते हैं, फिर भगवान की पूजा करते हैं। उन्हें भोग लगाते हैं। मैंने ठान लिया है कि सबसे पहले मेरी मां की पूजा होगी, फिर भगवान की होगी। सबसे पहले भोजन मेरी मां करेंगी, फिर भगवान करेंगे। काजल ने घरों में काम किया, बच्चों को पाला काजल ने बताया- पति के निधन के बाद बहुत दुख उठाए। ननदोई मेरे ऊपर गंदी नजर रखता था, मैंने खुद अपनी लड़ाई लड़ी। सबसे बड़ा बेटा भगत (23), फिर बेटी आरती (21) और सबसे छोटा बेटा मनीष (19) हैं। बच्चों का पालन-पोषण करने के लिए घरों में काम किया, मेहनत मजदूरी की। इस दौरान जब कुछ गुनगुनाती, तो लोग कहते- जागरण और रागिनी में क्यों नहीं गाती हो? 13 साल पहले हरियाणा के पलवल जिले के एक गांव में जागरण में भजन गाए, तो लोग तारीफ करने लगे। इसके बाद रागिनी और जागरण में गाने लगी। गायन से परिवार का पालन करने में बहुत सहायता मिली। अब बच्चे बड़े हो गए, तो वह भी काम करने लगे। इससे बेपटरी हो चुका परिवार अब पटरी पर लौटने लगा है। अब पढ़िए ब्रज कोसी परिक्रमा की कहानी… काजल बोलीं- अम्मा ने कहा कि परिक्रमा करनी है, बस निकल पड़े काजल ने बताया- अधिक मास में सभी ब्रज की 84 कोस की परिक्रमा दे रहे थे। मन में आया मैं भी परिक्रमा दे आऊं। अम्मा ने कहा, उनकी भी इच्छा है परिक्रमा करने की। अम्मा करीब 95 साल की हैं। मैं सोच में पड़ गई। यह सोच ही रही थी कि बाथरूम में रखा टब दिखाई दिया। यहीं से अम्मा को टब में बैठाकर सिर पर रखकर परिक्रमा करने का विचार आया। फिर क्या, रविवार को अम्मा को साथ लिया और टब लेकर पहुंच गईं हरियाणा के बनचारी गांव में बलदाऊ जी के मंदिर। यहां भगवान को प्रणाम किया। सास को टब में बैठाया और सिर पर रखकर शुरू कर दी- ब्रज 84 कोस की परिक्रमा। काजल बोलीं- रोज 45 किमी चलती हूं काजल ने बताया- 31 मई की दोपहर करीब ढाई बजे परिक्रमा शुरू की। एक दिन में करीब 45 किलोमीटर चलती हूं। यात्रा सुबह 5 बजे शुरू करती हूं। दोपहर 12 बजे तक चलती हूं। इसके बाद जहां जगह मिल जाती है, वहीं आराम कर लेते हैं। शाम 4 बजे से रात 11 बजे तक फिर परिक्रमा देती हूं। करीब 350 किलोमीटर की यह परिक्रमा है। कितने दिन में पूरी होगी, यह पता नहीं। मैं तो राधारानी का नाम लेकर बस आगे बढ़ती जा रही हूं। धूप तेज होती है तो अम्मा टब में बैठे-बैठे छाता लगा लेती हैं। उन्होंने कहा- जितने भी यहां तीर्थस्थल हैं, चाहे मुझे 8-10 दिन लग जाएं, लेकिन मैं हर तीर्थस्थल पर अपनी सास को लेकर जाऊंगी। मुझे चाहे जो कुर्बानी देनी पड़ जाए। एक साल पहले हरिद्वार से लाई थीं कांवड़ काजल ने बताया- साल- 2025 में अम्मा को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से लाई थी। वह यात्रा 4 दिन में पूरी हुई थी। अब परिक्रमा के दौरान लोगों का बहुत सम्मान मिल रहा है। पहले ये नहीं पता था कि इस कदर सम्मान मिलेगा। मैं तो केवल अम्मा को परिक्रमा दिलाने निकली थी। लेकिन, आज इस कदर वायरल हो गई है कि हर कोई वीडियो बना रहा है। ---------------------------- ये खबर भी पढ़िए- 4 लाश के साथ 12 घंटे रहा हत्यारोपी दोस्त, रातभर सबूत मिटाए, शवों को रजाई ओढ़ाई; बेटे ने बाप के सिर की 10 हडि्डयां तोड़ी थीं प्रयागराज में करोड़पति कारोबारी परिवार के 4 लोगों की हत्या में शामिल सनी गुप्ता 12 घंटे लाशों के साथ रहा। रातभर उसने हर निशान मिटाने की कोशिश की। फर्श पर फैला खून साफ किया। शवों के चेहरों पर टॉयलेट क्लीनर डाला। फिर लाशों को रजाई-गद्दे ओढ़ा दिए, जिससे बदबू बाहर न आए। हत्याकांड के बाद वह घर जाकर आराम से सो गया। पुलिस ने 150 CCTV कैमरों की फुटेज देखीं और सनी को पकड़ लिया। पढ़ें पूरी खबर…
    Click here to Read more
    Prev Article
    REEL वाली दरोगा मैडम को इनाम मिला:UP कांग्रेस में तनुज पूनिया ने मचाई खलबली; तूफानी हुई अखिलेश की साइकिल
    Next Article
    हरियाणवी डांसर ने स्टेज पर युवक को थप्पड़ जड़ा,VIDEO:कमर पर छूने से भड़कीं, बोलीं- परफॉर्मेंस चल रही, इसका मतलब ये नहीं कि हाथ लगाओगे

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment