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    कलेक्ट्रेट मस्जिद के मुतवल्ली बोले-आदेश में ध्वस्तीकरण का जिक्र नहीं:सहारनपुर में कहा- किसके कहने पर बुलडोजर चला; 500 वकील लड़ाई लड़ेंगे

    9 hours ago

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    सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को गिराए जाने के करीब पांच दिन बाद उसके मुतवल्ली तनवीर अहमद सामने आए हैं। उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि जिला जज की ओर से दिए गए आदेश में कहीं भी मस्जिद के ध्वस्तीकरण का जिक्र नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आदेश में मस्जिद गिराने की बात नहीं थी तो किसके आदेश पर बुलडोजर चलाया गया। तनवीर अहमद ने कहा कि अब इस मामले में मुस्लिम समाज और वकीलों का बड़ा पैनल कानूनी लड़ाई आगे बढ़ाएगा। करीब 500 वकीलों की सलाह के बाद तय कानूनी लड़ाई का खाका तैयार किया जाएगा। मुतवल्ली ने यह भी दावा किया कि मस्जिद वक्फ बोर्ड में दर्ज थी और मुकदमे में वक्फ बोर्ड की भूमिका को नजरअंदाज किया गया। 'मुकदमा मस्जिद पर नहीं, मुतवल्ली के नाम से चलाया गया' मुतवल्ली तनवीर अहमद ने सबसे बड़ा सवाल मुकदमे की प्रकृति को लेकर उठाया। उनका कहना है कि इस पूरे मस्जिद प्रकरण में मुकदमा उनके खिलाफ चल रहा है, जबकि उनके अनुसार मस्जिद के मुतवल्ली का काम मस्जिद का हिसाब-किताब देखना होता है। उन्होंने दावा किया कि मस्जिद वक्फ बोर्ड में दर्ज थी और ऐसे में वक्फ बोर्ड को मामले में पक्षकार बनाया जाना चाहिए था। उनका कहना है कि मुकदमे में वक्फ बोर्ड की भूमिका को भी देखा जाना चाहिए, क्योंकि वक्फ बोर्ड ही वक्फ संपत्तियों के संबंध में सर्वे और अन्य प्रक्रियाएं देखता है। तनवीर अहमद ने कहा कि अधिकारियों ने मुतवल्ली के खिलाफ मुकदमा चला दिया, जबकि उनके अनुसार कार्रवाई मस्जिद से संबंधित विवाद के आधार पर होनी चाहिए थी। 'न बैंक खाते में नाम, न वक्फ रिकॉर्ड में' तनवीर अहमद ने अपने मुतवल्ली बनने की प्रक्रिया को लेकर कहा कि जब वे लोग मस्जिद में नमाज पढ़ने जाते थे, तभी उनसे कहा गया कि वे मस्जिद का हिसाब-किताब देख लें। इसके बाद उन्होंने मस्जिद का हिसाब-किताब देखना शुरू किया और बाद में उन्हें मुतवल्ली का पद दे दिया गया। उनका कहना है कि मुकदमे उनके नाम से चल रहे हैं, लेकिन न तो बैंक में उनके नाम से कोई खाता है और न ही वक्फ के रिकॉर्ड में उनका नाम दर्ज है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में उनके खिलाफ मुतवल्ली के तौर पर मुकदमा किस आधार पर चलाया गया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के मुतवल्ली होने की प्रक्रिया के लिए संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेज भी देखे जाने चाहिए थे। 'मस्जिद रजिस्टर्ड थी, पुराने मुतवल्ली ने पोस्ट ऑफिस से एग्रीमेंट किया था' तनवीर अहमद ने कहा कि यह मस्जिद रजिस्टर्ड थी। उनके मुताबिक, पुराने मुतवल्ली के समय पोस्ट ऑफिस के साथ एग्रीमेंट भी किया गया था, क्योंकि पोस्ट ऑफिस की ओर से भी संबंधित रिकॉर्ड में रजिस्टर्ड प्रक्रिया थी। उन्होंने बताया कि जब मामले में रजिस्ट्री सामने आई तो वकीलों की संख्या भी बढ़ती गई। उनका कहना है कि शुरुआत में वे पांच वकील थे, लेकिन बाद में करीब 15-16 वकील इस मामले में जुड़ गए। 'पहले 24 वकीलों का पैनल बताया गया, अब 500 वकील सलाह देंगे' तनवीर अहमद ने कहा कि कुछ दिन पहले यह बात भी सामने आई थी कि मामले की पैरवी के लिए 24 वकीलों का पैनल बनाया गया है। हालांकि उनका कहना है कि उस पैनल में कौन-कौन वकील शामिल हैं, इसकी जानकारी नहीं है। अब उनका दावा है कि मुस्लिम समाज और वकीलों का बड़ा पैनल मामले की अगली कानूनी कार्रवाई पर निर्णय लेगा। इस पैनल में करीब 500 वकील बताए गए हैं। सभी की सलाह के बाद हाईकोर्ट में मुकदमा या रिट दाखिल करने का फैसला किया जाएगा। 