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    जौनपुर में जलभराव से बढ़ा संक्रमण का खतरा:स्वास्थ्य विभाग ने बढ़ाई निगरानी, डायरिया-टाइफाइड जैसी बीमारियों की आशंका

    6 hours ago

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    जौनपुर में बारिश के कारण हुए जलभराव से संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। इस संभावित खतरे से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अपनी निगरानी बढ़ा दी है। डॉक्टरों के मुताबिक, बारिश के मौसम में पानी से होने वाली बीमारियां जैसे डायरिया, उल्टी, टाइफाइड और पीलिया का खतरा बढ़ जाता है। केराकत तहसील के उदयचंदपुर, सिहौली, गोबरा, सरोज बड़ेवर और चंदवक क्षेत्र के बलुआ, बरमलपुर समेत दो दर्जन से ज्यादा गांवों में गोमती नदी का जल स्तर काफी बढ़ गया है। इससे गांवों में संक्रमण फैलने और पशुओं में बीमारी होने की आशंका से लोग परेशान हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश में पानी की पाइपलाइन में सीवर का पानी मिलने या गंदे पानी के इस्तेमाल से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। खुले में बिकने वाले खाने-पीने का सामान और लंबे समय से रखा भोजन भी इसका कारण बन सकता है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. गंगा राम ने बताया कि विभाग की बाढ़ प्रभावित इलाकों पर नजर है। रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) के साथ-साथ पीएचसी और सीएचसी पर डॉक्टरों को अलर्ट किया गया है। किसी भी तरह की परेशानी होने पर मरीजों के इलाज की व्यवस्था की जाएगी और पर्याप्त दवाएं भी उपलब्ध हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, मानसून के दौरान गंदे पानी से हैजा, टाइफाइड, हेपेटाइटिस-ए और हेपेटाइटिस-ई जैसी बीमारियां हो सकती हैं। इसके लक्षणों में दस्त, उल्टी, पेट दर्द, बुखार और डिहाइड्रेशन शामिल हैं। बच्चों में दस्त होने पर डिहाइड्रेशन का खतरा ज्यादा रहता है। डॉक्टरों का कहना है कि दस्त या उल्टी होने पर शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट की कमी नहीं होने देनी चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या दस्त रोकने वाली दवा नहीं लेनी चाहिए। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राम नगीना ने बचाव के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि पीने के लिए उबला हुआ या सुरक्षित फिल्टर किया हुआ पानी इस्तेमाल करें। खाना खाने और शौचालय के बाद साबुन से हाथ धोएं। कटे फल और खुले में रखे खाने-पीने के सामान से बचें। जलभराव वाले इलाकों में गंदे पानी के इस्तेमाल से बचें। दस्त होने पर ओआरएस का घोल दें और डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखने पर तुरंत इलाज कराएं।
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