'ज्यूडिशरी से भी अभी तक न्याय नहीं मिला' तनवीर अहमद ने न्यायपालिका को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अगर न्यायिक प्रक्रिया सही तरीके से आगे बढ़ती है तो उन्हें इंसाफ मिलेगा। हालांकि उन्होंने कहा कि अब तक जो न्यायिक निर्णय सामने आए हैं, उनसे उन्हें न्याय नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि मौजूदा फैसले को बड़े वकीलों से कानूनी तौर पर पढ़वाया और समझवाया जाएगा। उनके मुताबिक, वकीलों की राय है कि फैसला कानून के अनुरूप नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि वे न्यायपालिका पर सीधे तौर पर कटाक्ष नहीं करना चाहते, क्योंकि वे खुद कानून के रखवाले हैं। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में सवाल उठाना जरूरी हो गया है। 'प्रशासन ने कानून से ऊपर उठकर मस्जिद पर बुलडोजर चलाया' तनवीर अहमद ने प्रशासन की कार्रवाई पर सीधे सवाल उठाते हुए कहा कि प्रशासन ने कानून से ऊपर उठकर मस्जिद पर बुलडोजर चलाया। उनका आरोप है कि कार्रवाई से पहले ये तक नहीं देखा गया कि संबंधित मस्जिद की स्थिति क्या थी और मुकदमा किसके खिलाफ तथा किस आधार पर चल रहा था। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति मस्जिद में नमाज पढ़ने जाता है और उसे यह कह दिया जाता है कि आज से आप मुतवल्ली हैं। इसके बाद उसी व्यक्ति के नाम से मुकदमे चलने लगते हैं। उन्होंने इसी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब उनके नाम से न बैंक खाता है और न वक्फ रिकॉर्ड में नाम दर्ज है, तो उन्हें मुतवल्ली मानने का आधार क्या था। 'सरकार ने मुकदमा ही गलत चलाया' तनवीर अहमद का आरोप है कि सरकार की ओर से पूरा मुकदमा ही गलत तरीके से चलाया गया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को पहले यह देखना चाहिए था कि मस्जिद से संबंधित रिकॉर्ड क्या है, वह कहां रजिस्टर्ड है और वक्फ बोर्ड के रिकॉर्ड में उसकी स्थिति क्या है। उनका कहना है कि अगर मस्जिद वक्फ बोर्ड में दर्ज है तो वक्फ बोर्ड को भी मामले में पार्टी बनाया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि अब आगे की कानूनी लड़ाई में यह बड़ा सवाल रहेगा कि मामले में पार्टी किसे बनाया जाएगा। हाईकोर्ट जाने की तैयारी तनवीर अहमद के मुताबिक, जिला प्रशासन के बाद न्यायिक प्रक्रिया में हाईकोर्ट और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट तक जाने का रास्ता मौजूद है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आगे की कार्रवाई किसके नाम से और किसे पक्षकार बनाकर की जाएगी। उन्होंने कहा कि मस्जिद से जुड़े वकीलों का पैनल इस पर निर्णय लेगा। करीब 500 वकीलों की राय लेने के बाद आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट दाखिल किए जाने की संभावना है। तनवीर अहमद ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि हाईकोर्ट में पूरे मामले के दस्तावेज और आदेश सामने रखे जाएंगे और वहां से उन्हें न्याय मिलेगा। --------------------- ये खबर भी पढ़िए- बहू ने नौकर से पूछा- स्मार्ट हो, गर्लफ्रेंड तो होगी: कानपुर में 3 महीने में फंसाकर करोड़पति ससुर की हत्या करवाई; चैट से खुलासा तुम यार हो तो स्मार्ट। तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है या नहीं। अभी तक शादी क्यों नहीं की। यह मैसेज करोड़पति कारोबारी विनीत मिनोचा (63) की बहू शालू (35) ने अपने नौकर विशाल को वॉट्सऐप पर भेजा था। उसने विशाल से ही अपने ससुर की हत्या कराई थी। पुलिस के मुताबिक, दोनों के बीच करीब 3 महीने से बातचीत हो रही थी। वारदात वाले दिन भी शालू और विशाल के बीच 40 बार फोन पर बात हुई थी। पढ़ें पूरी खबर…
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